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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विपक्ष और अपने विरोधियों पर अलग अंदाज में निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब भी वह कोई नया काम शुरू करते हैं, कुछ लोग 'फूफा' बनकर सवाल खड़े करने लगते हैं. लेकिन भारत ने ऐसे लोगों को अपने काम से जवाब दिया है. पीएम मोदी ने अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि इस बार 15 अगस्त को उन्होंने लाल किले से होम्योपैथी की दवा दी थी, जिसके बाद से सभी 'दिमागी नक्सल' निकलकर बाहर आ गए.
प्रधानमंत्री मोदी ने शताब्दी समारोह के दौरान श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के छात्रों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं. छात्रों से उन्होंने कहा, 'कैंपस के बाहर आपको नई दुनिया मिलेगी. दो तरह के लोग मिलेंगे. एक वो, जो पॉजिटिव तरीके से समाज के लिए काम करते हैं. दूसरी प्रजाति, जो कोई भी काम शुरू होने पर 'नाराज फूफा' बन जाते हैं.'
Delighted to join the centenary celebrations of Shri Ram College of Commerce. Over the years, this institution has given generations of students the opportunity to learn, grow and make a difference.@SRCCOfficial
https://t.co/2YyZBJuFAy— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
'नाराज फूफा' का पसंदीदा काम हर चीज का विरोध
पीएम मोदी ने कहा कि नाराज फूफा का पसंदीदा काम हर काम का विरोध करना होता है. उनका एक ही डायलॉग होता है - इसकी क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि जब यूपीआई लाया गया, दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बनाई गई, चिप बनाने की बात हुई, नई संसद बनाई गई या वीर सेना नायकों का मेमोरियल बनाया गया, हर जगह सवाल उठाने वाले लोग सामने आ गए. पीएम मोदी ने कहा कि हर बार यही पूछा गया कि इसकी क्या जरूरत है. लेकिन भारत ने ऐसे सभी 'फूफाओं' को जवाब दिया है. जो देश के लिए जरूरी है, उसे कोई रोक नहीं सकता.
Metro moments…
On the way to the SRCC programme and back. pic.twitter.com/kScEjIQibr— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
स्टैच्यू से लेकर हाई स्पीड ट्रेन तक 'फूफा' लगातार नाराज
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू बनाया जा रहा था, तब भी 'फूफा जी' ने कमर कस ली थी और पूछा था कि इसकी जरूरत क्या है. उन्होंने कहा कि जब हाई स्पीड ट्रेन पर काम शुरू किया गया तो भी यही सवाल उठा. यूपीआई लाने पर भी कहा गया कि इसकी क्या जरूरत है. नई पार्लियामेंट बिल्डिंग बनाई गई तो फिर वही सवाल सामने आया. पीएम मोदी ने कहा कि जब वीर सेना नायकों का मेमोरियल बनाया गया, तब भी 'फूफा' मैदान में आ गए और पूछने लगे कि इसकी क्या जरूरत थी. लेकिन भारत ने ऐसे सभी लोगों को जवाब दिया. उन्होंने कहा कि जो देश के लिए जरूरी है, उसे भारत को करने से कोई रोक नहीं सकता.
'दिमागी नक्सल' पर भी पीएम मोदी का तंज
पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज 2013 के मुकाबले देश आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है. लेकिन इसे देखकर कुछ लोगों की बौखलाहट बढ़ रही है. ऐसे लोगों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने लाल किले से 'होम्योपैथी का डोज' दिया था - 'दिमागी नक्सल'. उन्होंने कहा कि होम्योपैथी की गोली बीमारी को कुछ समय के लिए और उभार देती है, उसके बाद बीमारी का इलाज शुरू करती है. पीएम मोदी ने कहा कि जैसे ही उन्होंने 'दिमागी नक्सल' वाली होम्योपैथी की गोली दी, सारे 'दिमागी नक्सल' निकलकर बाहर आने लगे. उन्होंने कहा कि जो लोग 'दिमागी नक्सल' को बढ़ावा दे रहे हैं, अब जनता उनका असली रंग भी देख रही है.
'भ्रष्टाचारी बेखौफ घूमते थे, आतंकी बेलगाम थे'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में 2014 से पहले के दौर को भी याद किया. उन्होंने कहा कि उस समय 2013 में विकास फर्श पर था और महंगाई अर्श पर थी. पीएम मोदी ने कहा कि उस समय घोटाले चरम पर थे और भ्रष्टाचारी बेखौफ घूमते थे. आतंकी बेलगाम थे और पाकिस्तान बेकाबू था. उन्होंने कहा कि एक वह दिन था और एक आज का दिन है, जब आतंकवाद फैलाने वाले पस्त पड़े हैं. पाकिस्तान कोई नापाक हरकत करता है तो भारतीय सेना घर में घुसकर मारती है. उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद की कमर तोड़ दी गई है.