J&K स्टेटहुड प्रस्ताव पर संग्राम: विधानसभा में बवाल, स्पीकर पर भड़की बीजेपी बोली- 'नियम मानो या कुर्सी छोड़ो'
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी के बीच खिंची तलवारें, म्यान में आने को राजी नहीं दिख रही हैं. मंगलवार को भी इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ.
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विधानसभा स्पीकर अब्दुल रहीम राथर को हटाने की मांग को लेकर मंगलवार को भी जोरदार हंगामा देखने को मिला. विपक्ष के नेता और बीजेपी विधायक सुनील शर्मा ने राथर को हटाने की मांग दोहराते हुए आरोप लगाया कि स्पीकर ने ऐसे प्रस्ताव को सदन में क्यों आगे बढ़ने दिया, जिसे लेकर कानूनी और संवैधानिक सवाल उठ चुके हैं. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही शर्मा ने ये मुद्दा उठाते हुए कहा, 'राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़े प्रस्ताव पर कानून विभाग की राय और सरकार के रुख को देखते हुए स्पीकर को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए.' उनका ये भी कहना था कि स्टेटहुड प्रस्ताव को सदन में लाने की प्रक्रिया पर सवाल उठने के बावजूद इसे जानबूझकर आगे बढ़ाया गया.
सदन में संग्राम
इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई. नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के सदस्यों ने बीजेपी के विरोध के बीच नारेबाजी की. वहीं बीजेपी विधायकों ने स्पीकर के खिलाफ विरोध जताया और उनकी कुर्सी छोड़ने की मांग की. इसके बाद बीजेपी विधायक सदन से वॉकआउट कर गए.
सारे सियासी फसाद की प्रमुख जड़ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश किया गया वो प्रस्ताव है, जिसमें जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की गई है. प्रस्ताव में विधानसभा के 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 के प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है. विधानसभा ने सोमवार को यह प्रस्ताव पारित कर दिया था, जबकि बीजेपी ने इसका विरोध करते हुए वॉकआउट किया था.
तकरार जारी
बीजेपी का कहना है कि वो जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के पक्ष में है, लेकिन प्रस्ताव में साल 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और 2024 के विशेष दर्जे से जुड़े संदर्भों को शामिल किए जाने पर उसकी आपत्ति है. सुनील शर्मा ने प्रस्ताव की भाषा को अस्वीकार्य बताते हुए कहा है कि राज्य के दर्जे की बहाली को 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
हंगामे के बीच स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने कड़ा रुख अपनाते हुए बीजेपी विधायकों से कहा कि उन्हें विधानसभा के नियम और अपनी शक्तियों की जानकारी है और वह सदन में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने तत्काल पद छोड़ने और प्रस्ताव की कार्यवाही रोकने की दोनों प्रमुख मांगों से इनकार कर दिया.
राथर ने कहा कि उन्हें स्पीकर को हटाने के नोटिस की विस्तृत जानकारी अभी नहीं मिली है. विधानसभा की प्रक्रिया के मुताबिक, ऐसे प्रस्ताव को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद ही विचार के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.
साल 2000 में तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार के दौरान विधानसभा ने जम्मू-कश्मीर को 9 अगस्त 1953 से पहले वाली स्थिति के अनुरूप अधिक स्वायत्तता देने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था. बीजेपी इसी संदर्भ को मौजूदा स्टेटहुड प्रस्ताव में शामिल किए जाने का विरोध कर रही है.
इस मुद्दे पर बीजेपी का रुख साफ है कि वह पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली का समर्थन करती है, लेकिन स्वायत्तता या 2019 से पहले की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े संदर्भों को मौजूदा प्रस्ताव का हिस्सा बनाए जाने का विरोध करती है. इसी मुद्दे पर विधानसभा में लगातार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है.