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घाटी में ध्वस्त हुआ आतंकी इकोसिस्टम: सिर्फ एक स्थानीय आतंकी सक्रिय, सीमा पार बौखलाए पाकिस्तानी आका!

आतंकवाद में आई इस भारी गिरावट से सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आका बुरी तरह बौखलाए हुए हैं. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस साल एक भी कश्मीरी युवा आतंकी संगठनों में शामिल नहीं हुआ.

Written By Khalid Hussain Edited By Bhoopendra Rai
Published: Nov 05, 2026, 10:51 PM IST | Updated: Nov 05, 2026, 10:58 PM IST
Image Credit: घाटी में ध्वस्त हुआ आतंकी इकोसिस्टम.
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कश्मीर में आतंकवाद की कमर पूरी तरह टूट चुकी है. हालात अब तक के सबसे शांत दौर में हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस के इस खुलासे ने सीमा पार बैठे आकाओं की नींद उड़ा दी है. घाटी में अब सिर्फ एक लोकल आतंकी बचा है, जो इस इलाके के इतिहास में सबसे निचला स्तर है. कश्मीर जोन के आईजीपी (IGP) सुजीत कुमार ने खुद इस बात पर मुहर लगाई है.

आईजीपी (IGP) सुजीत कुमार ने साफ कहा कि सुरक्षा बलों के ताबड़तोड़ ऑपरेशन्स ने आतंकियों के मददगारों और फंडिंग नेटवर्क को ऐसा ध्वस्त किया कि इस साल एक भी स्थानीय लड़के की आतंकी गुटों में भर्ती नहीं हुई. पाकिस्तान अब नार्को-टेरर और बचे-खुचे विदेशी आतंकियों के सहारे साजिश रचने की फिराक में है, लेकिन हमारे जवानों का शिकंजा हर तरफ कस चुका है.

घाटी में सिर्फ 1 स्थानीय और कुछ विदेशी आतंकी बाकी

मीडिया से बात करते हुए, IGP सुजीत कुमार ने बताया कि घाटी में आतंकवाद का दायरा सिमटकर अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है. उस एक स्थानीय आतंकवादी के अलावा, 8-10 विदेशी आतंकवादियों का एक छोटा समूह भी सक्रिय है, जो लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं.

अनंतनाग और कुलगाम साजिश का मास्टरमाइंड रडार पर

IGP सुजीत कुमार ने कहा, 'अभी केवल एक स्थानीय आतंकवादी सक्रिय है, जिसने निश्चित रूप से अनंतनाग और कुलगाम में हमलों की साजिश रची है. उसे कुछ विदेशी आतंकवादियों का भी समर्थन मिल रहा है. हमारे पास कुछ सुराग हैं, लेकिन हम कोई सटीक संख्या नहीं बता सकते, क्योंकि ये आतंकवादी लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं. आज वे कहीं और हैं तो कल कहीं और. हम उन पर नजर रखे हुए हैं. कोई भी निश्चित आंकड़ा बताना बढ़ा-चढ़ाकर बताने जैसा होगा.'

महीनों की कड़ी मेहनत से ध्वस्त हुआ आतंकी नेटवर्क

घाटी में यह बदलाव अचानक नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों के महीनों की कड़ी मेहनत और लगातार चलाए गए ऑपरेशन्स हैं. जवानों ने सिर्फ बंदूकों वाले आतंकियों को ही ढेर नहीं किया, बल्कि पर्दे के पीछे से उनकी मदद करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs), स्लीपर सेल्स और टेरर फंडिंग के पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका. आतंकियों की पैसों की सप्लाई लाइन काटकर और उनके पनाहगारों पर कड़ा शिकंजा कसकर, सुरक्षा बलों ने उस पूरे आतंकी तंत्र को तहस-नहस कर दिया है जो दशकों से घाटी में अपनी जड़ें जमाए बैठा था.

भर्ती बंद होने पर हाइब्रिड मॉड्यूल और ड्रग्स का सहारा

भर्ती में कमी आने के बाद, पाकिस्तान समर्थित हैंडलर्स ने अपनी रणनीति बदल ली है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब उनका ध्यान बचे हुए OGWs (ओवरग्राउंड वर्कर्स), स्लीपर सेल और हाइब्रिड टेरर मॉड्यूल को सक्रिय करने पर है. इन नेटवर्कों को चलाने के लिए भारी फंड की जरूरत होती है, जो मुख्य रूप से नशीले पदार्थों के कारोबार से जुटाया जाता है.

'A B C' कोड से अंडरग्राउंड वर्कर्स तक पहुंच रहा पैसा

IGP सुजीत कुमार ने बताया, 'पैसा नशीले पदार्थों के कारोबार से आता है. इसके सरगना, चाहे वे यहां बैठे हों या सीमा के उस पार, इस कमाई का इस्तेमाल अपने अंडरग्राउंड वर्करों को पैसे बांटने के लिए करते हैं, जिसे वे 'A B C' कोड का नाम देते हैं.' कुमार ने आगे कहा कि सीमावर्ती इलाके इस 'नार्को-टेरर' से गहराई से जुड़े हुए हैं. हालांकि यह एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सुरक्षा बल सक्रिय रूप से इससे निपट रहे हैं. नशीले पदार्थों और उनसे जुड़ी मशीनरी को जब्त किया गया है, और सरकार ने ऐसी संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया है.

मददगारों पर भी सख्त नजर, इनपुट पर तुरंत एक्शन

IGP कुमार ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा बलों को आतंकवादियों की गतिविधियों के बारे में लगातार इनपुट मिल रहे हैं और वे उन पर कार्रवाई भी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'हमें आतंकवादियों की गतिविधियों के बारे में लगातार इनपुट मिलते रहते हैं और हम उन्हीं के आधार पर काम करते हैं. हमारी टीम इन इनपुट को लेकर सतर्क है और अपना काम कर रही है. हम उन लोगों पर भी नजर रख रहे हैं जो आतंकवादियों का समर्थन करते हैं. हां, धमकियां तो आती हैं, लेकिन हम उनसे अच्छी तरह निपटते हैं.'

हाईवे पर पाबंदियां और आईईडी का खतरा

सुरक्षा बलों के काफिले की आवाजाही के कारण नेशनल हाईवे पर आम लोगों की आवाजाही पर समय-समय पर लगाई जाने वाली पाबंदियों के बारे में पूछे जाने पर सुजीत कुमार ने आम आदमी की चिंताओं को स्वीकार किया है. उन्होंने यह भी बताया कि खतरा अभी भी लगातार बना हुआ है. उन्होंने कहा, 'जैसा कि मैंने पहले भी बताया था, खतरे लगातार बने हुए हैं. हाईवे पर आए दिन कोई न कोई समस्या आती रहती है. कई बार IED (विस्फोटक) मिलते हैं जिन्हें नष्ट कर दिया जाता है. इसलिए, सुरक्षा प्रोटोकॉल तय करते समय इन सभी बातों का ध्यान रखा जाता है. यह एक लगातार चलने वाला और संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा की जा रही है और हमारी इस पर पूरी नजर है.'

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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