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तमिलनाडु सरकार ने अपना एक बड़ा फैसला वापस ले लिया है. सरकार ने पहले पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार और प्रदर्शनों से जुड़ी जानकारी को आरटीआई (RTI) से बाहर कर दिया था. यानी लोग अर्जी लगाकर यह जानकारी नहीं मांग सकते थे, लेकिन सहयोगी दलों और एक्टिविस्टों के भारी विरोध के बाद सरकार झुक गई है. फैसला आने के कुछ ही घंटों बाद इसे रद्द कर दिया गया. अब यह सारी जानकारी पहले की तरह आरटीआई में मिलेगी.
दरअसल, मानव संसाधन प्रबंधन विभाग की ओर से जारी आदेश में आरटीआई कानून की धारा 24(4) का इस्तेमाल किया गया था. यह नियम राज्य सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी विभाग को 'खुफिया या सुरक्षा संगठन' घोषित कर आरटीआई के दायरे से बाहर रख सकती है.
तमिलनाडु सरकार ने इसी नियम के तहत 'पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट' को छूट दी थी. हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अचानक इस विभाग को सुरक्षा एजेंसी घोषित करने की क्या जरूरत पड़ी थी और विरोध होते ही इसे क्यों निरस्त किया गया.
Chief Minister Vijay-led TVK government in Tamil Nadu has exempted the Public (Law and Order) Department from the RTI Act.
A Gazette notification issued under Section 24(4) of the RTI Act has classified the department as an Intelligence and Security Organisation. This means… pic.twitter.com/Cfv4bGao9I— ANI (@ANI) September 27, 2026
यदि यह फैसला लागू रहता, तो आम नागरिक आरटीआई के तहत निम्नलिखित संवेदनशील रिकॉर्ड्स की जानकारी नहीं हासिल कर पाते...
(नोट: कानून के अनुसार सिर्फ भ्रष्टाचार और मानवाधिकार हनन से जुड़ी जानकारी मांगने की ही छूट बचती)
इस आदेश के सामने आते ही विपक्षी दलों और जानकारों ने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस फायरिंग, हिरासत में थर्ड डिग्री टॉर्चर और दंगों के सच को दबाने की कोशिश कर रही है. इसे प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा हमला बताया गया.
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था विभाग कस्टोडियल डेथ, पुलिस फायरिंग और दंगों से जुड़े संवेदनशील मामले संभालता है. ऐसी जानकारियों को जनता से छिपाना पारदर्शी शासन के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि आरटीआई का दायरा बढ़ना चाहिए, न कि कम होना चाहिए. फैसला वापस होने के बाद उन्होंने इसका स्वागत किया और सरकार को नौकरशाहों के दबाव में न आने की सलाह दी.
The @TVKVijayHQ government's move to exempt the Public (Law and Order) Department from the RTI Act does not set a good precedent. It's worth recalling that RTI was a landmark decision brought in by the @INCIndia headed UPA government, intended to strengthen democratic…
— Karti P Chidambaram (@KartiPC) September 27, 2026
भाजपा नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रशासन मीडिया, जनता और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करने से डर रहा है. उन्होंने सवाल किया, 'अगर सरकार का कामकाज साफ-सुथरा और निष्पक्ष है, तो फिर आरटीआई से इतना खौफ क्यों?'
गजट अधिसूचना रद्द होते ही कानून-व्यवस्था विभाग से यह विशेष छूट पूरी तरह खत्म हो गई है. अब यह विभाग पहले की तरह ही आरटीआई के सामान्य नियमों के तहत जनता के प्रति जवाबदेह रहेगा और नागरिक पहले की तरह सभी जरूरी सार्वजनिक जानकारियां मांग सकेंगे.