चीन को काउंटर करने के लिए Indian Navy का '2050 वाला' मेगा प्लान, खामोशी से इन घातक हथियारों पर कर रही काम
समंदर में चीन की बढ़ती आक्रामकता के मुकाबले में भारत का सुर काफी नरम नजर आता है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. भारतीय नौसेना पूरी खामोशी के साथ चीन से निपटने के लिए 2050 के मेगाप्लान पर काम कर रही है.
जमीन और आसमान के साथ पानी में भी भारतीय सेना की ताकत पहले से कई गुना और बढ़ने वाली है, समंदर की लहरों पर दुश्मनों को करारा जवाब देने के लिए भारतीय नौसेना अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइलेंट किलर इंजनों से लैस होने जा रही है. इसके लिए भारत का ब्रिटेन के साथ IFEP यानी इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सौदा हुआ है. 2.41 लाख करोड़ के इस सौदे ने भारत के दुश्मनों की नींद उड़ा दी है.
एशिया का सिकंदर बन रहा भारत
हिंद महासागर की लहरें इस बात की गवाह हैं कि एशिया का असली सिकंदर कौन है..लेकिन इस बार भारतीय नौसेना ने जो चक्रव्यूह रचा है, उसने पाकिस्तान से लेकर चीन तक के रक्षा मंत्रालयों में खलबली मचा दी है. जी हां, अब तक रक्षात्मक मुद्रा में दिखने वाली भारतीय नौसेना अब भविष्य के उस युद्ध की तैयारी कर रही है, जहां जीत केवल हथियारों से नहीं बल्कि अत्याधुनिक तकनीक से तय होती है.
देश में 26 और 27 अक्टूबर को होने जा रहे स्वावलंबन 2026 सेमिनार का जिक्र करते हुए वाइस एडमिरल अजय कोचर ने यह जानकारी दी. उन्होंने आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया कि भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भर और मल्टी डायमेंशनल नेटवर्क फोर्स बनाना ही मकसद है. इस बड़े बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए 2.41 लाख करोड़ रुपये की बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं को मंजूरी दी गई है.
शिपयार्डों में चल रहा 42 युद्धपोत का निर्माण
इसके तहत 42 युद्धपोत और नौसैनिक प्लेटफॉर्म का निर्माण भारतीय शिपयार्डों में तेजी से चल रहा है. साथ ही, 78 अतिरिक्त युद्धपोत और सबमरीन का निर्माण किया जा रहा है. 120 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट की बोट्स को मंजूरी मिल चुकी है. नेवी के लिए 4 लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
देश की तटीय सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन फ्रिगेट्स के निर्माण की प्रक्रिया तेज़ की गई है. नौसेना के बेड़े में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल किया जा रहा है. साथ ही क्वांटम टेक्नोलॉजी, ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम को भी शामिल किया जा रहा है.
ब्रिटेन के सहयोग से चलाया जा रहा प्रोजेक्ट
ये भारतीय नौसेना का एक व्यापक आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण प्लान है, जिसमें ब्रिटेन का भी सहयोग लिया जा रहा है. ब्रिटेन की मदद से इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम और आधुनिक नौसैनिक तकनीक का विकास किया जा रहा है, जिससे भारत स्वदेशी गैस टरबाइन और इलेक्ट्रिक इंजन तैयार कर सके, ताकि डीजल पर निर्भरता कम हो सके.
भारतीय नौसेना केवल आज के खतरों से नहीं निपट रही, बल्कि वो साल 2050 तक के युद्ध का ब्लूप्रिंट तैयार कर चुकी है. नई दिल्ली में आयोजित होने वाले फ्लैगशिप सेमिनार स्वावलंबन 2026 से ठीक पहले, नौसेना ने भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स और उद्योगों के साथ 1,900 करोड़ रुपये से अधिक के नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.
क्वांटम पोजिशनिंग सिस्टम पर चल रहा काम
इसके तहत भारत अब क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्वांटम पोजिशनिंग सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसके एक्टिवेट होने के बाद भारतीय जहाजों के नेविगेशन और कम्यूनिकेशन को दुनिया की कोई भी महाशक्ति हैक या ट्रैक नहीं कर पाएगी.
वाइस एडमिरल अजय कोचर ने कहा, जैसा कि आप सभी जानते हैं, स्वावलंबन भारतीय नौसेना का नवाचार और स्वदेशीकरण के लिए प्रमुख कार्यक्रम है और ये सेमिनार इसी महीने की 26 और 27 अक्टूबर को मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जाएगा.
नौसेना अपने पांचवें संस्करण की तैयारी कर रही है और हमारा सामूहिक उद्देश्य वही है, भारत की तकनीकी प्रतिभा और क्षमता को नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं के करीब लाना और स्वदेशी तकनीक के जरिए समुद्र में क्षमता बढ़ाना.
चीन को काउंटर करने की रणनीति पर चल रहा भारत
ये सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में चीन की विस्तारवादी स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति को मटियामेट करने का भारत का बड़ा ब्रह्मास्त्र है. बीजिंग के रणनीतिकार इस बात से हैरान हैं कि भारत इतनी तेजी से अपनी नौसेना का आधुनिकीकरण कैसे कर रहा है. वहीं दूसरी तरफ कंगाल पाकिस्तान की नौसेना के पास इस भारतीय बवंडर का कोई जवाब नहीं है.
इस पूरे रक्षा सौदे की सबसे बड़ी रीढ़ और गेमचेंजर तकनीक का नाम है. IFEP यानी इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम. भारत ने इस बेहद एडवांस्ड और संवेदनशील तकनीक के लिए ब्रिटेन के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ये तकनीक भारत के विशालकाय एलपीडी यानी लैंडिग प्लेटफॉर्म डॉक वॉरशिप्स को समंदर के भीतर एक अदृश्य और बेआवाज़ शिकारी यानी साइलेंट किलर बना देगी.
बिना शोर के समंदर में विचरण करेंगे भारतीय जहाज
पारंपरिक युद्धपोत जब समंदर में चलते हैं, तो उनके विशालकाय डीजल या गैस इंजन भारी कंपन और शोर पैदा करते हैं. इस शोर को दुश्मन की पनडुब्बियां और सोनार प्रणालियां मीलों दूर से पकड़ लेती हैं..लेकिन IFEP तकनीक से लैस भारतीय जहाज समंदर में बिना कोई शोर किए, बिल्कुल खामोशी से तैरेंगे.
इतना ही नहीं, ये प्रोपल्शन सिस्टम जहाजों को इतनी असीमित बिजली और ऊर्जा प्रदान करेगा कि भारत के युद्धपोत समंदर के बीचों बीच खड़े होकर भी दुनिया की सबसे भारी मिसाइलों, एंटी शिप प्रणालियों और अत्यधिक ऊर्जा खपत वाले लेजर वेपन्स को सेकंडों में फायर कर सकेंगे.
अब भारत रुकने वाला नहीं है
दुश्मनों की घबराहट की एक और सबसे बड़ी वजह ये है कि भारत अब किसी विदेशी मुल्क की दया पर निर्भर नहीं है. इस महापरियोजना का सबसे मजबूत हिस्सा पूरी तरह से स्वदेशी है. भारत अपने रक्षा शिपयार्ड्स में खुद 24 से 28 मेगावाट के मरीन गैस टरबाइन का निर्माण कर रहा है. इसके साथ ही पूरी तरह से मेड इन इंडिया शक्तिशाली डीजल इंजनों को भी इस मेगा प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया गया है.
साफ है कि 2.41 लाख करोड़ रुपये की इस महायोजना ने ये साबित कर दिया है कि समंदर के सीने पर उठा भारत की ताकत का बवंडर अब शांत होने वाला नहीं है. हिंद महासागर में गूंज रही भारत की ये हुंकार आने वाले कई दशकों तक दुश्मनों के हौसले पस्त रखने के लिए काफी है.
(ब्यूरो रिपोर्ट, जी मीडिया)