NTA के नए ऑफिस में 38 CISF जवान, X-Ray और DFMD से जांच… जानें पेपर लीक के बाद क्या बदला
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद NTA ने अपने गोपनीय सेक्शन की सुरक्षा CISF को सौंप दी है. मिंटो रोड स्थित नए दफ्तर में 38 जवान तैनात किए गए हैं, जहां मेटल डिटेक्टर, एक्स-रे स्कैनर और कड़ी साइबर सुरक्षा से पेपर लीक रोका जाएगा.
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद घिरी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने का बड़ा कदम उठाया है. लगातार उठते सवालों और प्रशासनिक कमियों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने एनटीए के गोपनीय सेक्शन की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को सौंप दी है.
नई दिल्ली स्थित मिंटो रोड पर बने भारत सरकार प्रेस भवन वाले नए ऑफिस में सीआईएसएफ के 38 जवान तैनात कर दिए गए हैं.
ये जवान प्रश्न पत्रों और गोपनीय दस्तावेजों वाले हिस्सों पर 24 घंटे नजर रखेंगे. हर आने-जाने वाले कर्मचारी और अधिकारी की अब मेटल डिटेक्टर (DFMD) और एक्स-रे मशीनों से कड़ी जांच होगी.
ओखला से मिंटो रोड शिफ्ट हुआ सीक्रेट काम
एनटीए ने अपने संवेदनशील और गोपनीय कामों को ओखला वाले पुराने दफ्तर से पूरी तरह हटा लिया है. मिंटो रोड स्थित नए भवन में एजेंसी को करीब 55,000 वर्ग फुट जगह मिली है.
इसमें चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल का कुछ हिस्सा शामिल है. गोपनीय इलाकों को बाकी हिस्सों से एकदम अलग कर दिया गया है. बिना इजाजत किसी भी बाहरी व्यक्ति का वहां जाना अब नामुमकिन होगा.
प्रवेश और निकास द्वारों पर सीआईएसएफ के जवान तैनात रहेंगे. सामान की चेकिंग के लिए एक्स-रे बैगेज स्कैनर और मेटल डिटेक्टर भी लगा दिए गए हैं.
सीबीआई की जांच में खुली थी सुरक्षा की पोल
एनटीए को यह कड़ा फैसला 2024 के नीट पेपर लीक मामले के बाद लेना पड़ा है. सीबीआई की चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ था कि सीक्रेट सेक्शन में सुरक्षा के बेहद घटिया इंतजाम थे.
सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की आते-जाते समय कोई तलाशी नहीं ली जाती थी. आरोप है कि आरोपी विशेषज्ञों ने रफ वर्क के लिए दिए गए सादे कागजों की छोटी-छोटी पर्चियों पर सवाल लिख लिए थे.
इतना ही नहीं, दिल्ली दफ्तर में कोई लाइव सीसीटीवी मॉनिटरिंग रूम भी नहीं था. इस बड़ी लापरवाही की वजह से आरोपियों की चालाकी किसी की पकड़ में नहीं आई.
अब साइबर सुरक्षा का भी तैयार हुआ अभेद्य किला
कागजी सुरक्षा के साथ-साथ एनटीए अब डिजिटल सिस्टम को भी मजबूत बना रहा है. परीक्षा से जुड़ी हर गतिविधि जैसे रजिस्ट्रेशन, एडमिट कार्ड, ओएमआर शीट और रिजल्ट वाले सर्वर्स की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है.
हैकिंग रोकने के लिए डेटा को एनक्रिप्ट किया जा रहा है. किसी भी साइबर हमले से तुरंत निपटने के लिए एक अलग सिस्टम तैयार हो रहा है.
एनटीए ने चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर का पद भी निकाला है. इसके अलावा सीईआरटी-इन जैसी सरकारी एजेंसियां लगातार सिस्टम की सुरक्षा की जांच कर रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट की फटकार और इसरो प्रमुख की सिफारिशें
2024 के नीट विवाद ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. इस मामले पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी एनटीए को फटकार लगाते हुए कहा था कि एजेंसी ने अपनी पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया.
मामले को सुधारने के लिए इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अगुवाई में एक हाई-लेवल कमेटी बनी थी.
इस कमेटी ने प्रश्न पत्र बनाने से लेकर नतीजे जारी करने तक के पूरे सिस्टम में बड़े बदलाव की सिफारिश की थी. इन्फोसिस के नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में भी एक टास्क फोर्स गठित की गई थी.
व्यवस्था हो गई है मजबूत
2017 में बनी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का मकसद देश में पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षाएं कराना था. लेकिन बार-बार सामने आई गड़बड़ियों ने छात्रों के भरोसे को तोड़ा है.
अब पुलिस सुरक्षा, सीआईएसएफ का पहरा, सीसीटीवी निगरानी और तगड़ी साइबर सुरक्षा को एक साथ मिलाया गया है.
एनटीए प्रशासन को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था के बाद पेपर लीक जैसी शर्मनाक घटनाएं हमेशा के लिए रुक जाएंगी. फिलहाल नए दफ्तर में हर स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.