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टीएमसी के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथिंद्र बोस आज (गुरुवार, 8 सितंबर) अपना फैसला सुना सकते हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए सभी बागी विधायकों को बुलाया है. सूत्रों के अनुसार, स्पीकर ने सभी विधायकों को दोपहर 3 बजे बुलाया है. इस गुट के साथ ऋतब्रत बनर्जी भी मौजूद रहेंगे. उनकी अगुवाई में ही टीएमसी के 10 विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से रिश्ता तोड़ लिया है. ऋतब्रत वर्तमान में सदन में विपक्ष के आधिकारिक नेता (LoP) हैं. वहीं, दूसरी ओर ममता बनर्जी गुट की ओर से पार्टी के अनुभवी विधायक शोवनदेब चट्टोपाध्याय और उनके वकील के सुनवाई में उपस्थित हो सकते हैं.
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद नेता-प्रतिपक्ष पद के लिए टीएमसी में बड़ी टूट देखने को मिली. 10 विधायकों ने ममता बनर्जी से बगावत करके ऋतब्रत बनर्जी को नेता-प्रतिपक्ष की कुर्सी पर बिठा दिया. वहीं, विभाजन के बाद ममता बनर्जी गुट की ओर से विधायक शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 'बागी' विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए उन्हें विधानसभा स्पीकर के पास भेज दिया था. कोर्ट ने साफ कहा था कि बागी 10 विधायकों की अयोग्यता पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार स्पीकर के पास है.
सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को इस मामले में जल्द से जल्द निर्णय लेने का आदेश दिया था. जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था, तब स्पीकर बोस आधिकारिक दौरे पर विदेश में थे. कोलकाता लौटते ही उनकी तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. अब काम पर लौटने के बाद उन्होंने सबसे पहले तृणमूल कांग्रेस के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर महत्वपूर्ण सुनवाई बुलाई है.
उधर, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मूल नाम "ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस" और चुनावी चिन्ह "ग्रासरूट्स एंड फ्लावर" दोनों पर रोक लगा दी है. चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को "ममता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस" का नया नाम और "फुटबॉल खिलाड़ी" का नया चुनाव चिन्ह आवंटित किया है, जबकि ऋतब्रत गुट को "डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस" का नया नाम और "लिफाफा" का नया चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है.
इनपुट- आईएएनएस