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Secular Social Justice Victory Alliance: तमिलनाडु की सियासत में अभिनेता से नेता फिर मुख्यमंत्री बने थलपति विजय ने अपनी पार्टी TVK की अगुवाई में कांग्रेस समेत पांच दलों ने नया गठबंधन बनाया है. साउथ के सियासी दिग्गजों ने इसका नाम ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ रखा है. ये गठबंधन आगामी विधानसभा उपचुनाव से डेब्यू करने जा रहा है. इस गठजोड़ में कांग्रेस के अलावा एमडीएमके, आईयूएमएल और वीसीके शामिल हैं.
इस अलायंस को धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आगे बढ़ाने का दावा किया गया है. VCK नेता एसएस बालाजी ने कहा कि नाम से साफ संदेश जाएगा कि गठबंधन BJP और कथित ‘फासीवादी ताकतों’ के खिलाफ रहेगा.
नए नवेले गठबंधन की समन्वय बैठक पनैयूर स्थित TVK के मुख्यालय में हुई. बैठक की अध्यक्षता टी. विजय ने की. कांग्रेस, VCK, MDMK और IUML के नेता इस बैठक में शामिल हुए. इस दौरान दक्षिण भारत में गठबंधन की औपचारिक संरचना, कॉमन मिनिमम प्रोग्राम और कामकाज के तरीकों पर चर्चा हुई. हालांकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और CPI के नेता इस बैठक में शामिल नहीं हुए. लेकिन TVK कोटे से मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि दोनों कम्युनिस्ट पार्टियां जल्द ही गठबंधन का हिस्सा बनेंगी.
गठबंधन के बारे में बताते हुए VCK पार्टी के नेता एसएस बालाजी ने बताया कि इसका सुझाव मुख्यमंत्री विजय ने दिया था. उन्होंने कहा कि इस नाम से सभी को साफ संदेश मिलेगा कि गठबंधन BJP और ‘फासीवादी ताकतों’ का विरोध करेगा. बालाजी ने कहा, 'यह आलोचना होती रही है कि TVK, BJP के प्रति नरम रुख रखती है, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी.'
मीडिया से बातचीत में तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के प्रमुख माणिक्कम टैगोर ने कहा कि TVK और कांग्रेस के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है. उन्होंने कहा कि सही समय आने पर TVK गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का समर्थन करेगी.
तमिलनाडु के सियासी गलियारों में कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाल के दिनों में ‘विजय फॉर पीएम’ की बढ़ती मांग को लेकर असहज नजर आई है. कांग्रेस कोटे से राज्य की सरकार में मंत्री राजेश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि अगर विजय को भविष्य में प्रधानमंत्री बनाने का अभियान जोर पकड़ता है तो TVK सरकार में कांग्रेस के मंत्रियों का बने रहना मुश्किल हो सकता है.
जब बालाजी से पूछा गया कि क्या TVK विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन में शामिल होगी, तो उन्होंने कहा कि ऐसा तब होगा, जब TVK के पास संसद में अपने सदस्य होंगे. गौरतलब है फिलहाल पार्टी का लोकसभा या राज्यसभा में कोई सांसद नहीं है.
इससे पहले जब भी देश में गठबंधनों की चर्चा होती थी, बीजेपी, एनडीए को और अन्य का नेतृत्व हमेशा से कांग्रेस पार्टी ही करती थी. एनडीए को काउंटर करने के लिए लाए गए यूपीए में उत्तर से लेकर दक्षिण तक कांग्रेस ने उसकी अगुवाई की.
इस बार कुछ ऐसा हुआ है कि देश में नया सियासी गठबंधन बना है और कांग्रेस उसकी अगुवाई नहीं कर रही है. तमिलनाडु में डीएमके को सियासी तलाक देकर नया गठजोड़ करने वाली कांग्रेस के इस फैसले से कुछ लोग हैरान हैं. इसलिए देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का एक नई नवेली पार्टी का नेतृत्व स्वीकार कर लेने का फैसला एक नया सियासी घटनाक्रम माना जा रहा है.
देश की सियासत की बात करें तो हमेशा उत्तर भारत पर राज करने वाली पार्टी ही केंद्र में सरकार बनाती थी, हालांकि उसमें भी दक्षिण भारत के दल शामिल होते थे. ऐसा इसलिए भी होता आया था क्योंकि लोकसभा की 545 सीटों में अधिकांश उत्तर भारत में हैं. यानी सियासी गंगा, उत्तर से दक्षिण को ओर बहती थी, लेकिन तमिलनाडु से शुरू 'विजय फॉर पीएम' कैंपेन का शोर और कांग्रेस का टीवीके के बैनर तले आना भविष्य के लिए बहुत से सवाल खड़े कर रहा है. सवाल ये भी है कि कहीं देश की सियासी गंगा, उत्तर से दक्षिण के बजाए भविष्य में दक्षिण से उत्तर की ओर तो नहीं बहने जा रही?