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उमर के प्रस्ताव पर घमासान: 10 संशोधनों के जरिए 370 और 35A की वकालत, बीजेपी ने जताया आक्रोश

हंगामे के दौरान बीजेपी विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ने की घटना भी सामने आई. इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि बीजेपी राज्य के दर्जे की बहाली के पक्ष में है, लेकिन प्रस्ताव में इस्तेमाल भाषा और पुराने संदर्भों पर उसे आपत्ति है.

Written By Khalid Hussain
Published: Sep 28, 2026, 02:37 PM IST | Updated: Sep 28, 2026, 03:17 PM IST
Image Credit: ANI
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 25 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश किए गए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव पर कुल 10 संशोधन पेश किए गए हैं. विधानसभा सचिवालय ने इन संशोधनों की सूची जारी की है. इनमें कई संशोधनों के जरिए मूल प्रस्ताव का दायरा बढ़ाने और अनुच्छेद 370, अनुच्छेद 35A, स्वायत्तता तथा 5 अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति का संदर्भ जोड़ने की मांग की गई है.

25 सितंबर को उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर को तत्काल और जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था. प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को सदन से पारित पुराने प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है. इसमें कहा गया है कि प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजा जाए.

प्रस्ताव में कहा गया है, 'इस सदन द्वारा 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को पारित प्रस्तावों के अलावा, यह सदन भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत और जल्द से जल्द बहाल करने की मांग करता है और यह संकल्प लेता है कि इस प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजा जाए.'

उमर ने क्या कहा?

उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया था कि नया प्रस्ताव 2000 और 2024 में पारित पुराने प्रस्तावों के अतिरिक्त है, उनकी जगह लेने के लिए नहीं है. उनका कहना था कि मौजूदा प्रस्ताव का मुख्य फोकस जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कराना है. उन्होंने सभी दलों से प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की थी.

संशोधनों में 370 और 35A का जिक्र

प्रस्ताव पर पेश किए गए 10 संशोधनों में कई में अनुच्छेद 370 और 35A को शामिल करने की मांग की गई है. कुछ संशोधनों में 5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति बहाल करने और स्वायत्तता से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई विधायकों के अलावा PDP और अन्य विधायकों ने भी ऐसे संशोधन पेश किए हैं.

इन संशोधनों के बाद विधानसभा में प्रस्ताव के दायरे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. हालांकि, मूल प्रस्ताव में सीधे तौर पर अनुच्छेद 370 या 35A की बहाली की मांग नहीं की गई थी.

बीजेपी ने जताया विरोध

विधानसभा में 2000 के प्रस्ताव के संदर्भ और नए संशोधनों को लेकर बीजेपी विधायकों ने विरोध किया. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य के दर्जे की मांग के साथ पुराने स्वायत्तता और विशेष दर्जे से जुड़े मुद्दों को भी आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.

PDP विधायक वहीद उर रहमान पारा ने भी प्रस्ताव में अनुच्छेद 370, 35A और स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों को शामिल करने की मांग वाला संशोधन पेश किया है. वहीं, कांग्रेस समेत कुछ अन्य दलों ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन किया है.

 

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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