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काली कमाई, बारूद की सप्लाई: शहीद का पैसा, किसने खींचा लाल किले पर तबाही का नक्शा!

दिल्ली के लाल किला पर हुए ब्लास्ट में अब कई अहम राज सामने आए हैं. एनआईए ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें शू बम, फंडिंग और हत्यारा बनने की ट्रेनिंग के बारे में खुलासा शामिल है.

Written By Rachit Kumar
Published: Sep 10, 2026, 11:39 AM IST | Updated: Sep 10, 2026, 11:42 AM IST
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लाल किला ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं. यह भी साफ हो गया कि धमाका करने वाले डॉ. उमर उल नबी ने घबराहट में धमाका नहीं किया था. बल्कि उसके जूते से एक डिवाइस कनेक्ट था, जिससे ठीक लाल किले के सामने ही ब्लास्ट को अंजाम दिया गया.

एनआईए की चार्जशीट में यह भी सामने आया कि ग्रुप को फंडिंग कौन दे रहा था. साथ ही फिदायीन बनने की ट्रेनिंग कैसे दी जाती थी. चार्जशीट के मुताबिक,  मुमिल शकील से शादी करने वाली लखनऊ की डॉक्टर शहीद सईद ने 'AGuH अंतरिम' (AGuH Interim) नाम के इस AGuH ग्रुप को फंडिंग देने में अहम भूमिका निभाई. AGuH को जुलाई 2017 में जाकिर रशीद भट उर्फ जाकिर मूसा ने बनाया था, जो कभी बुरहान वानी का करीबी सहयोगी था और हिज्बुल मुजाहिदीन से अलग हो गया था.

बनाया गया नया अंतरिम ग्रुप

शुरुआती दिनों में, AGuH ने जम्मू-कश्मीर में दूसरे संगठनों के साथ मिलकर काम किया, लेकिन सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के कारण इसकी गतिविधियां बंद हो गईं. इंटेलिजेंस से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कश्मीर में AGuH को ज्यादा समर्थन नहीं मिला. मई 2019 में सुरक्षा बलों ने जब मूसा को मारा तो उसके बाद यह संगठन खत्म हो गया. लेकिन नबी और दूसरों ने इसे फिर से शुरू करने के लिए यह 'अंतरिम' ग्रुप बनाया.

चार्जशीट के मुताबिक, 'शकील को अच्छी तरह पता था कि सईद ने मिडिल ईस्ट में मेडिकल प्रोफेशनल के तौर पर काम किया था और उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी. आर्थिक फायदा उठाने के लिए, उसने उनके साथ करीबी रिश्ते बनाए और बाद में 2023 में उनसे शादी कर ली. अगले कुछ महीनों में, उसने धीरे-धीरे उनकी धार्मिक सोच को कट्टरपंथी बनाया और AGuH को फिर से संगठित करने के मकसद से उन्हें AGuH अंतरिम में शामिल होने के लिए राजी किया.

16 लाख रुपये नकद दिए

इस दौरान, उसने उन्हें नबी, डॉ. अदील अहमद राथर और वागे जैसे ग्रुप के दूसरे सदस्यों से मिलवाया.' NIA का कहना है कि सईद ने ग्रुप के मकसद को आगे बढ़ाने के लिए शकील के जरिए राथर को 16 लाख रुपये नकद दिए थे.

नबी और राथर ने इस रकम का कुछ हिस्सा हथियार और गोला-बारूद खरीदने में इस्तेमाल किया. चार्जशीट के मुताबिक, 'इसी तरह, विस्फोटक बनाने के लिए कच्चा माल, जैसे एसीटोन, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, NPK फर्टिलाइजर, कोलैप्सिबल वॉटर बैग, केमिकल और दूसरी चीजें नबी और शकील ने सईद से मिले फंड से खरीदी थीं.'

अल-फलाह यूनिवर्सिटी में उनके लॉकर से नकद बरामद करने के अलावा, NIA ने श्रीनगर में वागे के घर से उनकी एक फोटो भी बरामद की, जिसमें वह AK-47 लिए हुए थीं.

दी गई हत्यारा बनने की ट्रेनिंग

जांच के दौरान, NIA ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी और जम्मू-कश्मीर में नबी और दूसरे आरोपियों के ठिकानों से कई दस्तावेज और उनके डिजिटल डिवाइस बरामद किए. NIA के मुताबिक, बरामद दस्तावेजों में से एक How to become an assassin-the preparation है. यह एक मैनुअल है जिसमें लड़ाई, सीक्रेट ऑपरेशन के कई तरीकों के बारे में जानकारी दी गई है. इसमें आमने-सामने की लड़ाई, बेसिक मार्शल आर्ट्स, कमांडो फाइटिंग के तरीके, बंदूक और खास तरह के गोला-बारूद का इस्तेमाल, हथियार चलाने की सामान्य जानकारी के साथ-साथ हमले के तरीके जैसे कि पहरेदार को हटाना, घात लगाकर हमला करना और पकड़ने की तकनीकें शामिल हैं.

इस ग्रुप से मिला एक और दस्तावेज 'लोन मुजाहिद पॉकेट बुक' है. यह ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी का एक कलेक्शन है जो ब्लास्ट, आग, बंदूक और गाड़ियों का इस्तेमाल करके गुप्त, गैर-कानूनी और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने में मदद कर सकता है. इसे अल-कायदा की ‘इंस्पायर’ (Inspire) मैगजीन ने पब्लिश किया था.

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About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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