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कर्नाटक के सियासी गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की गई नवीनतम 'फाइनल वोटर लिस्ट' में राज्य भर से एक करोड़ से भी अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात सामने आई. महज कुछ ही महीनों पहले जारी हुई ड्राफ्ट मतदाता सूची के आंकड़ों से तुलना करें, तो यह गिरावट असामान्य और चौंकाने वाली मानी जा रही है. अचानक इतने बड़े पैमाने पर नामों का गायब होना न सिर्फ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि आगामी चुनावों के समीकरणों को भी पूरी तरह से उलझा चुका है.
इस 'वोटर लिस्ट कटौती' को लेकर राज्य का राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है. सत्ता पक्ष जहां इसे चुनावी प्रक्रिया को साफ-सुथरा बनाने, डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने और बोगस वोटिंग रोकने की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा है; वहीं, विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर 'लोकतंत्र पर हमला' और खास वर्ग के वोटों को काटने की सोची-समझी साजिश करार दिया है. कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची 2026 जारी कर दी है. इस अद्यतन मतदाता सूची के अनुसार राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 4,55,00,011 हो गई है.
नवीनतम मतदाता सूची में लैंगिक संतुलन देखा गया है. इसमें महिला मतदाताओं की संख्या 2.29 करोड़ है, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 2.25 करोड़ दर्ज की गई है. इसके साथ ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है. मतदाता सूची में 18 से 19 वर्ष की आयु के 6.83 लाख नए युवा मतदाता शामिल हुए हैं, जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. वहीं, दिव्यांग श्रेणी के 5.65 लाख मतदाताओं के नाम भी इस सूची में दर्ज हैं.
अंतिम मतदाता सूची तैयार करने से पहले चुनाव आयोग द्वारा व्यापक स्तर पर घर-घर जाकर सत्यापन अभियान चलाया गया था. इस गहन सत्यापन प्रक्रिया के दौरान कुल 1.07 करोड़ अयोग्य या अप्रासंगिक प्रविष्टियों को प्रारूप मतदाता सूची से बाहर रखा गया.
विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, पारदर्शी और सटीक बनाना था, ताकि आगामी चुनावों में केवल वैध मतदाता ही भाग ले सकें और कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे.