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India Veto Power: भारत ने एकबार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ( UNSC) में सुधारों की मांग दोहराई है. इसको लेकर तर्क दिया कि UNSC में सुधारों के तहत समूह के सभी स्थायी सदस्यों को वीटो पावर मिलनी चाहिए और किसी को भी इस शक्ति का इस्तेमाल अपने पावर के लिए नहीं करना चाहिए.
बता दें कि चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका वीटो पावर वाले 5 स्थायी सदस्य हैं. वहीं, इसमें 2 साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 अस्थायी सदस्य भी हैं. सोमवार ( 26 अक्टूबर 2026) को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश परवथानेनी ने कहा कि जब तक यह प्रावधान मौजूद है, तब तक वीटो का अधिकार रिफॉर्म काउंसिल के सभी स्थायी सदस्यों के पास होना चाहिए.
भारतीय राजदूत हरीश परवथानेनी ने UNSC में अपनी बातचीत रखते हुए दुनिया के सामने वीटो पावर के गलत इस्तेमाल के आंकड़े रखे. उन्होंने बताया कि UNSC के इतिहास में तकरीबन 200 प्रस्तावों पर अबतक 331 बार वीटो पावर का उपयोग किया जा चुका है. उन्होंने ये भी कहा कि पिछले साढ़े तीन दशकों से P5 के 5 स्थायी सदस्यों में से 2 ने 1 बार भी वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं किया है. ज्यादातर वीटो या वीटो करने की चेतावनी केवल 3 देशों की ओर से ही दी जाती है. भारतीय राजदूत ने ये भी बताया कि साल 2022 में वीटो के उपयोग पर जवाबदेही तय करने के लिए एक नियम भी बनाया गया था. इसके बावजूद इसके गलत उपयोग में कोई कमी नहीं आई है.
बता दें कि UNSC के 5 स्थायी सदस्यों के पास किसी भी महत्वपूर्ण फैसले को निरस्त करने या रोकने का विशेष अधिकार प्राप्त होता है. भारत ने अपनी मांग रखी है कि वीटो के मुद्दे को अलग तरह से देखने के बदले इसे अन्य सभी सुधारों के साथ सुलझाया जाए. राजदूत हरीश परवथानेनी ने भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वीटो जबतक अस्तित्व में है, तब तक UNSC के सभी नए-पुराने स्थानीय सदस्यों को समान अधिकार और समान जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए. उन्होंने बिना वीटो पावर के नए सेकेंड क्लास स्टेटस के सदस्यों के प्रस्ताव को खारिज किया और कहा कि इस तरह की व्यवस्था असामानता को और ज्यादा आगे बढ़ाएगी.
भारतीय राजदूत हरीश परवथानेनी ने अपने 'X' हैंडल पर UNGA प्लेनरी में वीटो के इस्तेमाल पर भारत की ओर से दिए गए बयानों का ब्योरा देते हुए एक पोस्ट शेयर किया.
Delivered India's statement at the UNGA Plenary on the use of the Veto Highlighted: Veto is a responsibility, not a tool of narrow political expediency. We note that two of the P5 have not exercised veto for over three and a half decades. Most vetoes or threats of vetoes have emanated from three of the P5. Piecemeal reforms will not work. All five clusters of UNSC reform must be addressed together. Veto initiative of 2022 was seen as a harbinger of change. However, actual record of large number of vetoes cast since UNGA 76/262 tells a contrary story. Unwritten consensus rules enable de facto vetoes in Council decisions and sanctions committees. Consensus cannot become a disguised veto in the Inter Governmental Negotiations (IGN). India aligns with the Common African Position: As long as the veto exists, all permanent members must enjoy equal rights. New long-term seats without veto powers would create second-class members and perpetuate inequity. All permanent members, including new ones, must enjoy equal rights. Begin text-based negotiations with clear timelines. The UNSC must reflect today's realities, not those of 1945.
— Parvathaneni Harish (@AmbHarishP) October 26, 2026
हरीश परवथानेनी ने अपने पोस्ट में लिखा कि वीटो एक जिम्मेदोरी है न कि राजनीतिक लाभ उठाने का कोई साधन. वहीं, बिना वीटो पावर वाली नई लॉन्ग टर्म सीटें बनाने से कुछ सदस्य 'दूसरे दर्जे' के बनकर रह जाएंगे, जिससे असमानता बनी रहेगी. इसके साथ ही नए सदस्यों समेत सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए. हरीश परवथानेनी ने पोस्ट में यह भी लिखा कि स्पष्ट समय-सीमा के साथ 'टेक्स्ट-आधारित वार्ता' (text-based negotiations) शुरू की जानी चाहिए. UNSC को 1945 की नहीं, बल्कि आज की वास्तविकताओं को रिफलैक्ट करना चाहिए.