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कल दीपावली है. दीपावली से पहले की हवा में एक शोर गूंजने लगा है. यह शोर कैमरा-प्रेमी पर्यावरण प्रहरी क्लब का है. सनातन के ज्योति पर्व को विलेन बनाने के लिए इस क्लब ने नैरेटिव गढ़ना शुरू कर दिया है. कहा जा रहा है कि दीपावली पर पटाखे फोड़ने से दिल्ली की हवा और जहरीली होगी.
दिल्ली की हवा खराब है, यह सच है. इस पर कोई बहस नहीं है. बहस इस मुद्दे पर है कि दिल्ली में और देश के दूसरे शहरों में वायु प्रदूषण की वजह क्या है. हर घटना को, हर आपदा को एक खास नज़रिए से परिभाषित करने वाले ये शोर मचाने लगे कि प्रकाश पर्व पर पटाखों से दिल्ली की हवा और खराब हो जाती है. मतलब वायु प्रदूषण के दूसरे वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी कर सिर्फ़ और सिर्फ़ सनातन पर्व को कलंकित करने की साज़िश शुरू हो गई है. इसलिए आज हम दीपावली को बदनाम करने वाली मानसिकता की वैचारिक मरम्मत करेंगे.
#DNAमित्रों | पटाखे कल फूटेंगे.. 'प्रदूषण बम' पहले फूट गया,सिस्टम नाकाम.. दिवाली 'मुफ्त में बदनाम'! #DNA #DNAWithRahulSinha #Diwali #Crackers #Pollution #AQI @rahulsinhatv https://t.co/lPJ66WVLMY
— Zee News (@ZeeNews) November 7, 2026
चीन के महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस का विचार है कि अंधेरे को कोसने से बेहतर है कि एक छोटा सा दीया जलाया जाए. समस्याओं का रोना रोने से अच्छा है कि समाधान की दिशा में एक कदम बढ़ाया जाए.
लेकिन कैमरा-प्रेमी पर्यावरण प्रहरी क्लब ज़मीन पर वायु प्रदूषण रोकने के लिए कुछ कर्म करने के बजाय दीपावली को लेकर शाब्दिक प्रदूषण फैला रहा है. इन्होंने दिवाली से पहले ही शाब्दिक प्रदूषण का बम फोड़ दिया है. 'दीपावली के पटाखों से दिल्ली की हवा ज़हरीली होती है'... समाज में शब्दों का यह ज़हर घोलने वालों को आज सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण पर हुई सुनवाई के कुछ पॉइंट समझने चाहिए.
सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि...
समझिए, देश की सबसे बड़ी अदालत कह रही है कि दिल्ली में ज़हरीली हवा के लिए गाड़ियों का धुआं मेन विलेन है. दूसरे भी कारण हैं. लेकिन पर्यावरण पर जो मौसमी रुदाली गैंग है, उसे यह नहीं दिखता है. यह गैंग अभी से दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर दुबला हुआ जा रहा है.
कल धनतेरस का त्योहार था. आज छोटी दीपावली है. यानी पिछले 48 घंटे में दिल्ली में पटाखे नहीं फोड़े गए हैं. ऐसे में जो कथित पर्यावरण प्रहरी क्लब है, उसके तर्क के मुताबिक आज दिल्ली की हवा साफ़ होनी चाहिए. लेकिन हाल क्या है...
दिल्ली में कल औसत AQI 382 को पार कर गया. इसलिए ग्रैप-3 (GRAP-3) की पाबंदियां लगाई गईं. आज दिल्ली का औसत AQI 400 के पार चला गया है.
यह औसत AQI लेवल है. कई इलाकों में तो इंडेक्स 450 के भी पार चला गया है. ज़मीन पर हालात क्या हैं, इसे समझने के लिए आपको हमारी ग्राउंड रिपोर्ट देखनी चाहिए. हमारे संवाददाता राहुल मिश्रा और शुभांग ठाकुर आज सुबह दिल्ली के कई इलाकों में गए. इनकी रिपोर्ट बहुत ध्यान से देखिए.
जानते हैं, आज दिल्ली की हवा में जितना प्रदूषण है, वह कितना हानिकारक है? आज दिल्ली में रहने वाले हर आदमी को प्रदूषित हवा उतना नुकसान पहुंचा रही है, जितना 35 सिगरेट पीने से होता है.
अब सोचिए... ना बम फोड़े गए, ना किसी बच्चे ने फुलझड़ी जलाई, ना अनार फोड़ा और ना चकरी चलाई गई. यानी पटाखे तो फोड़े ही नहीं गए, फिर दिल्ली की हवा इतनी प्रदूषित क्यों है? इस सवाल का जवाब पाखंडी पर्यावरणवादी नहीं देंगे. वो सिर्फ़ यह नैरेटिव उछालेंगे कि भाई पटाखे फोड़ने से दिल्ली की हवा प्रदूषित होती है. जानते हैं, यह किसी भी बड़ी समस्या के एक हिस्से को उठाकर उसकी मन मुताबिक व्याख्या करने जैसा है. दीपावली को विलेन बनाने के लिए पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण को लेकर जो लोग ध्वनि प्रदूषण करते हैं, उन्हें आज एक आंकड़ा बहुत ध्यान से सुनना और समझना चाहिए.
सबसे पहले आप प्रदूषित हवा की परिभाषा समझिए.
एयर क्वालिटी इंडेक्स जब 100 के आसपास होता है, तो उसे संतोषजनक माना जाता है. AQI 201 से ज़्यादा होने पर उसे खराब माना जाता है. जैसे-जैसे प्रदूषण का मीटर ऊपर जाता है, हवा सेहत के लिए और खतरनाक होती जाती है.
समस्या को संपूर्णता से समझने के लिए पिछले 5 साल के आंकड़ों को देखते हैं...
यह महत्वपूर्ण तथ्य है, क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में वायु प्रदूषण कोई मौसमी आपदा नहीं है. ऐसा नहीं है कि सर्दी के मौसम में हवा खराब होगी और गर्मी के मौसम में सब कुछ ठीक होगा. वायु प्रदूषण दिल्ली में एक स्थायी और गंभीर समस्या है. दीपावली को बदनाम करने के लिए मौसमी रुदाली गैंग जो नैरेटिव चला रहा है, उसका पाखंड इन आंकड़ों से साफ़-साफ़ समझ आता है. अगर सचमुच ये लोग दिल्ली की आबो-हवा को लेकर फ़िक्रमंद होते, तो पूरी तस्वीर समझते और समझाते.
बताते कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए पटाखे नहीं, कुछ दूसरे तत्व ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं. पूरी तस्वीर दिखाते, लेकिन ये नहीं दिखाएंगे. इसलिए आज हम दिल्ली में प्रदूषण के लिए कौन से तत्व ज़िम्मेदार हैं, इसकी एक छोटी सी जानकारी आपके साथ शेयर करते हैं. सर्दियों के मौसम में दिल्ली के वायु प्रदूषण में:
अब समझिए कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की कथित चिंता करने वाले कितना झूठ बोलते हैं. कभी किसी ने आपको बताया कि डस्ट और गाड़ियों का धुआं दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा ज़िम्मेदार है? नहीं बताया होगा. क्यों? क्योंकि अगर ये सच को स्वीकार कर लेंगे, तो उनका दीपावली विरोधी नैरेटिव खंड-खंड हो जाएगा. इनका सनातन विरोधी एजेंडा फेल हो जाता. इसलिए कैमरा-प्रेमी पर्यावरण प्रहरी क्लब सिर्फ़ और सिर्फ़ दीपावली और पटाखों की बात करता है.
पटाखे फोड़ने से दिल्ली की हवा थोड़ी और प्रदूषित हो गई, यह सच है. लेकिन समझना यह भी चाहिए कि हवा पहले से ही प्रदूषित थी. ऐसा नहीं था कि दीपावली से पहले AQI 150 था और पटाखे फोड़ने के बाद AQI 350 हो गया. ऐसा बिल्कुल नहीं है. हवा पहले से खराब थी, दीपावली के अगले दिन थोड़ी और प्रदूषित हो गई. इसलिए जो लोग यह शोर मचाते हैं कि पटाखों से दिल्ली की हवा खराब होती है, वो सिर्फ़ दीपावली के पवित्र त्योहार को प्रदूषण के दाग से कलंकित करने की साज़िश करते हैं. ये प्रदूषण के नाम पर दीपावली को बदनाम करते हैं और सच के न्यूनतम हिस्से के साथ अपने प्रोपेगेंडा का विस्तार करते हैं.
चरक संहिता में महर्षि चरक ने लिखा है कि वायु ही प्राण है और जल ही जीवन है. जब ये दोनों दूषित हो जाते हैं, तो समस्त सृष्टि रोगों और विनाश की ओर बढ़ने लगती है.
महर्षि चरक ने जो बात सदियों पहले कही थी, आज वह शब्दशः सच साबित हो रही है. यह जो वायु प्रदूषण से चिंतित घड़ियाली हरित सेना है ना, उसे आज अपनी चिंता के वृत्त का विस्तार करना चाहिए. क्यों? क्योंकि सिर्फ़ दिल्ली में वायु प्रदूषण का शोर मचाने वालों को आज दिल्ली के साथ देश के दूसरे शहरों का हाल भी देखना चाहिए. वायु प्रदूषण सिर्फ़ दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की समस्या है, ऐसा नहीं है. छोटे शहरों में भी प्रदूषित हवा बड़ी आपदा बन गई है. यह समस्या कितनी बड़ी है, इसे समझने के लिए सबसे पहले आप हमारी यह वीडियो रिपोर्ट देखिए.
वायु प्रदूषण की अखिल भारतीय पड़ताल में शहर-शहर हमारे संवाददाता ज़मीन पर उतरे, AQI की जांच की और जाना कि वायु प्रदूषण से निपटने का कोई भी इंतज़ाम है या नहीं.
समझिए, वायु प्रदूषण के लिए दिवाली को विलेन बनाना समस्या का समाधान नहीं है. यह सिर्फ़ सिलेक्टिव सोच और प्रोपेगेंडा है. प्रदूषण अब सिर्फ़ महानगर ही नहीं, टियर-टू, टियर-थ्री और गांव तक की समस्या है. और प्रदूषण सिर्फ़ हमारी शारीरिक सेहत के लिए हानिकारक नहीं है, यह देश की आर्थिक सेहत के लिए भी हानिकारक है. आप एक आंकड़े से समझिए.
फिक्की और अर्न्स्ट एंड यंग की रिपोर्ट के मुताबिक....
अगर सचमुच प्रदूषण को लेकर चिंता है, भारतवासियों की सेहत की फ़िक्र है, तो अपनी सोच को बड़ा बनाना चाहिए. सिर्फ़ पटाखों को प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार ठहराना और दीपावली को विलेन बनाना छोटी सोच और सस्ती लोकप्रियता पाने का सबूत है.