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Nandigram Bypoll 2026: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट अपने राजनीतिक घटनाक्रम और हाई-प्रोफाइल मुकाबलों के कारण 21 सदी में देश की सबसे चर्चित सीटों में से एक रही है. ऐसे में 2026 के उपचुनाव का मुकाबला भी बहुत खास और दिलचस्प हो सकता है. विधानसभा उपचुनावों में कुछ अपवाद छोड़ दें तो अक्सर सत्ताधारी दल ही चुनाव जीतता आया है. इस नजरिए से भी नंदीग्राम का चुनावी रण हाई वोल्टेज होने के आसार हैं.
आइए जानने की कोशिश करते हैं कि यहां टीएमसी किसे उम्मीदवार बना सकती है, और सत्ताधारी बीजेपी किस चेहरे पर दांव लगाएगी.
विधानसभा की जिन 5 सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें रेजीनगर और नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की हैं. दोनों सीटों से ममता बनर्जी का खास जुड़ाव रहा है. नंदीग्राम आंदोलन ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, जिसने वामपंथियों की नींव हिला दी थी. नंदीग्राम की धरती से ताल ठोकर ममता ने बंगाल में करीब 35 सालों से लहरा रहे क्रांति के प्रतीक लाल झंडे को उखाड़ फेंका था. वहीं रेजीनगर सीट बंगाल में 'बाबरी' मस्जिद के पैरोकार और कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे हुमायूं कबीर के इस्तीफे से खाली हुई है.
इसी तरह नंदीग्राम की सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी.

क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ सकती हैं, क्योंकि वो 2026 में अपनी पार्टी में हुई टूट से आहत हैं. फिलहाल कोलकाता के सियासी गलियारों में माना जा रहा है कि वो पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक बार फिर से वापसी करना चाहती हैं. ऐसे में नंदीग्राम उपचुनाव पर न सिर्फ टीएमसी बल्कि पूरे इंडिया ब्लॉक का ध्यान शिफ्ट हो सकता है.
ऐसा इसलिए क्योंकि इस सीट का सियासी महत्व है और यहां ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच पहले भी महा मुकाबला हो चुका है. 2026 का चुनाव सुवेंदु अधिकारी से करीब 15 हजार से ज्यादा वोटों से हार चुकीं ममता फिलहाल किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं.
कुछ बांग्ला रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक टीएमसी के किसी धड़े ने अपना कैंडिडेट घोषित नहीं किया है. हालांकि टीएमसी के ममता खेमे में चर्चाओं का दौर जारी है, हालांकि रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पार्टी के बड़बोले नेता अखिल गिरि का नाम रेस में आगे है. हालांकि, आधिकारिक रूप से कोई ऐलान नहीं हुआ है. आपको बताते चलें ये वही गिरी हैं जिन्होंने 2022 में नंदीग्राम की जनसभा में राष्ट्रपति को लेकर विवादित बयान दिया था. जिसके बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी.
2024 में जेल मंत्री का पद संभालने के दौरान उन्होंने एक महिला वन अधिकारी मनीषा साहू को कहा था, 'तुम सरकारी अफसर हो. मेरे सामने सिर झुकाकर बात करो. तुम देखना एक हफ्ते में तुम्हारे साथ क्या होता है. तरीका सुधारो, नहीं तो डंडे से पीटूंगा. दोबारा इस मैटर में अपनी ना डाली तो वापस नहीं जा पाओगी. ये गुंडे रात में घर नहीं जाने देंगे.' हालांकि इस बयान के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था.
7 सितंबर को आयोग के चुनावी बिगुल बजाने से पहले तक बीजेपी ने भी अपने किसी कैंडिडेट का नाम डिक्लेयर नहीं किया है. सूत्रों का दावा है कि जिस दिन सुवेंदु अधिकारी ने ये सीट छोड़ी थी, उसी दिन बीजेपी का उम्मीदवार कौन होगा, इस पर मंथन शुरू हो गया था. लेकिन किसी भी नेता ने खुलकर ये नहीं कहा कि फला-फला नेता रेस में हैं.
बंगाल बीजेपी के नेताओं ने भी नाम लेने से परहेज करने के साथ ये कहा है कि पार्टी जिसे चुनेगी सब लोग मिलकर उसे ही चुनाव जिताएंगे. हालांकि नंदीग्राम सीट और मेदिनीपुर जिला सुवेंदु अधिकारी का पुराना मजबूत गढ़ रहा है. सुवेंदु अधिकारी के पिता सिसिर अधिकारी समेत पूरा परिवार कई दशकों से मेदिनीपुर क्षेत्र की राजनीति में बेहद प्रभावशाली रहा है, मेदिनीपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले कांथी, तमलुक और नंदीग्राम अधिकारी फैमिली की मुख्य राजनीतिक के केंद्र में रहे हैं. इसलिए यहां से सुवेंदु के किसी करीबी को ही टिकट दिए जाने की चर्चा है, जिसे उनका उत्तराधिकारी माना जा सकता है.