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शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने फ्लाईदुबई के नायक पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को अशोक चक्र देने की मांग कर दी है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्मित मच्छार को अशोक चक्र देने का विचार करने की मांग की है. देवड़ा ने कहा कि दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में गंभीर खतरे के बीच मच्छार ने जिस साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, उससे विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बच सकी.
मुंबई में जन्मे पायलट स्मित मच्छार फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में उस समय गंभीर रूप से घायल हो गए, जब उनके को-पायलट ने उन पर हमला कर विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की. घायल होने के बावजूद मच्छार ने विमान और उसमें सवार यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाले रखी. इस फ्लाइट में कुल 174 यात्री थे, जिनमें 27 बच्चे शामिल थे. घटना के दौरान विमान से आपातकालीन संकेत भेजे गए और उसने तेजी से ऊंचाई खोई. इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया.
Shiv Sena MP Milind Deora writes to PM Modi requesting that Flydubai Captain Smit Machchhar be considered for the Ashok Chakra pic.twitter.com/M1fTcmjIZV
— ANI (@ANI) October 2, 2026
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने कैप्टन स्मित के असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिए जाने की सिफारिश की है. फेडरेशन ने प्रधानमंत्री कार्यालय से उनके कार्य पर विचार करने और उन्हें उपयुक्त राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार या नागरिक सम्मान देने का अनुरोध किया है. फेडरेशन ने कहा है कि कैप्टन स्मित के मामले में संबंधित अधिकारियों को घटना की परिस्थितियों की जांच करनी चाहिए. इसके साथ ही ऑपरेशनल और मेडिकल रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि तथ्यों के आधार पर उचित सम्मान पर फैसला लिया जा सके.
फेडरेशन के मुताबिक, कैप्टन स्मित ने गंभीर खतरे और चोट के बावजूद उन लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी, जिनकी जिम्मेदारी उनके ऊपर थी. संगठन ने उनके इस रवैये को एक पेशेवर पायलट के कर्तव्य, नेतृत्व और मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण बताया है. फेडरेशन का कहना है कि ऐसे साहसिक कार्य को राष्ट्रीय सम्मान मिलने से विमानन क्षेत्र में यह संदेश जाएगा कि भारत साहस, पेशेवर जिम्मेदारी, नेतृत्व और मानव जीवन की सुरक्षा को महत्व देता है. फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने प्रधानमंत्री से कैप्टन स्मित के मामले पर उचित स्तर पर विचार करने और उनके असाधारण साहस को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने का आग्रह किया है. पत्र के अंत में फेडरेशन के अध्यक्ष कैप्टन सी. एस. रंधावा ने संगठन की ओर से यह सिफारिश प्रधानमंत्री के समक्ष रखी है.
घटना से जुड़े विवरण के मुताबिक, कॉकपिट में हमले के बाद एक इजरायली यात्री और चालक दल के एक सदस्य ने वहां पहुंचकर सह-पायलट को काबू करने में मदद की. इस घटना की जांच संयुक्त अरब अमीरात में चल रही है. कथित हमले के पीछे की वजह अभी जांच के दायरे में है.
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में देवड़ा ने कहा कि मच्छार का साहस उनकी पेशेवर जिम्मेदारी से कहीं आगे था. उनके मुताबिक, बेहद मुश्किल हालात में पायलट ने साहस, निस्वार्थ भावना और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई. देवड़ा ने कहा कि अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है. यह पुरस्कार दुश्मन के सामने युद्ध की स्थिति के अलावा असाधारण साहस, वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है. उन्होंने सरकार से मच्छार के नाम पर इस सम्मान के लिए विचार करने का आग्रह किया.
इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉल के जरिए मच्छार से बात की और उनके साहस, सूझबूझ और मुश्किल समय में संयम की तारीफ की. प्रधानमंत्री ने कहा कि यात्रियों की जान बचाने के उनके प्रयास पर देश को गर्व है. बातचीत के दौरान मच्छार ने बताया कि मुश्किल समय में वह हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और विमान में तनावपूर्ण हालात के दौरान भी उन्होंने ऐसा किया था. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सबसे बड़ा आदर्श भी बताया.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी मच्छार के साहस की सराहना की. उन्होंने कहा कि पायलट ने ऐसी घटना को रोकने में मदद की, जो उनके मुताबिक 9/11 जैसी त्रासदी में बदल सकती थी. देवड़ा ने अपने पत्र में कहा कि मच्छार को औपचारिक रूप से सम्मानित करने से यह संदेश जाएगा कि साहस और बलिदान केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं हैं. मुश्किल परिस्थितियों में अपने कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.