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क्या 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से देश में मीट के विज्ञापनों पर ताला लगने वाला है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'पेटा इंडिया' ने केंद्र सरकार से एक बड़ी अपील की है. 28 सितंबर को खबर आई है कि पेटा ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें 2 अक्टूबर से टीवी, होर्डिंग्स और इंटरनेट पर दिखने वाले मांस के सभी विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की गई है.
'पेटा इंडिया' का कहना है कि भारत हमेशा से दुनिया को शाकाहार और करुणा की सीख देता रहा है. ऐसे में बापू की अहिंसा का सम्मान करते हुए इन विज्ञापनों को तुरंत बंद किया जाना चाहिए, जिससे न सिर्फ बेजुबानों पर क्रूरता थमेगी, बल्कि पर्यावरण और इंसानी सेहत को भी बड़ा फायदा होगा. पेटा इंडिया की सीनियर मैनेजर डॉ. किरण आहूजा ने कहा कि देश में मीट के विज्ञापनों पर रोक लगनी चाहिए. भारत हमेशा से दुनिया को दयालु, सेहतमंद और शाकाहारी खान-पान की सीख देता रहा है. ऐसे में इन विज्ञापनों को बंद करना ही गांधीजी की अहिंसा की सोच को असली सम्मान देना होगा.
पेटा ने अपने लेटर में यूरोप के कई बड़े शहरों का एग्जाम्पल दिया है. संस्था ने बताया कि एम्स्टर्डम, हार्लेम, यूट्रेक्ट और निजमेगेन जैसे शहरों में पर्यावरण को बचाने के लिए मांस के विज्ञापनों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है. पेटा ने ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का भी जिक्र करते हुए याद दिलाया कि इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब दुनिया भर के दिग्गज नेताओं की मेजबानी की थी, तब उन्हें पूरी तरह शाकाहारी खाना ही परोसा गया था.
पेटा इंडिया ने अपनी जांच का हवाला देते हुए स्लॉटर हाउस और जानवरों को ढोने के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. संस्था का आरोप है कि कसाईखानों में मुर्गियों को होश में रहते हुए ही काट दिया जाता है. गाड़ियों में क्षमता से कहीं ज्यादा मवेशी और भैंसें ठूंसकर ले जाए जाते हैं, जबकि बकरियों, भेड़ों और सूअरों के साथ भी बेहद बेदर्दी से पेश आया जाता है.
पेटा ने अपने पत्र में बीमारियों के बड़े खतरे को लेकर भी आगाह किया. संस्था का कहना है कि जिस तरह से पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों और जानवरों को रखा जाता है, उससे H5N1 बर्ड फ्लू जैसी महामारियां और संक्रामक बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं. एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और खराब खान-पान से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है.
पेटा ने दुनिया भर के आंकड़ों का हवाला देते हुए एक गंभीर चेतावनी भी दी है. संस्था के मुताबिक, दुनिया की करीब 73 फीसदी एंटीमाइक्रोबियल (एंटीबायोटिक) दवाएं इंसानों को नहीं, बल्कि खाने के लिए पाले जाने वाले जानवरों को दी जा रही हैं. जानवरों में इन दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, जिसकी वजह से साल 2050 तक अकेले भारत में करीब 20 लाख लोगों की जान जा सकती है.
पेटा इंडिया ने अपने पत्र में यह भी याद दिलाया कि भारत सदियों से अहिंसा और शाकाहार की परंपरा पर चलता आया है और दुनिया में सबसे ज्यादा शाकाहारी लोग यहीं रहते हैं. इसीलिए 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से ही इस प्रतिबंध को लागू कर दिया जाए, ताकि टीवी, होर्डिंग्स और सोशल मीडिया पर दिखने वाले मांस के सभी विज्ञापनों पर पूरी तरह ताला लग सके.
इसकी सबसे बड़ी वजह हैं महात्मा गांधी. 2 अक्टूबर को बापू की जयंती है, जिन्होंने पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाया. गांधीजी हमेशा कहते थे कि अहिंसा सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि हर बेजुबान जानवर के लिए भी होनी चाहिए. पेटा का मानना है कि भारत में मीट के विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए गांधी जयंती से बेहतर कोई दिन हो ही नहीं सकता. संस्था का कहना है कि अगर सरकार 2 अक्टूबर से इन विज्ञापनों पर ताला लगाती है, तो यह बापू के अहिंसा के सपने और देश की पुरानी शाकाहारी परंपरा को सबसे बड़ा और सच्चा सम्मान होगा.
Turn conversations into action for animals! 🐾❤️
PETA India is looking for a Corporate Affairs Liaison to help engage businesses, develop creative partnerships, and influence corporate policies that contribute toward animal welfare.
Help create change for animals, apply NOW:… pic.twitter.com/Dt7Nm1HpIQ— PETA India (@PetaIndia) September 27, 2026
पेटा (PETA) जानवरों के हक के लिए आवाज उठाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी संस्था है. इसकी शुरुआत साल 1980 में हुई थी और इसका मुख्यालय अमेरिका के वर्जीनिया में है. यह संगठन दुनिया भर में बेजुबान जानवरों पर होने वाले जुल्म को रोकने के लिए काम करता है. पेटा का मानना है कि जानवर इंसानों के मतलब के लिए नहीं हैं, न उन्हें खाने के लिए, न पहनने के लिए और न ही उन पर अत्याचार करने के लिए. इंसानों की तरह उन्हें भी बिना दर्द के जीने का पूरा हक है.
पेटा इंडिया इसी संस्था की भारतीय शाखा है, जो खास तौर पर भारत में जानवरों के हक और उनकी सुरक्षा के लिए काम करती है. यह संगठन देश की अहिंसा और शाकाहारी परंपरा को बढ़ावा देता है, ताकि बेजुबानों पर होने वाले अत्याचार को रोका जा सके.
पेटा का मकसद एक ऐसी दुनिया बनाना है, जहां जानवरों पर किसी भी तरह का जुल्म न हो. यह संस्था लोगों को समझाती है कि जानवरों को खाने, उनके चमड़े पहनने या मनोरंजन के लिए उन्हें तड़पाना बंद होना चाहिए. इंसान बिना किसी बेजुबान को दर्द दिए भी एक अच्छी और बेहतर जिंदगी जी सकता है.