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ZEE NEWS ने 8 अक्तूबर को खबर दिखाई थी कि कैंसर की 137 दवाओं के दाम 70% तक कम होंगे. अब इस संबंध में आदेश भी जारी हो गया है. अगले महीने यानी 9 नवंबर से कैंसर की दवाइयां सस्ती मिलने लगेंगी. कैंसर मरीजों को राहत देने के लिए NPPA ने 137 नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को कम किया है.
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 137 कैंसर से जुड़ी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन यानी दवा बेचने वालों के मुनाफे की सीमा तय कर दी है. अब इन दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत यानी MRP पर ट्रेड मार्जिन 30% होगा. इससे कुछ दवाओं की कीमत मौजूदा कीमत के मुकाबले 70% तक कम हो सकती है. हालांकि, 30 फीसद ट्रेड मार्जिन तय होने का मतलब यह नहीं है कि सभी 137 दवाइयों की MRP अपने आप 70% कम हो जाएगी. बल्कि यह दवा की अलग-अलग कीमतों पर निर्भर रहेगा.

अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों को भी 9 नवंबर से नई कीमतों पर दवाएं बेचनी होंगी. उन्हें अपनी वेबसाइट पर भी नई कीमतें दिखानी होंगी. मरीज 'Pharma Sahi Daam' ऐप और NPPA की वेबसाइट पर दवाओं की नई कीमतें देख सकेंगे.
आदेश जारी होने के 7 दिनों के अंदर दवा कंपनियों को अपनी दवाओं की नई कीमतों की जानकारी NPPA को देनी होगी. इसके अलावा दवा कंपनियों को पहले की तरह प्रोडक्शन और सप्लाई जारी रखनी होगी, ताकि कीमतें कम होने के बाद भी मरीजों को दवाएं मिलने में परेशानी न हो.
कैंसर के इलाज में दवाओं पर काफी खर्च होता है. दवा बनाने वाली कंपनियों से लेकर मरीज तक दवा पहुंचने के दौरान अलग-अलग लेवल पर मुनाफा जुड़ता है. सरकार का मकसद इसी मुनाफे की सीमा तय करना है, ताकि मरीजों को दवाई कम कीमत पर मिल सकें.
फरवरी 2019 में NPPA ने कैंसर की 42 नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं पर ट्रेड मार्जिन यानी दवा की खरीद और बिक्री के बीच जुड़ने वाले मुनाफे की सीमा 30% तय करने का फैसला किया था. इसके बाद मार्च 2019 में सरकार ने जानकारी दी कि इस फैसले के तहत 390 ब्रांड की दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में 87% तक की कटौती हुई. इस कदम को कैंसर के इलाज पर होने वाले खर्च को कम करने की दिशा में एक अहम पहल माना गया था.
कैंसर की दवाओं को सस्ता करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद NPPA ने कीमतों में हुई कटौती और उससे मरीजों को मिलने वाली राहत का आकलन किया. उपलब्ध सरकारी जानकारी के मुताबिक, 526 ब्रांड की कैंसर दवाओं की कीमतों में कमी दर्ज की गई. इससे मरीजों को सालाना करीब 984 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान लगाया गया था.