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साइबर ठगी का पर्दाफाशः जांजगीर से असम तक फैला नेटवर्क, 10 राज्यों में ठगी करने वाले 8 गिरफ्तार

पुलिस ने साइबर ठगों के इस गिरोह के कब्जे से कई मोबाइल, एटीएम कार्ड और बैंक खातों के दस्तावेज बरामद किए हैं. जानिए पुलिस ने कैसे बिछाया जाल और किस तरह से अंजाम दिया जाता था यह हाई-टेक फर्जीवाड़ा.

साइबर ठगी का पर्दाफाशः जांजगीर से असम तक फैला नेटवर्क, 10 राज्यों में ठगी करने वाले 8 गिरफ्तार
Image Credit: कमीशन का लालच और साइबर ठगी का मकड़जाल: जांजगीर से 10 राज्यों तक फैला नेटवर्क बेनकाब

चंद रुपयों के कमीशन के लालच में लोग किस कदर अपराध के दलदल में फंस जाते हैं, इसका एक सनसनीखेज मामला छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में सामने आया है. जांजगीर-चांपा साइबर पुलिस ने एक ऐसे बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार जांजगीर से लेकर देश के 10 अलग-अलग राज्यों तक जुड़े हुए थे. इस मामले में पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है.

पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कुछ रुपयों के कमीशन के लालच में 8 लोगों ने अपने बैंक खाते और सिम कार्ड साइबर ठगों को सौंप दिए थे. इन खातों का इस्तेमाल देश भर में लोगों को ठगने के बाद अवैध रकम मंगवाने के लिए किया जाता था. हालत यह थी कि कुछ खातों के खिलाफ तो 14 से 15 बार तक ठगी की शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं. इन खातों में लाखों-करोड़ों के ट्रांजैक्शन मिले हैं, जिन्हें पुलिस ने अब होल्ड करवा दिया है.

मामूली कमीशन के चक्कर में फंसे 8 आरोपी

दस हजार से एक लाख रुपये तक के मामूली कमीशन के चक्कर में अब ये 8 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं और न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे जा चुके हैं. इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि थोड़ा सा लालच कैसे पल भर में जेल की सलाखों तक पहुंचा सकता है. पुलिस लगातार अपील कर रही है कि कभी भी अपने बैंक खाते या सिम कार्ड का इस्तेमाल दूसरों को न करने दें.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, साइबर पुलिस को लंबे समय से संदिग्ध बैंक खातों और सिम कार्डों के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही थीं. जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि जांजगीर के कुछ लोकल युवकों का इस्तेमाल साइबर ठगों ने अपने "म्यूल बैंक खातों" (Mule Accounts) के रूप में किया है. आरोपियों को 10 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का मोटा कमीशन दिया जाता था. इस लालच में आकर इन 8 लोगों ने अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और फर्जी सिम कार्ड साइबर ठगों के हवाले कर दिए.

10 राज्यों तक फैली थीं साइबर ठगों की जड़ें

जब पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की कुंडली खंगाली, तो जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए. इन खातों में साइबर ठगी की रकम सीधे पहुंच रही थी. जांच में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क असम से लेकर कर्नाटक तक फैला हुआ था. साइबर ठगी के जरिए हड़पे गए पैसों के तार देश के 10 प्रमुख राज्यों से जुड़े पाए गए:

  • उत्तर और मध्य भारत: उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और छत्तीसगढ़
  • पश्चिम और दक्षिण भारत: गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना
  • पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: पश्चिम बंगाल और असम

इन सभी 10 राज्यों से दर्ज शिकायतों की कड़ियां इन्हीं म्यूल खातों से आकर जुड़ रही थीं

खातों में करोड़ों का लेन-देन, कई बार दर्ज हुई शिकायतें

साइबर अपराधियों ने इन खातों का इस्तेमाल अवैध पैसों को इधर-उधर घुमाने के लिए धड़ल्ले से किया. एक-एक बैंक खाते में लाखों और करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुए. साइबर पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम एक ही खाते में बार-बार भेजी जाती थी. हद तो तब हो गई जब कुछ खास बैंक खातों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में 14 से 15 बार तक शिकायतें दर्ज पाई गईं. मामला उजागर होने के बाद कई संदिग्ध खातों में जमा रकम को होल्ड (फ्रीज) करवा दिया गया है.

पुलिस की सख्त कार्रवाई और अपील

जांजगीर-चांपा साइबर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए गिरोह के 8 मुख्य आरोपियों को धर दबोचा और कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है. इस बड़ी कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशासन ने आम जनता के लिए एक बेहद जरूरी सतर्कता अपील जारी की है.

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About the Author

Ravindra Pratap Singh

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रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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