)
देश का सियासी माहौल एक बार फिर गरमा गया है, और इस बार निशाने पर हैं चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार. वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और सॉफ़्टवेयर को दिल्ली से कंट्रोल करने को लेकर एक नई मीडिया रिपोर्ट सामने आई है, जिसने विपक्ष को सरकार और चुनाव आयोग को घेरने का बड़ा मौका दे दिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोल दिया है और बात संसद में महाभियोग लाने तक पहुंच गई है. दूसरी तरफ़, बीजेपी इन सारे आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि ज्ञानेश कुमार अचानक पूरे विपक्ष के निशाने पर आ गए?
दरअसल, राहुल गांधी चुनाव आयोग के बहाने बीजेपी और सरकार को घेरना चाहते हैं. यही कारण है कि आज उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को कथित वोट चोरी के मामले में अप्रूवर यानी सरकारी गवाह बनने का ऑफ़र दिया. कल यानी 25 सितंबर को कांग्रेस, ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ देशभर में प्रदर्शन करेगी. गैर-राजनीतिक पार्टी CJP भी इस राजनीतिक लड़ाई में कूदी है. वहीं विपक्ष के वैचारिक आक्रमण और सवालों के बीच खुद ज्ञानेश कुमार चुप हैं.
सूत्रों के मुताबिक विपक्ष अब मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. कांग्रेस ने महाभियोग के लिए विपक्षी दलों से संपर्क किया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त पर विपक्षी नेताओं के शाब्दिक हमले की जानकारी हम आपको विस्तार से देंगे, लेकिन पहले बात उस रिपोर्ट की जिसके बाद ये पूरा विवाद शुरू हुआ है. आज अंग्रेज़ी अख़बार में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाने वाली रिपोर्ट की दूसरी किस्त छपी. आज की रिपोर्ट में गोवा में SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले तथ्यों को विस्तार से बताया गया है.
रिपोर्ट दावा करती है कि 17 फ़रवरी को गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दिल्ली में चुनाव आयोग को SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट को लेकर चिट्ठी लिखी थी. चिट्ठी में उन 97 मतदाताओं का ज़िक्र था जिनका नाम जांच के बाद वोटर लिस्ट में जोड़ा जाना था. ईमेल में लिखा गया था कि सॉफ़्टवेयर ECINet के ज़रिए 97 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में नहीं जोड़ सकते, क्योंकि इस सॉफ़्टवेयर को दिल्ली से कंट्रोल किया जाता है. 18 फ़रवरी को आयोग को कहा कि IT सिस्टम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक काम करे. मतदाताओं के नाम फाइनल वोटर लिस्ट में जोड़े जाएं. 21 फ़रवरी को फाइनल वोटर लिस्ट छपी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 97 मतदाताओं के नाम फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल नहीं थे.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सॉफ़्टवेयर ECINet को दिल्ली से केंद्रीय स्तर पर कंट्रोल किया जा रहा था. उसमें नाम जोड़ने का कोई विकल्प नहीं था. रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर से अगस्त के बीच अपने नोट्स में इस बात को बार-बार रेखांकित किया कि सॉफ़्टवेयर पर केंद्रीकृत कंट्रोल की वजह से ERO यानी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों की पहुंच वोटर लिस्ट तक नहीं है, वोटर लिस्ट तैयार करने की ज़िम्मेदारी ERO की ही होती है.
सरल शब्दों में कहें तो गोवा के अलग-अलग उदाहरणों के ज़रिए ये बताया गया है कि SIR पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मनमानी की. दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नहीं सुना, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े सॉफ़्टवेयर को केंद्रीकृत कर दिया गया.
प्रसिद्ध अमेरिकी विचारक नोम चॉम्स्की ने कहा है कि 'लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा तब पैदा होता है, जब आम नागरिक यह महसूस करने लगते हैं कि उनकी लोकतांत्रिक संस्थाएं अब उनके प्रति जवाबदेह नहीं रहीं और वे निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रही हैं.'
आज रिपोर्ट की दूसरी किस्त छपने के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों की लिस्ट में नए सवाल जुड़ गए. इन सवालों के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल किए. उन्होंने कहा:
राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख़ास तौर से हरियाणा विधानसभा चुनाव का जिक्र किया. आरोप लगाया कि हरियाणा चुनाव में भयावह वोट चोरी हुई. राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की.
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त पर ही सवाल नहीं उठाए, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. राहुल गांधी ने कहा कि 21 दिसंबर 2023 को सरकार ने कानून पास कर चुनाव आयुक्त को जांच के दायरे से बाहर कर दिया. मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के समय चयन समिति के सदस्य होने के नाते उनके विरोध की अनदेखी की गई. राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी कर बनाए गए सभी कानून अवैध हैं. दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में जो गड़बड़ी की गई है उससे जुड़े सबूत विपक्ष के पास हैं. अगले कुछ महीनों में इस पर बड़ा एक्शन दिखेगा.
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार को केंद्र में रखकर पूरी चुनाव प्रक्रिया और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए. उनके आरोपों का बीजेपी ने बिंदुवार जवाब दिया. बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. बीजेपी के भी कुछ सवाल थे, बीजेपी के सवाल..कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से थे.
बीजेपी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त की फ़ोटो भी दिखाई। इस फ़ोटो के ज़रिए बीजेपी ने बड़ा संदेश दिया। याद दिलाया कि राहुल ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन उन्हीं ज्ञानेश कुमार की प्रशंसा अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कर चुके हैं.
17 अगस्त 2026 के ट्रुथ सोशल पर अपने संदेश में ट्रंप ने दावा किया था कि ज्ञानेश कुमार ने उनके प्रशासन से पूछा था अमेरिका में वैध फ़ोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे हो सकते हैं?
ट्रंप ने भारत में साफ़-सुथरे चुनाव का उदाहरण देकर अमेरिका में निष्पक्ष चुनाव के लिए SAVE America Act पारित करने की मांग की थी. इस फ़ोटो के ज़रिए बीजेपी ने ये संदेश दिया कि भारत की निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के प्रशंसक ट्रंप भी हैं। ऐसी चुनाव प्रणाली पर राहुल सवाल उठा रहे हैं. हालांकि कांग्रेस अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लड़ाई को सड़क से संसद तक ले जाने की तैयारी कर रही है.
कांग्रेस ने आज ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया. कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन की टाइमलाइन फ़िक्स कर दी है. विरोध प्रदर्शन के पहले चरण में कल पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव आयोग के ऑफिस के बाहर प्रोटेस्ट करेंगे. दूसरे चरण में जिला कांग्रेस कमेटियां 28 दिसंबर को पूरे देश में जिला कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगी. हालांकि भोपाल में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता आज ही सड़क पर उतर आए. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफ़े की मांग की.
ये तो हुई सड़क की बात. अब संसद की लड़ाई को भी समझिए. कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग लाने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के मुताबिक विपक्ष अब मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. कांग्रेस ने महाभियोग के लिए विपक्षी दलों से संपर्क साधा है. कांग्रेस वोट चोरी के मुद्दे को विपक्षी एकता का आधार बनाने की कोशिश कर रही है. अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने इसका संकेत भी दिया।.
मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ एक मोर्चा कॉकरोच जनता पार्टी ने भी खोला. सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके महाराष्ट्र से दिल्ली पहुंचे. प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की टाइमलाइन फिक्स कर दी। कहा 48 घंटे में मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें. दीपके ने चुनाव प्रक्रिया में सुधार की मांग करते हुए अपनी डिमांड की एक लिस्ट भी जारी की. सीजेपी नेताओं ने कहा कि
यहां हम एक दिलचस्प राजनीतिक होड़ की तरफ भी आपका ध्यान दिलाना चाहते हैं. जैसे नीट पेपर लीक के ख़िलाफ़ छात्र आंदोलन में हुआ था, कुछ वैसा ही मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ विपक्ष के असंतोष में होता दिख रहा है. याद कीजिए सीजेपी ने नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर अपने आंदोलन का मंच सजाया था. छात्रों से जुड़े इसी मुद्दे पर राहुल गांधी अलग विरोध प्रदर्शन में नजर आए थे. अब मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में भी कुछ वैसा ही हो रहा है.
अभिजीत दीपके अब तक पढ़ाई को मुद्दा बना रहे थे, लेकिन जैसे ही मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रिपोर्ट छपी, तत्काल वो दिल्ली पहुंचे और राहुल गांधी से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की. 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया. कांग्रेस ने दीपके से एक दिन पहले यानी कल ही प्रदर्शन का ऐलान कर दिया. विरोध प्रदर्शन विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन विरोध में आगे रहने की जो बारीक सियासत हो रही है वो बहुत दिलचस्प है.