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DNA: दिवाली को बदनाम करना बंद करें! पटाखे नहीं, ये हैं दिल्ली की जहरीली हवा के असली विलेन

दीपावली से ठीक पहले दिल्ली की हवा एक बार फिर बहस के केंद्र में है, लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रदूषण का असली गुनहगार सिर्फ़ पटाखे हैं? आइए आज के DNA में जानते हैं दिल्ली की ज़हरीली हवा के असली विलेन के बारे में...

DNA: दिवाली को बदनाम करना बंद करें! पटाखे नहीं, ये हैं दिल्ली की जहरीली हवा के असली विलेन
Image Credit: Delhi Air Pollution

कल दीपावली है. दीपावली से पहले की हवा में एक शोर गूंजने लगा है. यह शोर कैमरा-प्रेमी पर्यावरण प्रहरी क्लब का है. सनातन के ज्योति पर्व को विलेन बनाने के लिए इस क्लब ने नैरेटिव गढ़ना शुरू कर दिया है. कहा जा रहा है कि दीपावली पर पटाखे फोड़ने से दिल्ली की हवा और जहरीली होगी.

दिल्ली की हवा खराब है, यह सच है. इस पर कोई बहस नहीं है. बहस इस मुद्दे पर है कि दिल्ली में और देश के दूसरे शहरों में वायु प्रदूषण की वजह क्या है. हर घटना को, हर आपदा को एक खास नज़रिए से परिभाषित करने वाले ये शोर मचाने लगे कि प्रकाश पर्व पर पटाखों से दिल्ली की हवा और खराब हो जाती है. मतलब वायु प्रदूषण के दूसरे वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी कर सिर्फ़ और सिर्फ़ सनातन पर्व को कलंकित करने की साज़िश शुरू हो गई है. इसलिए आज हम दीपावली को बदनाम करने वाली मानसिकता की वैचारिक मरम्मत करेंगे.

चीन के महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस का विचार है कि अंधेरे को कोसने से बेहतर है कि एक छोटा सा दीया जलाया जाए. समस्याओं का रोना रोने से अच्छा है कि समाधान की दिशा में एक कदम बढ़ाया जाए.

लेकिन कैमरा-प्रेमी पर्यावरण प्रहरी क्लब ज़मीन पर वायु प्रदूषण रोकने के लिए कुछ कर्म करने के बजाय दीपावली को लेकर शाब्दिक प्रदूषण फैला रहा है. इन्होंने दिवाली से पहले ही शाब्दिक प्रदूषण का बम फोड़ दिया है. 'दीपावली के पटाखों से दिल्ली की हवा ज़हरीली होती है'... समाज में शब्दों का यह ज़हर घोलने वालों को आज सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण पर हुई सुनवाई के कुछ पॉइंट समझने चाहिए. 

सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि...

  • दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण बढ़ने की एक बड़ी वजह गाड़ियों से निकलने वाला धुआं है.
  • बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए तुरंत, मध्यम अवधि और लंबे समय के उपाय करने की ज़रूरत है.
  • कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए वह जितने ज़्यादा आदेश और पाबंदियां लगाएगा, उनका उल्लंघन उतना ही बढ़ेगा.
  • प्रदूषण को लेकर लोगों को जागरूक करने और उनके व्यवहार में बदलाव लाने की ज़रूरत है.

समझिए, देश की सबसे बड़ी अदालत कह रही है कि दिल्ली में ज़हरीली हवा के लिए गाड़ियों का धुआं मेन विलेन है. दूसरे भी कारण हैं. लेकिन पर्यावरण पर जो मौसमी रुदाली गैंग है, उसे यह नहीं दिखता है. यह गैंग अभी से दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर दुबला हुआ जा रहा है.

बिना पटाखों के ही 400 के पार पहुंचा दिल्ली का AQI

कल धनतेरस का त्योहार था. आज छोटी दीपावली है. यानी पिछले 48 घंटे में दिल्ली में पटाखे नहीं फोड़े गए हैं. ऐसे में जो कथित पर्यावरण प्रहरी क्लब है, उसके तर्क के मुताबिक आज दिल्ली की हवा साफ़ होनी चाहिए. लेकिन हाल क्या है...

दिल्ली में कल औसत AQI 382 को पार कर गया. इसलिए ग्रैप-3 (GRAP-3) की पाबंदियां लगाई गईं. आज दिल्ली का औसत AQI 400 के पार चला गया है.

यह औसत AQI लेवल है. कई इलाकों में तो इंडेक्स 450 के भी पार चला गया है. ज़मीन पर हालात क्या हैं, इसे समझने के लिए आपको हमारी ग्राउंड रिपोर्ट देखनी चाहिए. हमारे संवाददाता राहुल मिश्रा और शुभांग ठाकुर आज सुबह दिल्ली के कई इलाकों में गए. इनकी रिपोर्ट बहुत ध्यान से देखिए.

जानते हैं, आज दिल्ली की हवा में जितना प्रदूषण है, वह कितना हानिकारक है? आज दिल्ली में रहने वाले हर आदमी को प्रदूषित हवा उतना नुकसान पहुंचा रही है, जितना 35 सिगरेट पीने से होता है.

अब सोचिए... ना बम फोड़े गए, ना किसी बच्चे ने फुलझड़ी जलाई, ना अनार फोड़ा और ना चकरी चलाई गई. यानी पटाखे तो फोड़े ही नहीं गए, फिर दिल्ली की हवा इतनी प्रदूषित क्यों है? इस सवाल का जवाब पाखंडी पर्यावरणवादी नहीं देंगे. वो सिर्फ़ यह नैरेटिव उछालेंगे कि भाई पटाखे फोड़ने से दिल्ली की हवा प्रदूषित होती है. जानते हैं, यह किसी भी बड़ी समस्या के एक हिस्से को उठाकर उसकी मन मुताबिक व्याख्या करने जैसा है. दीपावली को विलेन बनाने के लिए पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण को लेकर जो लोग ध्वनि प्रदूषण करते हैं, उन्हें आज एक आंकड़ा बहुत ध्यान से सुनना और समझना चाहिए.

पिछले 5 साल के आंकड़ों से समझें प्रदूषण की हकीकत

सबसे पहले आप प्रदूषित हवा की परिभाषा समझिए.

एयर क्वालिटी इंडेक्स जब 100 के आसपास होता है, तो उसे संतोषजनक माना जाता है. AQI 201 से ज़्यादा होने पर उसे खराब माना जाता है. जैसे-जैसे प्रदूषण का मीटर ऊपर जाता है, हवा सेहत के लिए और खतरनाक होती जाती है.

समस्या को संपूर्णता से समझने के लिए पिछले 5 साल के आंकड़ों को देखते हैं...

  • दिल्ली में 2021 में साल के 168 दिन AQI 200 से ज़्यादा था. 24 दिन तो AQI का लेवल बहुत गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया.
  • 2022 में 202 दिन AQI 200 से ज़्यादा और 6 दिन गंभीर रहा.
  • 2023 में 159 दिन AQI 200 से ज़्यादा और 15 दिन गंभीर रहा.
  • 2024 में 157 दिन AQI का लेवल 200 से ज़्यादा और 17 दिन गंभीर रहा.
  • 2025 में 165 दिन AQI का लेवल 200 से ज़्यादा और 8 दिन गंभीर रहा.
  • यानी 2021 से 2025 तक पांच साल में 851 दिन दिल्ली में AQI का लेवल 200 से ज़्यादा रहा और 70 दिन AQI गंभीर श्रेणी में रहा.

यह महत्वपूर्ण तथ्य है, क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में वायु प्रदूषण कोई मौसमी आपदा नहीं है. ऐसा नहीं है कि सर्दी के मौसम में हवा खराब होगी और गर्मी के मौसम में सब कुछ ठीक होगा. वायु प्रदूषण दिल्ली में एक स्थायी और गंभीर समस्या है. दीपावली को बदनाम करने के लिए मौसमी रुदाली गैंग जो नैरेटिव चला रहा है, उसका पाखंड इन आंकड़ों से साफ़-साफ़ समझ आता है. अगर सचमुच ये लोग दिल्ली की आबो-हवा को लेकर फ़िक्रमंद होते, तो पूरी तस्वीर समझते और समझाते.

दिल्ली की ज़हरीली हवा के असली गुनहगार कौन?

बताते कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए पटाखे नहीं, कुछ दूसरे तत्व ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं. पूरी तस्वीर दिखाते, लेकिन ये नहीं दिखाएंगे. इसलिए आज हम दिल्ली में प्रदूषण के लिए कौन से तत्व ज़िम्मेदार हैं, इसकी एक छोटी सी जानकारी आपके साथ शेयर करते हैं. सर्दियों के मौसम में दिल्ली के वायु प्रदूषण में:

  • धूल, सड़क, मिट्टी और निर्माण से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 42% होती है. मतलब, प्रदूषण बढ़ाने में आधे से सिर्फ़ थोड़ा ही कम योगदान धूल का है.
  • गाड़ियों के धुएं से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे ही रेखांकित किया है.
  • दिल्ली के आसपास खेत में पराली जलाने और खुले में कचरा जलाने से हवा में ज़हरीली गैसें घुलती हैं, प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है.
  • दिल्ली और दिल्ली के आसपास कई कारखाने हैं, बिजली बनाने के लिए थर्मल पावर प्लांट हैं. वायु प्रदूषण में इनकी हिस्सेदारी 9 प्रतिशत है.

और अन्य स्रोतों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 6% है.

अब समझिए कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की कथित चिंता करने वाले कितना झूठ बोलते हैं. कभी किसी ने आपको बताया कि डस्ट और गाड़ियों का धुआं दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा ज़िम्मेदार है? नहीं बताया होगा. क्यों? क्योंकि अगर ये सच को स्वीकार कर लेंगे, तो उनका दीपावली विरोधी नैरेटिव खंड-खंड हो जाएगा. इनका सनातन विरोधी एजेंडा फेल हो जाता. इसलिए कैमरा-प्रेमी पर्यावरण प्रहरी क्लब सिर्फ़ और सिर्फ़ दीपावली और पटाखों की बात करता है.

पटाखों से कितना बढ़ता है प्रदूषण?

  • यह सच है कि दीपावली पर पटाखे जलाने से अगले दिन AQI बढ़ता है. आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते हैं:
  • 2024 में दिवाली से एक दिन पहले दिल्ली का AQI 307 था. दिवाली के दिन 328 और अगले दिन 339 था.
  • 2025 में दिवाली से एक दिन पहले AQI 296 था. दिवाली के दिन 345 और अगले दिन 351 था.

पटाखे फोड़ने से दिल्ली की हवा थोड़ी और प्रदूषित हो गई, यह सच है. लेकिन समझना यह भी चाहिए कि हवा पहले से ही प्रदूषित थी. ऐसा नहीं था कि दीपावली से पहले AQI 150 था और पटाखे फोड़ने के बाद AQI 350 हो गया. ऐसा बिल्कुल नहीं है. हवा पहले से खराब थी, दीपावली के अगले दिन थोड़ी और प्रदूषित हो गई. इसलिए जो लोग यह शोर मचाते हैं कि पटाखों से दिल्ली की हवा खराब होती है, वो सिर्फ़ दीपावली के पवित्र त्योहार को प्रदूषण के दाग से कलंकित करने की साज़िश करते हैं. ये प्रदूषण के नाम पर दीपावली को बदनाम करते हैं और सच के न्यूनतम हिस्से के साथ अपने प्रोपेगेंडा का विस्तार करते हैं.

सिर्फ़ दिल्ली नहीं, छोटे शहरों में भी हवा ज़हरीली

चरक संहिता में महर्षि चरक ने लिखा है कि वायु ही प्राण है और जल ही जीवन है. जब ये दोनों दूषित हो जाते हैं, तो समस्त सृष्टि रोगों और विनाश की ओर बढ़ने लगती है.

महर्षि चरक ने जो बात सदियों पहले कही थी, आज वह शब्दशः सच साबित हो रही है. यह जो वायु प्रदूषण से चिंतित घड़ियाली हरित सेना है ना, उसे आज अपनी चिंता के वृत्त का विस्तार करना चाहिए. क्यों? क्योंकि सिर्फ़ दिल्ली में वायु प्रदूषण का शोर मचाने वालों को आज दिल्ली के साथ देश के दूसरे शहरों का हाल भी देखना चाहिए. वायु प्रदूषण सिर्फ़ दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों की समस्या है, ऐसा नहीं है. छोटे शहरों में भी प्रदूषित हवा बड़ी आपदा बन गई है. यह समस्या कितनी बड़ी है, इसे समझने के लिए सबसे पहले आप हमारी यह वीडियो रिपोर्ट देखिए.

वायु प्रदूषण की अखिल भारतीय पड़ताल में शहर-शहर हमारे संवाददाता ज़मीन पर उतरे, AQI की जांच की और जाना कि वायु प्रदूषण से निपटने का कोई भी इंतज़ाम है या नहीं.

  • उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद में AQI 500 के पार पहुंच गया है. शहर के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब है, लेकिन उससे भी ज़्यादा खराब है वायु प्रदूषण को लेकर प्रशासन का नज़रिया. हमारे संवाददाता रैनावाल में उस जगह पहुंचे जहां AQI दिखाने वाला बोर्ड लगा है, लेकिन यहां कुछ भी नहीं दिख रहा था.
  • यूपी के ही फ़तेहपुर में सुबह-सुबह AQI का लेवल 335 को पार कर गया. जो लोग सेहत बनाने के लिए सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, वो प्रदूषण से परेशान दिखे.
  • हरियाणा के करनाल में AQI दिखाने वाला बोर्ड काम कर रहा था, लेकिन आपको आंकड़ा समझ में आ जाए, इसकी गारंटी नहीं. सब कुछ इतना उलझाने वाला था कि कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था.
  • पंजाब के फ़रीदकोट में AQI 600 के पास है. लोग आंख में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी की शिकायत कर रहे हैं. दिल्ली से पंजाब तक पराली जलाने को प्रदूषण की बड़ी वजह बताया जा रहा है, लेकिन फ़रीदकोट के लोगों का कहना है कि समस्या सिर्फ़ पराली जलाना नहीं है.

प्रदूषण से देश की अर्थव्यवस्था को 9 लाख करोड़ का नुकसान

समझिए, वायु प्रदूषण के लिए दिवाली को विलेन बनाना समस्या का समाधान नहीं है. यह सिर्फ़ सिलेक्टिव सोच और प्रोपेगेंडा है. प्रदूषण अब सिर्फ़ महानगर ही नहीं, टियर-टू, टियर-थ्री और गांव तक की समस्या है. और प्रदूषण सिर्फ़ हमारी शारीरिक सेहत के लिए हानिकारक नहीं है, यह देश की आर्थिक सेहत के लिए भी हानिकारक है. आप एक आंकड़े से समझिए.

फिक्की और अर्न्स्ट एंड यंग की रिपोर्ट के मुताबिक....

  1. प्रदूषण से भारत की GDP को हर साल करीब 10 प्रतिशत का नुकसान होता है.
  2. इसे आंकड़ों में कहें तो प्रदूषण के कारण देश को 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है.
  3. प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों से देश में हर साल 130 करोड़ कार्य दिवस बर्बाद होते हैं. यानी 130 करोड़ कामकाजी दिन लोग काम नहीं कर पाते. जानते हैं, एक साल में होने वाला यह नुकसान 35 लाख लोगों के कामकाज के बराबर है.
  4. यानी प्रदूषण एक तरफ हमें बीमार बना रहा है, हमारे प्राकृतिक संसाधनों को बर्बाद कर रहा है और दूसरी तरफ़ देश को गंभीर आर्थिक चोट पहुंचा रहा है. 

अगर सचमुच प्रदूषण को लेकर चिंता है, भारतवासियों की सेहत की फ़िक्र है, तो अपनी सोच को बड़ा बनाना चाहिए. सिर्फ़ पटाखों को प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार ठहराना और दीपावली को विलेन बनाना छोटी सोच और सस्ती लोकप्रियता पाने का सबूत है.

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Bhoopendra Rai

Bhoopendra Rai

पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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