महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की कुल 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है. यानी महाराष्ट्र के करीब 74 फीसद तालुके इस समय सूखे की चपेट में हैं. ऐलान के साथ ही सरकार ने इन इलाकों में 'सूखा प्रबंधन ढांचे' के तहत ‘Trigger-1’ एक्टिव कर दिया है. ट्रिगर -1 तब लागू किया जाता है, जब जब किसी क्षेत्र में 25 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी हो और करीब 21 दिनों तक लगातार सूखा या बारिश का लंबा अंतराल बना रहे. इस ऐलान के साथ ही किसानों को कछ राहतें भी देना का ऐलान किया गया है.

आसान भाषा में समझने के लिए ट्रिगर-1 को सूखे की स्थिति का पहला अलर्ट समझ सकते हैं. जब किसी इलाके में तय मानकों के तहत बारिश नहीं होती और कई दिनों तक सूखे का सामना करना पड़ता है, तो सरकार की तरफ से ट्रिगर-1 लागू कर दिया जाता है. जिसके बाद सरकार तुरंत उस इलाके की स्थिति पर कंट्रोल पाने की कोशिशों में लग जाती है. इस दौरान प्रशासन यह पता लगाने की कोशिशों जुट जाता है कि खेती, पानी और पशुओं पर कितना असर पड़ा है और लोगों को किस तरह की मदद की जरूरत है.

यह पहली बार नहीं है, जब राज्य के अंदर सूखा घोषित किया गया हो. इससे पहले अक्तूबर 2023 में भी सूखे का ऐलान किया गया था, हालांकि उस समय सिर्फ 40 तालुकों के लिए सूखे का ऐलान किया गया था. इनमें 24 तालुकों में गंभीर सूखा और 16 में मध्यम सूखा घोषित किया गया था.
2023 से पहले 2018 में भी कुल 358 तालुकों में से 151 में सूखा घोषित किया गया था. इनमें 112 तालुकों को गंभीर सूखा और 39 तालुकों को मध्यम सूखा प्रभावित माना गया था. ये तालुके 26 जिलों में थे.
महाराष्ट्र में इस साल मॉनसून ने जबरदस्त खेल बिगाड़ा है. महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 18 सितंबर तक महाराष्ट्र में 755.9mm बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 932.3mm होती है. यानी राज्य में कुल करीब 18.8% बारिश की कमी रही. इसके कई इलाकों में बारिशों के बीच का अंतराल भी इस स्थिति का जिम्मेदार है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि राज्य के कई हिस्सों में करीब 40 दिनों तक कुछ खास बारिश नहीं हुई थी. महाराष्ट्र के 11 जिलों में 30 दिनों तक बारिश नहीं हुई. इस साल कम बारिश होने के पीछे El Nino को बारिश की कमी के प्रमुख मौसम संबंधी कारकों में से एक माना जा रहा है.