320 किमी/घंटा की रफ्तार में भी सुरक्षित रहेगी हर जान, ऑटो-ब्रेक का महा-प्लान! कैसे भारत की पहली बुलेट ट्रेन के आगे भूकंप भी होगा नाकाम?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम बुलेट ट्रेन (मुंबई-अहमदाबाद) प्रोजेक्ट पांच साल देरी से चल रहा है. इसकी नींव 14 सितंबर 2017 को रखी गई. 1.20 लाख करोड़ के उस प्रोजेक्ट की लागत बढ़ चुकी है. इससे मुंबई-अहमदाबाद के बीच 500 किलोमीटर की दूरी 2 घंटे में तय होगी.
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट: कभी आपने सोचा है कि भरत में जो बुलेट ट्रेन चलने वाली है. उसमें सफर के दौरान अगर अचानक भूकंप आ जाए तो क्या होगा? जिज्ञासुओं के मन में दौड़ने वाले ऐसे कुछ और सवालों की बात करें तो क्या 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन को तुरंत रोका जा सकेगा? यानी यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित ऐसे तमाम ज्वलंत सवालों का जवाब देने के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने देते हुए खास तैयारियां की हैं.
सेफ्टी फीचर की बात करें तो भारत ने जो तैयारी की है वो रामबाण नुस्खा, जापान समेत कई देशों में पहले से आजमाया जा रहा है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में भूकंप से निपटने के लिए जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित सुरक्षा व्यवस्था होगी. इसमें 28 सिस्मोमीटर भूकंप का शुरुआती संकेत देंगे. खतरा महसूस होते ही प्रभावित क्षेत्र की बिजली कटेगी और ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेक अपने आप सक्रिय होकर उसे रोक देगा.
NHSRCL मुंबई अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए तेजी से काम कर रहा है. रेल मंत्रालय ने सबसे पहले 97 किलोमीटर लंबे सूरत वापी सेक्शन पर बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है. B28 ट्रेनसेट नाम की पहली बुलेट ट्रेन को 15 अगस्त 2027 से चलाने का लक्ष्य है.
फिलहाल पूरे कॉरिडोर में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. इसमें स्टेशन बनाना, ओवरहेड बिजली के उपकरण लगाना और सुरंगों का निर्माण शामिल है. रेलवे से जुड़े दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम का काम भी आगे बढ़ रहा है. इस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा और ऑपरेशनल स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी.
बुलेट ट्रेन के सफर के दौरान आया भूकंप तो क्या होगा?
NHSRCL के मुताबिक, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में यात्रियों और रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए एक खास भूकंप डिटेक्शन सिस्टम लगाया जाएगा. हाई स्पीड रेल कॉरिडोर और महाराष्ट्र गुजरात के भूकंप संभावित इलाकों में कुल 28 सिस्मोमीटर लगाए जाएंगे.
जैसे ही बुलेट ट्रेन से संबद्ध एडवांस सिस्टम को भूकंप का पता चलेगा, प्रभावित इलाके में बिजली की सप्लाई अपने आप बंद हो जाएगी. ट्रेन, बिजली बंद होने का संकेत मिलते ही अपने इमरजेंसी ब्रेक सक्रिय कर देगी, जिससे भूकंप प्रभावित सेक्शन में चल रही ट्रेनें रुक जाएंगी.
यह सिस्टम जापान की शिंकानसेन तकनीक को आधार बनाकर विकसित किया जा रहा है. इसका मकसद भूकंप की शुरुआती चेतावनी मिलते ही तेजी से सुरक्षा उपाय शुरू करना है, ताकि भूकंप की ज्यादा ताकतवर तरंगें रेलवे के ढांचे तक पहुंचने से पहले ट्रेन को सुरक्षित तरीके से रोका जा सके.
28 सिस्मोमीटर कहां कहां लगाए जाएंगे?
कुल 28 सिस्मोमीटर में से 22 मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) लाइन के साथ ट्रैक्शन सबस्टेशन और स्विचिंग पोस्ट पर लगाए जाएंगे. महाराष्ट्र में इनमें से आठ सिस्मोमीटर मुंबई, ठाणे, विरार और बोइसर के आसपास लगाए जाएंगे. वहीं गुजरात में 14 सिस्मोमीटर वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, महेमदाबाद और अहमदाबाद के आसपास लगाए जाएंगे.
वहीं बाकी के छह सिस्मोमीटर रेलवे लाइन से दूर भूकंप संभावित इलाकों में लगाए जाएंगे. इनमें महाराष्ट्र के खेड़ा, रत्नागिरी, लातूर और पांगरी के अलावा गुजरात के अडेसर और ओल्ड भुज के इलाके को शामिल किया गया है.
रेलवे लाइन से दूर सिस्मोमीटर लगाने की वजह
रेलवे लाइन से दूर लगाए जाने वाले इन छह सिस्मोमीटर के लिए ऐसे इलाकों को चुना गया है, जो पहले से ही भूकंप आने के लिहाज से संवेदनशील है. भुज में कई साल पहले आए भूंकप ने भारत को बहुत बड़ा जख्म दिया था. उस प्राकतिक आपदा में मौत के आंकड़ों ने लोगों को हैरान कर दिया था. यानी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के आसपास बीते 100 सालों के दौरान 5.5 से अधिक तीव्रता वाले कई भूकंप आ चुके हैं.
बुलेट ट्रेन से भारत को कितने फायदे?
भारत के लिए यह माना जा रहा है कि बुलेट ट्रेन 160 साल पुरानी भारतीय रेल में नई क्रांति लाएगी. क्योंकि भारत इस काम में विकसित देशों से करीब आधा सदी पीछे है. इसलिए इस बुलेट ट्रेन से स्पीड बढ़ेगी, दूरी कम होगी. प्रोडक्टिविटी से आर्थिक विकास बढ़ेगा. यानी हाई कनेक्टिविटी और ज्यादा प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी. इसलिए भारत ने भी हाईस्पीड कनेक्टिविटी पर भारत का फोकस किया है.
500 किलोमीटर की दूरी 2 घंटे में तय की जा सकेगी.
इस समय का सदुपयोग लोग अन्य कामों में कर सकेंगे.
ट्रांसपोर्ट सिस्टम देश में कनेक्टिविटी का आधार बनाता है.
बुलेट ट्रेन के चलने से कारोबारी गतिविधियों में तेजी आएगी.
बुलेट ट्रेन के हाईस्पीड कॉरिडोर के पास शहर बसेंगे.
1964 में जापान में बुलेट ट्रेन चली तो जापान की ग्रोथ रेट में अप्रत्याशित इजाफा हुआ.
रूस, चीन में भी बुलेट ट्रेन एक आजमाया हुआ मॉडल है.