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मानसून विदा होने से पहले मंडराया संकट! 10 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचे बांध, कई राज्यों में सूखे का साया

मानसून की विदाई से पहले ही देश के बांधों में पानी का स्तर 10 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. दक्षिण भारत से लेकर गुजरात और पूर्वोत्तर में कई जलाशयों में पानी का स्तर काफी कम है. इससे आने वाले दिनों में खेती और पीने के पानी पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.

Written By Udbhav Tripathi
Published: Sep 30, 2026, 01:10 PM IST | Updated: Sep 30, 2026, 01:20 PM IST
Image Credit: 10 साल का रिकॉर्ड टूटा!
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देशभर में मानसून अब अपने आखिरी दौर में है. अभी देश से मानसून विदा नहीं हुआ है लेकिन एक बड़ी चिंता सताने लगी है. जिस बारिश के पानी से खेतों को हरा-भरा होना था और बांधों को लबालब होना था, वो इस बार कई इलाकों में काफी साबित नहीं हुई है. स्थिति यह है कि देश के बड़े जलाशयों में पानी का स्तर पिछले 10 साल के सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है. दक्षिण भारत से लेकर गुजरात और पूर्वोत्तर तक, कई राज्यों में बांध तेजी से सूखने लगे हैं. अगर आने वाले दिनों में संभलकर पानी का इस्तेमाल नहीं किया गया, तो खेती-किसानी से लेकर पीने के पानी तक के लिए भयंकर संकट खड़ा हो सकता है.

केंद्रीय जल आयोग यानी CWC के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के 178 बड़े जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का लगभग 70 फीसदी पानी ही बचा है. 10 साल के औसत की बात करें तो यह आंकड़ा 76.62 फीसदी है. पिछले साल इसी समय इन जलाशयों में 79 फीसदी पानी था. CWC की 24 सितंबर की रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में सूखे की घोषणा हो चुकी है. ऐसे में आने वाले महीनों में खेती, पीने के पानी और बिजली उत्पादन को लेकर चिंता सामने आ सकती है.

दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा पानी की कमी

पानी की सबसे ज्यादा कमी दक्षिण भारत में दिखाई दे रही है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु को मिलाकर इस क्षेत्र के जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का सिर्फ 50 फीसदी पानी बचा है. दक्षिण भारत के जलाशयों में फिलहाल 27.926 अरब घन मीटर पानी है. पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 87.25 फीसदी था. यानी एक साल में यहां जल भंडार में काफी बड़ी कमी देखने को मिली है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के नए डेटा के अनुसार 28 सितंबर तक दक्षिण भारत में सामान्य से 23 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. मानसून की विदाई लगभग आने के साथ अब बारिश से जलाशयों को ज्यादा भरने का समय भी तेजी से कम हो रहा है.

CWC की रिपोर्ट में दक्षिण, पूर्व और उत्तर भारत के 92 जलाशयों को लेकर भी पानी की उपलब्धता में अंतर की तस्वीर सामने आई है. कुछ इलाकों में बारिश हुई है, लेकिन कई जगहों पर अब भी पानी की कमी बनी हुई है.

गुजरात के कई बांध आधे से भी कम भरे

गुजरात में भी कई बांधों में पानी की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है. राज्य के स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर के आंकड़ों के अनुसार गुजरात के 206 बांधों में से 109 बांध ऐसे हैं, जिनमें उनकी कुल क्षमता का 50 फीसदी से भी कम पानी है.

इनमें 73 बांध ऐसे हैं जो 25 फीसदी से भी कम भरे हैं. वहीं 36 बांधों में पानी 25 से 50 फीसदी के बीच है. इसके साथ ही 28 बांध 50 से 70 फीसदी तक भरे हैं, जबकि 32 बांध पूरी तरह भर चुके हैं. गुजरात के सभी जलाशयों में कुल मिलाकर 4,00,946 मिलियन क्यूबिक फीट पानी है. यह उनकी कुल क्षमता का 71.87 फीसदी है.

लेकिन राहत की बात यह है कि गुजरात का सरदार सरोवर बांध फिलहाल अच्छी स्थिति में है. इसमें 3,32,033 मिलियन क्यूबिक फीट पानी मौजूद है, जो इसकी कुल क्षमता का 99.39 फीसदी है. सरदार सरोवर परियोजना गुजरात में करीब 18.5 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में करीब 2.4 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई में मदद करती है. इसके साथ ही लगभग 3 करोड़ लोगों को पीने के पानी की सप्लाई भी इससे जुड़ी है.

पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की कमी

पूर्वी भारत के जलाशयों में फिलहाल 16.157 अरब घन मीटर पानी है. यह इन जलाशयों की कुल क्षमता का करीब 73 फीसदी है.

ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में अब भी सामान्य से करीब 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है.

(ये भी पढ़ेंः  आसमान से गायब हुए काले बादल, क्या खत्म होने वाला है मानसून? सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला राज)

मानसून का मौसम 30 सितंबर के आसपास खत्म होने वाला है. ऐसे में जलाशयों में सामान्य से कम पानी रहना आने वाले सूखे महीनों के लिए चिंता की बात है. खासकर उन राज्यों में परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है, जहां पहले ही बारिश कम हुई है. मानसून भारत की सालाना बारिश का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा लेकर आता है. यही बारिश खेती, पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए जरूरी जलाशयों और दूसरे जल स्रोतों को भरने में बड़ी भूमिका निभाती है. अब मानसून की विदाई के साथ अगले कुछ महीनों में इन जलाशयों में पानी की उपलब्धता पर काफी कुछ निर्भर करेगा.

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उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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