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आतंकी धमकियों को ठेंगा: ULC के डर को दरकिनार कर कश्मीर घाटी में उत्साह के साथ गूंजे 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे

Ganesh Chaturthi 2026 celebrations in Jammu Kashmir: आतंकी धमकियों को ठेंगा दिखाते हुए लोगों ने गणेश चतुर्थी उत्सव धूमधाम से मनाया. ULC के डर को दरकिनार कर कश्मीर घाटी में उत्साह के साथ 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे गूंजे.

Edited By Devinder Kumar
Published: Sep 15, 2026, 01:13 AM IST | Updated: Sep 15, 2026, 01:58 AM IST
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How Ganesh Chaturthi 2026 Celebrated in Jammu Kashmir? आतंकी संगठन ULC की तरफ से धमकियों के बावजूद कश्मीरी पंडित गणेश चतुर्थी मनाने के लिए श्रीनगर के गणपत्यार मंदिर में बड़ी संख्या में जुटे. इसके साथ ही कई अन्य मंदिरों में गणेश चतुर्थी उत्सव बहुत उत्साह के साथ मनाया गया. उसमें पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ सांस्कृतिक और भक्ति कार्यक्रम भी हुए.

मुख्य कार्यक्रम श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके के ऐतिहासिक गणपत्यार मंदिर में आयोजित हुआ. वहां पर पूजा और हवन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु इकट्ठा हुए. कुछ दिन पहले श्रीनगर में जन्माष्टमी रथ यात्रा के दौरान भी भारी भीड़ और जुलूस देखे गए थे.

कश्मीर घाटी में मनाई गई गणेश चतुर्थी

अनंतनाग, बारामूला और बडगाम जैसी अन्य जगहों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए गए. अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थलों पर प्रतिभागियों के लिए पर्याप्त तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था की थी. एक श्रद्धालु भूषण जलाली ने कहा, आज गणेश चतुर्थी है. कश्मीरी और हिंदू, जब भी कोई काम या अनुष्ठान शुरू करते हैं, तो भगवान गणेश की पूजा से ही शुरुआत करते हैं.

उन्होंने कहा, 'यह दिन हमारे लिए दो कारणों से बहुत महत्वपूर्ण है. पहला, धार्मिक पहलू और कश्मीर से इसका खास जुड़ाव, जिसे हम 'ऋषियों की भूमि' कहते हैं. यहां भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं को समर्पित कई मंदिर हैं. ऐतिहासिक रूप से, कोई भी तीर्थयात्रा या काम इसी मंदिर से शुरू होता था. यह हर चीज़ की शुरुआत का स्थान था क्योंकि भगवान गणेश स्वयं यहां विराजमान हैं, और इस देवता का एक अनूठा इतिहास है. हम पूरे कश्मीर और देश में यह त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं.'

मंदिर में 'हवन' रविवार रात शुरू हुआ था, जो सोमवार को दिनभर चलता रहा. मुंबई से एक भक्त भगवान गणेश को चांदी का मुकुट चढ़ाने आया.

आतंकी संगठन ULC की धमकियों की नहीं की परवाह

लोगों में यह उत्साह तब दिखा, जब आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) ने अगस्त और सितंबर की शुरुआत में कश्मीरी पंडितों को धमकी भरे कई पत्र भेजे थे.यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा एक प्रॉक्सी समूह है. इन पत्रों में कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाया गया. कुछ मामलों में तो उनके फ़ोन नंबर, पते और गाड़ी की जानकारी जैसी निजी बातें भी लिखी थीं. उन्हें नौकरी छोड़ने और कश्मीर छोड़ने की धमकी दी गई और कहा गया कि घाटी के बाहर भी उन पर नज़र रखी जा रही है. इन धमकियों के कारण सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं, बेहतर सुरक्षा की मांग की गई है और डेटा लीक होने की खबरें भी आई हैं.

गणेश चतुर्थी मनाने आए नाना जी डिवोटी ने कहा, 'हमें मिली धमकियों के बारे में मुझे अच्छी तरह पता है. हम कश्मीरी पंडित मज़बूती से खड़े हैं और उनका सामना कर रहे हैं. हम ऐसे लोग नहीं हैं जो धमकियों से डर जाएं. ये धमकियां कायरों की चालें हैं. अगर वे हमें चुनौती देना चाहते हैं, तो सामने आएं और हमारे मुंह पर कहें. गुमनाम कॉल करने या नंबरों के पीछे छिपने का क्या मतलब है?'

झेलम नदी में किया जाएगा मूर्ति विसर्जन

डिवोटी ने आगे कहा, 'वे हमारे भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं; जैसा कि मैंने अक्सर कहा है, हिंदू मुसलमानों के बिना अधूरे हैं और कश्मीरी पंडित कश्मीरी मुसलमानों के बिना अधूरे हैं. हम फूलों के गुलदस्ते की तरह हैं, इस एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें. हम सब - चाहे मुसलमान हों, कश्मीरी पंडित हों, सिख हों या ईसाई - कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े हैं. लेकिन हां, मैं चाहता हूं कि जिन लोगों ने ये धमकियां दी हैं, उन्हें सज़ा मिले और उन्हें फांसी दी जाए ताकि कोई दोबारा ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे.'

कश्मीरी पंडित मोहित भान ने कहा, 'हम यहां गणपतियार मंदिर के अंदर 'हवन' का आयोजन कर रहे हैं. यहां भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की जाएगी और सात दिनों तक रहेगी, इस दौरान पूजा-अर्चना की जाएगी. सातवें दिन, हम इसे 'विसर्जन' के लिए जुलूस के रूप में ले जाते हैं, जो झेलम नदी में किया जाता है. यह त्योहार कश्मीर में तीन जगहों पर मनाया जाता है.'

लोगों ने गणपति से की शांति की प्रार्थना

उन्होंने कहा, 'गणपतियार मंदिर, दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में वेसू और श्रीनगर में इंदिरा नगर में यह उत्सव मनाया जाता है. सात दिनों के बाद विसर्जन समारोह होता है. हम प्रार्थना करते हैं कि सभी लोग जल्द से जल्द अपने घर लौटें और यहां मौजूद समुदाय के लोगों को बीमारी, आर्थिक तंगी या बेरोजगारी जैसी किसी भी मुश्किल से राहत मिले. भगवान गणेश से हमारी यही प्रार्थना है कि सभी के घरों से ये मुश्किलें दूर हों और वहां सुकून और खुशहाली का माहौल बने, जिसका सपना कश्मीर के लिए लंबे समय से देखा जा रहा है.'

खबरों के मुताबिक, घाटी के कई मंदिरों में गणेश चतुर्थी बहुत उत्साह के साथ मनाई गई और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए.
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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