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मुंबई में प्रदूषण बहुत तेजी से बढ़ रहा है. शहर की खराब होती आबोहवा को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से सीधा सवाल पूछा कि जब लाखों लोग ऐसी इमरजेंसी जैसी स्थिति में सांस ले रहे हैं, तो अफसरों को चैन की नींद कैसे आ सकती है? कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई है कि चारों तरफ खुला समुद्र होने के बाद भी अगर मुंबई का आसमान साफ नहीं है, तो यह बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक है.
बार एंड बेंच के अनुसार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रदूषण से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान जस्टिस कुलकर्णी की पीठ ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया कि मंगलवार को शहर में विजिबिलिटी गिरकर 500 मीटर से भी कम रह गई थी. अदालत ने सख्त लहजे में कहा, 'यह चौंकाने वाला है. शहर के पास समुद्री हवाएं हैं, खुला आसमान और बड़ा समुद्री किनारा है, फिर भी हम इस तरह के हालात का सामना कर रहे हैं. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुंबई का आसमान साफ रहे'.
दरअसल, पिछले 1 हफ्ते में मुंबई का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 150 से 200 के बीच बना हुआ है, जो सेहत के लिए काफी खराब है. इस पर जस्टिस कुलकर्णी ने सवाल पूछा कि जब लाखों नागरिक इस आपात स्थिति से जूझ रहे हैं, तो प्रवर्तन एजेंसियां चैन से कैसे बैठ सकती हैं?
अदालत ने बीएमसी (BMC), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और पुलिस को अदालती आदेश न मानने पर कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने पाया कि धार्मिक जुलूसों में बिना किसी इजाजत और तय आवाज सीमा की परवाह किए बिना धड़ल्ले से तेज म्यूजिक सिस्टम बजाए जा रहे हैं. यही नहीं, भीड़भाड़ वाली सड़कों पर भी बिना किसी रोक-टोक के पटाखे फोड़े जा रहे हैं. इसे लेकर अदालत ने साफ कहा कि कोर्ट के पुराने आदेशों की लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, न तो लाउडस्पीकर के लिए कोई मंजूरी ले रहा है और न ही सड़कों पर खुलेआम पटाखे जलाने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई हो रही है.
अदालत ने अपने आदेश में गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि बुनियादी जरूरी कदम तक नहीं उठाए गए. कोर्ट ने बीएमसी और एमपीसीबी को खास तौर पर निशाने पर लिया, क्योंकि 15 अक्टूबर को ही सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह रोक लगाने का साफ आदेश दिया गया था. अदालत ने कहा कि इस रोक के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया, न तो अखबारों में कोई नोटिस छपवाया और न ही टीवी या सोशल मीडिया पर इसका कोई प्रचार-प्रसार किया.
दूसरी तरफ, देश की राजधानी दिल्ली में भी त्योहारों से पहले प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया है. मंगलवार शाम दशहरे पर पुतले जलने के बाद दिल्ली की हवा अचानक काफी खराब हो गई और आने वाले हफ्तों में दिवाली के आसपास इसके और ज्यादा बिगड़ने का डर है.
हम मुंबई की बात करें तो 22 अक्टूबर को मुंबई में प्रदूषण का स्तर (AQI) 165 से 171 के आसपास रहा, इसका मतलब है कि वहां की हवा सेहत के लिए ठीक नहीं है और 'मध्यम' से 'खराब' स्तर के बीच बनी हुई है. वहीं दिल्ली की बात करें तो गुरुवार को हवा काफी खराब है. सुबह करीब साढ़े दस बजे दिल्ली का AQI 299 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' स्तर के बिल्कुल करीब है. वहीं, निजी मॉनिटरिंग ऐप IQAir के अनुसार सुबह साढ़े नौ बजे यह 242 के स्तर पर था. कुल मिलाकर त्योहारों से पहले ही मुंबई और दिल्ली, दोनों बड़े शहरों की हवा बेहद नाजुक और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी है.