पंजाब में चुनाव: संगरूर से चुनाव प्रचार का बिगुल फूंकेंगे राहुल गांधी, यही जगह क्यों चुनी?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी 4 नवंबर यानी पंजाब में रैली करने जा रहे हैं. राहुल की रैली के साथ ही यहां 2027 के चुनावी प्रचार का बिगुल बज जाएगा. राहुल गांधी ने इस कथित इंसाफ रैली के लिए संगरूर को चुना है. क्या है उनकी रणनीति आइए जानते हैं विस्तार से.
पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल सकती है. वहीं, बीजेपी भी इस बार बंगाल की तरह बड़ा उलटफेर करने के मूड में दिख रही हैं. इसी चुनाव से राज्य में कमबैक यानी वापसी का प्लान बना रही कांग्रेस के नेताओं ने अपने सबसे बड़े नेता को उस इलाके से प्रचार के मैदान में उतारा है, जहां से 2022 में आम आदमी पार्टी की प्रचंड बहुमत वाली सरकार का रोडमैप और विक्ट्री प्लान बना था.
पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट की आंखों से स्कैन हो रही पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बुधवार की राहुल की रैली में एक लाख लोगों के आने का दावा किया है. आखिर क्या रणनीति है राहुल गांधी की और क्या है 2027 में पंजाब विधानसभा चुनावों की जीत-हार का गुण ए बताते हैं, सबकुछ आपको बताते हैं.
सत्ता का रास्ता वाया संगरूर (मालवा)
राहुल गांधी की 'इंसाफ रैली' के लिए संगरूर को चुनने के पीछे पंजाब का चुनावी गणित तो है ही, वहीं आम आदमी पार्टी की सरकार से जुड़े कुछ सियासी विवाद भी इसकी वजह माने जा रहे हैं.
संगरूर राजनीतिक रूप से अहम मालवा क्षेत्र से आता है. ये पंजाब का सबसे बड़ा और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण इलाका है. पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 69 सीटें अकेले मालवा क्षेत्र में आती हैं. यानी पंजाब की करीब 59 फीसदी विधानसभा सीटें इसी इलाके में आती हैं. यही वजह है कि यहां का चुनावी प्रदर्शन सरकार बनाने की दावेदारी करने वाली हर पार्टी के लिए बेहद अहम हो जाता है.
प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र
कुल सीटें- 117
- मालवा: 69 सीटें
- माझा: 25 सीटें
दोआबा: 23 सीटें
इस तरह पंजाब विधानसभा का रास्ता मालवा से होकर जाता है. इसी वजह से कांग्रेस पार्टी ने भी अपने चुनावी अभियान की शुरुआत किसी दूसरे क्षेत्र के बजाय मालवा से करने का फैसला किया है.
बीते करीब 30 सालों में पंजाब के ज्यादातर मुख्यमंत्री इसी इलाके से आए हैं. मालवा के संगरूर, बठिंडा, पटियाला, लुधियाना, मानसा, फरीदकोट, मोगा और फिरोजपुर सियासत के अहम सेंटर माने जाते हैं. 2022 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की महाजीत में भी मालवा के लोगों का हाथ था.
AAP ने यहां की 69 में से 66 सीटों पर जीत दर्ज की थी. पंजाब में बहुमत का आंकड़ा 59 है, उससे भी 7 सीटें ज्यादा जिताकर मालवा ने आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत सिंह मान के राजतिलक का रास्ता साफ कर दिया था.
एक बड़ी वजह ये भी
संगरूर को चुनने की एक और बड़ी वजह सूबे की नशे की समस्या है. संगरूर सीएम भगवंत सिंह मान का गृह जिला है. यही इलाका बीते कुछ महीनों से संगरूर नशे के कारोबार और पुलिस की कथित ज्यादतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है. खासकर तूर बंजारा गांव के रहने वाले गुलजार सिंह की मौत के मामले ने काफी तूल पकड़ा था. गुलजार सिंह ने खुलेआम भगवंत मान की कैबिनेट का खजाना संभालने वाले वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से अपने गांव में नशे की उपलब्धता और अपने बेटे की लत को लेकर सवाल उठाए थे.
इसके बाद विपक्षी दलों ने उनकी मौत की परिस्थितियों और नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर सवाल खड़े किए. इसके बाद इसी इलाके में हुई एक और मौत ने लोगों का ध्यान खींचा. इसके बाद सभी विपक्षी दलों ने दावा किया कि पंजाब सरकार नशे की समस्या दूर करने में नाकाम रही है. इस विवाद के बाद विपक्षी दल भी एकजुट हुए. कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी और अन्य संगठनों ने कथित तौर पर नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को निशाना बनाए जाने के विरोध में साथ आकर प्रदर्शन किया.
इसी तरह मानसा और संगरूर में भी संदिग्ध नशे से हुई मौतों, शवों को संभालने के तरीके और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों ने नशे के मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है. परविंदर सिंह झोटा इंसाफ कमेटी ने भी 5 नवंबर को मुख्यमंत्री के संगरूर स्थित आवास के बाहर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है.
विपक्षी दलों के नेता भगवंत मान पर नशे में विधानसभा आने के आरोप लगा चुके हैं. सबसे पहले ये आरोप कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भरे सदन में लगाया था. आगे चलकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने इस आरोप का समर्थन करके सीएम मान समेत सदन में मौजूद सभी सदस्यों के अल्कोहल और डोप टेस्ट की मांग की थी. आगे शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की थी. बीजेपी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर भगवंत मान सरकार को घेरा था.
विपक्ष ये कह रहा है कि जो नेता खुद को नशे के दलदल से न निकाल पाए, वो बाकी लोगों को क्या निकाल पाएंगे. ऐसे तमाम हालातों के बीच कांग्रेस ने अपनी कथित 'इंसाफ रैली' के लिए संगरूर का चुनाव किया, ताकि सियासी चक्रव्यूह रचकर मुख्यमंत्री मान को उनके गृह जिले में घेरा जा सके.