पत्नी ने कहा- कुर्ता-पायजामा पहनकर आए तो शादी नहीं करूंगी! टेनिस कोर्ट के एक फैसले ने भी बदल दी आडवाणी की जिंदगी
लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर जानिए कैसे और क्यों दो किस्से, शादी में सूट पहनने की वजह और 14 साल की उम्र में RSS से जुड़ने की कहानी, जिसने उनका राजनीतिक सफर आकार दिया.
भारतीय जनता पार्टी रविवार को अपने मुख्यालय में सीनियर नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का 99वां जन्मदिन मनाएगी. 8 नवंबर 1927 को जन्मे आडवाणी अब अपने 100वें वर्ष में प्रवेश करेंगे. इस मौके पर उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए हवन और प्रार्थना भी की जाएगी. सूत्रों के हवाले से चल रही खबरों के मुताबिक हवन और पूजा के बाद, आडवाणी के जीवन और राजनीतिक सफर पर एक विशेष प्रस्तुति दी जाएगी. प्रोग्राम के आखिर में प्रसाद भी बांटा जाएगा.
आडवाणी जी के जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनके कुछ दिलचस्प किस्से बताने जा रहे हैं. एक किस्सा तो कुछ इस तरह है कि उनकी पत्नी ने शादी से पहले ही एक संदेश भिजवा दिया था कि अगर लाल कृष्ण आडवाणी शादी में धोती-कुर्ता पहनकर आएंगे, तो वो उनसे शादी नहीं करेंगी. यह किस्सा सीनियर जर्नलिस्ट भास्कर रॉय ने अपनी किताब 'Fifty Year Road' में बयान किया है.
शादी में क्या पहनकर गए थे आडवाणी
पत्रकार भास्कर रॉय ने एलके आडवाणी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प निजी किस्सा साझा किया है. उन्होंने बताया कि आडवाणी की शादी मुंबई में होनी थी. उस समय वह आरएसएस के प्रचारक थे और अपनी आदत के मुताबिक शादी की रस्मों में भी धोती-कुर्ता पहनकर जाने का मन बना चुके थे, लेकिन उनकी होने वाली पत्नी कमला को यह बात पसंद नहीं आई. उन्होंने संदेश भिजवा दिया कि अगर आडवाणी धोती-कुर्ते में शादी करने आए तो वह उनसे शादी नहीं करेंगी. इस पर आडवाणी ने आखिरकार अपना लिबास बदला और शादी में सूट पहनकर पहुंचे. कई साल बाद भास्कर रॉय से बातचीत के दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए यह किस्सा सुनाया.
टेनिस खेलते-खेलते जिंदगी बदल गया एक दोस्त
इसके अलावा एक और किस्सा यह भी है कि जब वो सिर्फ 14 वर्ष के थे और सिंध (अब पाकिस्तान) में रहते थे. इन्हीं दिनों में एक दिन वह अपने दोस्त मुर्ली मुखी के साथ टेनिस खेल रहे थे. खेल के बीच में ही दोस्त ने कहा कि वह जा रहा है. आडवाणी ने हैरानी से पूछा कि मैच पूरा किए बिना कैसे जा सकते हो?दोस्त ने जवाब दिया कि वह RSS की शाखा में जा रहा है और वहां देर से पहुंचना ठीक नहीं होगा. दोस्त की समय की पाबंदी से प्रभावित होकर आडवाणी ने भी RSS के बारे में जानना शुरू किया. कुछ समय बाद वह खुद संगठन से जुड़ गए. आडवाणी ने इसे अपनी जिंदगी का निर्णायक मोड़ बताया था. यह किस्सा उन्होंने खुद अपने ब्लॉग में बताया था.