बांग्लादेशी आतंकी संगठन JMB का पर्दाफाश: 3 राज्यों के 16 ठिकानों पर NIA की रेड, रेडिकलाइजेशन मामले में बड़ा खुलासा
जांच एजेंसी एनआईए ने भारत में कट्टरपंथी सोंच को हवा-पानी देने वालों पर शिकंजा कसते हुए एक्शन लिया है. एनआईए ने 16 ठिकानों पर रेड करके इस नेक्सस को तोड़ने के लिए अपने मजबूत इरादे जता दिए हैं.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने मंगलवार की सुबह भारत में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वालों पर शिकंजा कसा है. यह नेटवर्क फिलहाल भारत के तीन राज्यों में एक्टिव है. उनमें से एक पश्चिम बंगाल में एक्टिव बांग्लादेश के आतंकी संगठन 'जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश' (JMB) के स्लीपर सेल 'इमाम महमूदेर काफिला' (IMK) के लोगों पर शिकंजा कसने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया. ये एक्शन असम में दर्ज अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में लिया गया.
'इमाम महमूदेर काफिला' से एक्टिव लोगों की पड़ताल के सिलसिले में असम, बंगाल और केरल में कुल 16 जगहों पर रेड डाली गई. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक आईएमके , बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश' (JMB) का ही एक गुट है.
3 राज्यों में एक्शन
NIA से मिली जानकारी के मुताबिक, जिन 16 ठिकानों पर तलाशी ली गई, उनमें 10 असम में, 5 पश्चिम बंगाल में और 1 केरल में स्थित है. यह पूरी कार्रवाई उस मामले का हिस्सा है, जिसमें एजेंसी ने करीब तीन महीने पहले (जून 2026 में) गुवाहाटी की स्पेशल कोर्ट में 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. आरोपियों पर नए कानून 'भारतीय न्याय संहिता' और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की कड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.
युवाओं को भड़काने की साजिश
जांच में खुलासा हुआ है कि ये सभी आरोपी भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ा रहे थे. इनका मुख्य मकसद असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में नेटवर्क फैलाना और युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथ की तरफ धकेलना था.
एजेंसी के मुताबिक JMB के सीनियर मेंबर इमाम महमूद हबीबुल्लाह ने भारत में संगठन की जमीन मजबूत करने के लिए IMK का गठन किया था. सूत्रों के मुताबिक ये काम गुपचुप तरीके से हो रहा था. इससे जुड़े लोग इंटरनेट और गुप्त बैठकों के जरिए भारत विरोधी माहौल बना रहे थे. ये लह भड़काऊ साहित्य बांटकर और सोशल मीडिया का सहारा लेकर लोगों को बरगला रहे थे.
चार्जशीट में असम के नसीमुद्दीन और त्रिपुरा के जागीर मियां का नाम टॉप पर है. दोनों को लेकर एजेंसी का दावा है कि यही अपने-अपने राज्यों में संगठन का पूरा काम-काज संभाल रहे थे.
डिजिटल सबूत और दस्तावेज जब्त
मामले की जांच के दौरान NIA को कई विवादित दस्तावेजों समेत, मोबाइल-लैपटॉप से भी डिजिटल रिकॉर्ड के साक्ष्य मिले हैं. इन्हीं सबूतों को कड़ी दर जोड़ते हुए अब एनआईए एजेंसी आगे की कार्रवाई कर रही है.