पोलैंड के पीएम की भारत यात्रा और यूपी में बन रहे घातक ड्रोन: क्या बदलने वाली है देश की डिफेंस स्ट्रेटजी?
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा और उत्तर प्रदेश में घातक ड्रोन व रक्षा उपकरणों के निर्माण से क्या भारत की डिफेंस स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव आने वाला है?
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 अक्टूबर से तीन दिन की भारत यात्रा पर रहेंगे. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर आ रहे हैं और 22 अक्टूबर को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी. प्रधानमंत्री के तौर पर यह टस्क की दूसरी भारत यात्रा है. पिछली बार वे 2010 में आए थे. अगस्त 2024 में मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचे थे.
इस यात्रा में रक्षा सहयोग अहम मुद्दा रहेगा. टस्क के साथ वित्त और अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की और बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल आ रहा है. डोमान्स्की कह चुके हैं कि पोलैंड भारत को रक्षा निर्यात बढ़ाना चाहता है. करीब 100 कंपनियों के इस प्रतिनिधिमंडल में पोलैंड की रक्षा कंपनियां भी शामिल होंगी.
पोलैंड के ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम की भारी मांग
यूक्रेन युद्ध ने पोलैंड की प्राथमिकताएं बदल दी हैं. पड़ोस में जारी जंग के बीच पोलैंड अपनी जीडीपी का करीब पांच फीसदी रक्षा पर खर्च कर रहा है. उसके ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम की दुनिया भर में इतनी मांग है कि कई कंपनियां सारे ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहीं. फिर भी वारसॉ अब सिर्फ हथियार बेचने की बात नहीं करता. पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव बार्तोशेव्स्की के मुताबिक बातचीत इस पर हो रही है कि पोलैंड के रक्षा प्लेटफॉर्म भारतीय पुर्जों के साथ भारत में ही बनें.
ड्रोन पर टिकी सेना की नई रणनीति
भारतीय सेना भी तेजी से बदल रही है. ऑपरेशन सिंदूर में लोइटरिंग म्यूनिशन, यानी निशाने के ऊपर मंडराकर सटीक वार करने वाले ड्रोन, अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हैं. अब सेना 15 से 20 'शक्तिबाण' रेजिमेंट खड़ी कर रही है, जो ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन पर आधारित होंगी. इनका मकसद 50 से 500 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों को भेदना है. हर इन्फैंट्री बटालियन में अब ड्रोन प्लाटून भी है. इतनी बड़ी जरूरत पूरी करने के लिए सरकार का जोर देश में ही उत्पादन पर है. 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
यूपी के शहरों में फैला डिफेंस इंड्रस्टियल कॉरीडोर
यहीं उत्तर प्रदेश की भूमिका अहम हो जाती है. 2018 में शुरू हुआ यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर छह शहरों में फैला है: कानपुर, लखनऊ, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा. इसमें करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं. राज्य सरकार इस निवेश को एक लाख करोड़ रुपये तक ले जाना चाहती है. भारत-पोलैंड रक्षा साझेदारी की ठोस तस्वीर इसी कॉरिडोर में उभर रही है. डब्ल्यूबी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जिसे डब्ल्यूबी इंडिया के नाम से जाना जाता है, डब्ल्यूबी ग्रुप की सदस्य कंपनी है. डब्ल्यूबी ग्रुप पोलैंड की सबसे बड़ी प्राइवेटली ओन्ड रक्षा कंपनी है. डब्ल्यूबी इंडिया यहां की उत्पादन लाइन विकसित कर रही है. इस संयुक्त उपक्रम में बहुमत हिस्सेदारी भारतीय साझेदार की है.
लद्दाख में हो चुका है परीक्षण
वॉरमेट भारतीय सेना के लिए नया नाम नहीं है. सेना इसे इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत ले चुकी है, और लद्दाख के 'हाई एल्टीट्यूड' वाले इलाकों में इसका परीक्षण भी हो चुका है. करीब चार किलो वजनी यह ड्रोन 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार पकड़ सकता है और आधे घंटे तक हवा में रह सकता है. जमीन से नियंत्रित करने पर इसकी मारक दूरी 30 किलोमीटर है. टोही ड्रोन 'फ्लाईआई' के साथ यह दायरा करीब 100 किलोमीटर तक पहुंच जाता है. यानी एक ड्रोन निशाना ढूंढता है और दूसरा वार करता है. डब्ल्यूबी ग्रुप 2014 से यूक्रेन में सक्रिय है. यूरोपीय आयोग ने उसे ईयू-यूक्रेन ड्रोन अलायंस के संस्थापक सदस्यों में चुना है. 2021 में करीब दो हजार वॉरमेट सिस्टम की आपूर्ति हुई थी, जबकि अब यह आंकड़ा पांच हजार के पार है.
स्थानीय उद्योग के लिए बड़ा मौका
कंपनी का कहना है कि भारत में उसकी रणनीति भारतीयकरण और मेक इन इंडिया से जुड़ी है. पूरा सिस्टम कंपनी का अपना डिजाइन है. इसलिए जहां भारतीय पुर्जे जरूरी कसौटी पर खरे उतरें, वहां विदेशी पुर्जों की जगह उन्हें लगाया जा सकता है. डब्ल्यूबी इंडिया के सीईओ आशीष शर्मा के मुताबिक कंपनी बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही है. पुर्जों और इंजीनियरिंग प्रतिभा के लिए वह स्थानीय उद्योग और शिक्षण संस्थानों से भी जुड़ रही है. यूपी के छोटे और मझोले उद्योगों और युवा इंजीनियरों के लिए यह बड़ा मौका बन सकता है.
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डब्ल्यूबी ग्रुप के अध्यक्ष पियोत्र वोयचेखोव्स्की भारत को सिर्फ बड़ा बाजार नहीं मानते. उनके लिए भारत उत्पादन का औद्योगिक साझेदार भी है, जहां से दूसरे देशों की जरूरतें भी पूरी की जा सकती हैं. वे इसे "भारत के साथ, भारत के लिए" की सोच बताते हैं. टस्क की यात्रा से क्या निकलेगा, यह आने वाले दिन बताएंगे. लेकिन इतना साफ है कि भारत-पोलैंड रक्षा रिश्ते की नींव अब सिर्फ बैठकों में नहीं, यूपी की फैक्ट्रियों में भी रखी जा रही है.
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