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सोचिए, जिस आंगन में आप रोज उठते-बैठते हों, चाय पीते हों, उसी फर्श के ठीक 5 फीट नीचे किसी की लाश दफन हो तो? सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, यह किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की कहानी नहीं बल्कि गुजरात के सूरत में ठीक ऐसा ही हुआ है. यहां 4 साल तक सब यही समझते रहे कि घर की बुजुर्ग नानी कोरोना में चल बसीं. लेकिन सच यह था कि नानी को मारकर प्लास्टिक के ड्रम में डाला गया, उसमें सीमेंट का घोल भरा और पूरा ब्लॉक आंगन में 5 फीट नीचे दफना दिया गया. कत्ल के बाद नानी की लाश को ड्रम में ठूंसकर तीन बोरी सीमेंट घोल दिया गया. फिर उस भारी-भरकम सीमेंट के ब्लॉक को आंगन में गाड़कर ऊपर से पक्का फर्श बना दिया.
बात सिर्फ नानी तक नहीं थमी. उसी एक साल के अंदर परिवार की दो और बीमार औरतों की मौत की कहानी गढ़ी गई, लेकिन सच यह था कि उन्हें तकिए से मुंह दबाकर मार दिया गया था. यह खौफनाक राज कभी बाहर नहीं आता, अगर पति-पत्नी के बीच झगड़ा न होता. झगड़े के बाद खुन्नस खाया पति बीवी से बदला लेने के चक्कर में उसे फंसाने के लिए थाने पहुंच गया, उसके बयानों पर पुलिस को डाउट हुआ और फिर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पति ने ऐसा राज खोला, जिसने हर किसी को चौंका दिया. जब घर के आंगन की खुदाई कराई तो जमीन के अंदर से जो निकला, उसने पुलिसवालों के भी होश उड़ा दिए.

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी पति और पत्नी
यह मामला सूरत के कोसांबा का है. वडफालिया इलाके में मौजूद एक घर से पुलिस को तीन महिलाओं के कंकाल मिले हैं. पुलिस ने बताया कि यह तीनों कत्ल माधवदास और उसकी पत्नी उर्मिला ने मिलकर किए थे. जिनका कत्ल हुआ उनमें उर्मिला की नानी शांताबेन, उसकी बहन भगवतीबेन और माधवदास की अपनी मां मंजुलाबेन शामिल हैं. अब आपको ये भी जान लेना चाहिए कि आखिर इनके कत्ल क्यों और कैसे किए गए और खुलासा कैसे हुआ....
माधवदास और उर्मिला ने सबसे पहले उर्मिला की बहन भगवतीबेन वसावा को मौत के घाट उतारा. पुलिस के अनुसार, वो टीबी की बीमारी से जूझ रही थीं. जब वो नींद में थीं तभी तकिए से उनका मुंह दबाकर दम घोंट दिया गया और पड़ोसियों को बताया कि उनकी मौत बीमारी के चलते हो गई और फिर शव को दफना दिया.
इस बार माधवदास ने अपनी मां मंजुलाबेन को मार दिया. पुलिस ने बताया कि वो लकवे (पैरालिसिस) का शिकार थीं और बिस्तर पर पड़ी रहती थीं. आरोप है कि इस पति-पत्नी ने मिलकर तकिए से उनका भी मुंह दबा दिया और सांसें रोक दीं. दुनिया की नजरों में इसे भी बीमारी से हुई मौत बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया.
तीसरी हत्या उर्मिला की बुजुर्ग नानी शांताबेन की हुई. पुलिस के अनुसार, सोते समय उनका भी तकिए से मुंह दबाया गया. फिर उनकी लाश को बेहद खौफनाक तरीके से ठिकाने लगाया. शव को पहले एक बड़े प्लास्टिक के ड्रम में ठूंसा, फिर उसे सीमेंट से सील कर दिया. फिर करीब साढ़े तीन महीने बाद दोनों ने ड्रम को खोलकर शव को सीमेंट के ब्लॉक समेत घर के बरामदे में खोदे गए गड्ढे में दफना दिया. ऊपर से सीमेंट की परत भी डाल दी, ताकि किसी को शक ना हो. रिश्तेदारों को बता दिया कि उनकी मौत कोरोना के चलते हुई है, क्योंकि साल 2022 में कोरोना का कहर था. इस तरह शव परिजनों को नहीं दिए जाने का बहाना बनाकर मामला दबा दिया.

ये राज शायद कभी ना खुलता, अगर पति-पत्नी के बीच विवाद ना होता. हुआ ये कि माधवदास और उसकी पत्नी उर्मिला आपस में लड़ गए. गुस्साया पति सीधे पुलिस के पास पहुंचा और उसने पत्नी को फंसाने की झूठी कहानी सुना डाली. उसने पुलिस से कहा कि नानी शांताबेन का कत्ल उसकी पत्नी उर्मिला और उसके चचेरे भाई अफजल उर्फ पोटो दीवान ने किया है, जब पुलिस ने अफजल को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो पता चला कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना ही नहीं था. अब पुलिस को माधवदास पर शक हुआ. फिर जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो वो टूट गया और उसने पूरा राज खोल दिया. उसने कबूल किया कि वह अपनी पत्नी और उसके रिश्तेदार को जेल भिजवाने के लिए झूठी कहानी गढ़ रहा था. फिर उसने एक के बाद एक तीनों हत्याओं की कहानी सुनाई और बताया कि कैसे उसने और उर्मिला ने मिलकर तीनों को मारा था.

माधवदास ने जब कबूल कर लिया तो पुलिस उसे लेकर उसके घर गई. घर के आंगन में सीमेंट का पक्का फर्श था. जब उसकी मोटी परत तुड़वाई गई और 5 फीट गड्ढा खोदा गया तो इंसानी कंकाल निकले, जिन्हें देख हर कोई हैरान रह गया. अब पुलिस ने कंकालों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है. इस खुलासे के बाद पड़ोसी हैरान हैं, क्योंकि वो सभी ये मानकर चल रहे थे कि नानी की मौत कोरोना की वजह से हुई थी.