2200 KM की फरारी, 10 दिन तक पुलिस को चकमा, Z गैंग से क्यों जुड़े श्रद्धा केस के तार?
लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद नागपुर से आरोपी श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है. अब उनसे पूछताछ की जा रही है.इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या श्रद्धा और जेड गैंग के बीच कोई कनेक्शन है?
लखनऊ के कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है. श्रद्धा दुबे की फरारी, नागपुर में छिपने और मुंबई में कथित ठिकाने की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं के बीच अब Z गैंग के कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
बहराइच के रूपईडीहा में SUV मिली. सोशल मीडिया पर श्रद्धा के वीडियो सामने आए, पुलिस की टीमें कई शहरों में तलाश करती रहीं और 20 अक्टूबर को नागपुर में श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश की गिरफ्तारी हुई.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. कथित तौर पर फार्म हाउस में ठहराने की तैयारी और मुंबई के Z गैंग से संभावित कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. क्या फरारी के पीछे सिर्फ ठिकाने बदलने की रणनीति थी, या किसी ने पर्दे के पीछे से मदद की? अब पढ़िए श्रद्धा केस की टाइमलाइन,फरारी के रूट और संभावित मददगारों पर हमारी एक्सक्लूसिव पड़ताल.
2200 किलोमीटर, कई शहर और एक ऐसी तलाश, जिसमें हर नई लोकेशन के साथ जांच की दिशा बदलती रही. 9 अक्टूबर को हजरतगंज के बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इसके बाद श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि, चालक तनवीर अली उर्फ दानिश और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई.
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की. अब जांच का अहम हिस्सा है घटना के बाद उनकी गतिविधियों की मिनट-दर-मिनट टाइमलाइन तैयार करना.
नेपाल बॉर्डर के पास आखिरी लोकेशन
10 अक्टूबर को आरोपियों की गाड़ी के सीतापुर-लखीमपुर मार्ग से बहराइच के रूपईडीहा पहुंचने की जानकारी सामने आई. शाम करीब 6 बजकर 20 मिनट पर भारत-नेपाल सीमा के पास आखिरी लोकेशन मिली थी. 13 अक्टूबर को श्रद्धा की SUV रूपईडीहा इलाके में खड़ी मिली. SUV तो मिली, लेकिन आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस को आगे की कड़ियां जोड़नी पड़ीं.
आगरा में ठहरने और अलग-अलग शहरों से होते हुए नागपुर पहुंचने के इनपुट इस केस की जांच में अहम हैं. अगर आरोपियों ने रास्ते में होटल, निजी वाहन या दूसरे ठिकानों का इस्तेमाल किया, तो हर जगह का रिकॉर्ड जांच की दिशा तय कर सकता है.
किसने कमरा बुक किया? किसने वाहन की व्यवस्था की? किस फोन से संपर्क किया गया? और क्या किसी व्यक्ति ने जानबूझकर पुलिस से बचने में मदद की?
ये सवाल अभी जांच की कसौटी पर हैं. किसी व्यक्ति को मददगार या साजिश में शामिल बताने के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी होंगे.
15 अक्टूबर को श्रद्धा के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए. वीडियो में उसने शिवा की मौत को आत्महत्या बताते हुए खुद को निर्दोष बताया. दूसरे वीडियो में कर्ज और जेवर से संबंधित दावे भी किए गए.
इनाम, वॉरंट और फिर नागपुर में गिरफ्तारी
13 अक्टूबर को आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई. 17 अक्टूबर को गैर-जमानती वॉरंट जारी होने और 18 अक्टूबर को इनाम बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये किए जाने की रिपोर्ट आई.
इसके बाद तलाश तेज हुई. 20 अक्टूबर को लखनऊ पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में नागपुर से श्रद्धा, रश्मि और दानिश को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई. 21 अक्टूबर को नागपुर की अदालत में पेशी और ट्रांजिट रिमांड की खबर आई.
अब जांच का अगला चरण है फरारी के दौरान संपर्कों, ठिकानों और संभावित मददगारों की भूमिका को साक्ष्यों के आधार पर क्लियर करना.
Z गैंग कनेक्शन, सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल?
इस केस में मुंबई के कथित Z गैंग का नाम भी चर्चा में आया है. गैंग के सरगना जुल्फिकार बेहलिम और उसके भाई मोहसिन बेहलिम का जिक्र है. दोनों रंगदारी समेत आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हैं. जुलाई में एक बिल्डर से 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में जुल्फिकार, मोहसिन समेत 12 लोगों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी. इस मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) भी लगाया गया था.
श्रद्धा को एक फार्म हाउस में ठहराने की कथित तैयारी का दावा भी सामने आया है. लेकिन यहां सबसे अहम बात यह है कि श्रद्धा और Z गैंग के बीच संबंधों की सार्वजनिक रूप से पुष्टि अभी नहीं है.
अब जांच की दिशा तय करेंगे ये पांच सवाल
पहला: क्या 2200 किलोमीटर के पूरे सफर का सत्यापित रूट तैयार हो चुका है?
दूसरा: रूपईडीहा में SUV मिलने के बाद आरोपियों की गतिविधियों का पता किन साक्ष्यों से चला?
तीसरा: क्या आगरा समेत दूसरे ठिकानों के होटल रिकॉर्ड और CCTV फुटेज उपलब्ध हैं?
चौथा: क्या किसी व्यक्ति ने आरोपियों को ठहरने, यात्रा या संपर्क बनाए रखने में मदद की?
पांचवां: क्या Z गैंग से संबंध का कोई ठोस सबूत मिला है या यह अभी सिर्फ जांच का संभावित एंगल है?
इन सवालों के जवाब कॉल डिटेल रिकॉर्ड, CCTV, डिजिटल साक्ष्य, यात्रा दस्तावेज और पूछताछ से ही सामने आ सकते हैं.