'पूरा मुंब्रा हरा करेंगे' कहने वाली AIMIM पार्षद सहर के पिता शिंदे सेना में शामिल, मिली बड़ी जिम्मेदारी
ठाणे नगर निगम चुनाव जीतने के बाद AIMIM पार्षद सहर शेख ने दावा किया था कि आने वाले दिनों में वे पूरे मुंब्रा को हरा कर देंगी. उनके इस बयान पर खूब बवाल मचा था और चौतरफा आलोचना हुई थी. अब उनके पिता को शिंदे सेना ने बड़ा पद सौंप दिया है, जिसके बाद सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं.
'आने वाले वक्त में पूरे मुंब्रा को हरा कर देंगे' वाले बयान को लेकर सुर्खियों में आईं AIMIM की पार्षद सहर शेख एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार खबर उनके पिता यूनुस शेख को लेकर है, जो अब एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं. उन्हें कलवा-मुंब्रा केबल सेना अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. यूनुस शेख की एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें शिंदे गुट के नेता उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपते नजर आ रहे हैं. हालांकि, यूनुस शेख ने पार्टी में शामिल होने की बात से साफ इनकार किया है. उनका कहना है कि वे सालों से केबल और इंटरनेट के काम से जुड़े हैं और इसी वजह से उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.
शिवसेना में शामिल होने की खबरों को यूनुस शेख ने सफाई दी. उनका कहना है, वो पिछले 40 साल से केबल ऑपरेटर का काम कर रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि 'अखिल भारतीय केबल सेना' नाम का संगठन केबल ऑपरेटरों के हक के लिए काम करता है और इसी संगठन ने उन्हें कलवा-मुंब्रा इलाके का अध्यक्ष बनाया है. उन्होंने ये भी कहा, एकनाथ शिंदे के कामकाज से प्रभावित होकर हर तरफ से नेता शिवसेना में आ रहे हैं, ऐसे में पार्टी को मजबूत करने के लिए अकेले उनकी कोई खास जरूरत नहीं है.
मुंब्रा के वार्ड नंबर 30 से बेटी चुनी गई हैं पार्षद
ये वही यूनुस शेख हैं, जो कई साल तक एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड के साथ काम कर चुके हैं, हालांकि पिछले नगर निगम चुनाव में पार्टी ने उनकी बेटी सहर शेख को टिकट नहीं दिया था, इससे नाराज होकर उन्होंने सहर को AIMIM के टिकट पर मैदान में उतारा और वो मुंब्रा के वार्ड नंबर 30 से चुनाव जीत गईं. जीत के बाद सहर ने मुंब्रा में हुई एक सभा में आव्हाड पर जमकर निशाना साधा था.
दरअसल, जिस सीट से सहर जीती थीं, वहां शरद पवार की एनसीपी को हार मिली थी. इसी जीत के जोश में सहर ने 'कैसा हराया...' कहकर आव्हाड पर तंज कसा था. इसके बाद उनका 'आने वाले वक्त में पूरे मुंब्रा को हरा कर देंगे' वाला बयान भी काफी सुर्खियों में रहा था, जिसकी चौतरफा आलोचना हुई थी.
क्या था सहर शेख का विवादित बयान?
सहर शेख ने सभा को संबोधित करते हुए कहा था, 'हमारे विरोधियों को लगा था कि एआईएमआईएम का सफाया हो जाएगा, लेकिन हमने योजनाबद्ध तरीके से चुनाव लड़ा और फतह हासिल की.' उन्होंने अपनी जीत की तुलना एक शेर के बच्चे से करते हुए कहा कि उन्हें हराने के लिए ‘गिद्धों की पूरी सेना’ उतार दी गई थी, लेकिन जनता ने धनबल और साजिशों को नकार कर पतंग पर भरोसा जताया. उन्होंने आगे कहा था, 'अगले 5 साल बाद मुंब्रा में हर उम्मीदवार एआईएमआईएम का होगा. मुंब्रा को पूरी तरह से इस तरह हरे रंग में रंग दिया जाना चाहिए.'
सफाई के बाद मांगी थी माफी
जब उनके इस बयान को विपक्षी दलों ने सांप्रदायिक करार दिया तो खूब बवाल मचा था, जिसके बाद सहर शेख ने सफाई दी थी. उन्होंने कहा था, उनके शब्दों को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और राजनीतिक विरोधियों ने इसे धार्मिक रंग देने की कोशिश की. उनका कहना था, 'हम हरे रंग को बढ़ावा दे रहे हैं, क्योंकि मेरी पार्टी का झंडा हरे रंग का है. अगर मेरी पार्टी का झंडा केसरिया या नारंगी होता, तो मैं उसी रंग की बात करती. यह पूरी तरह पार्टी स्तर की राजनीति थी, लेकिन विपक्ष ने इसे सांप्रदायिक राजनीति में बदल दिया.'
इस पूरे मामले में सहर शेख ने बाद में माफी भी मांगी थी. उन्होंने 23 जनवरी को स्पष्ट किया था कि 'उनकी टिप्पणी पार्टी के झंडे और चिह्न के संदर्भ में थी, न कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने या सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के इरादे से, उनका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था. उन्होंने कहा कि वे तिरंगे के लिए जीती और मरती हैं. हालांकि, अगर उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से और लिखित रूप में माफी मांगी है.
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