'वोट चोरी' पर अब आर-पार: चुनाव आयोग के खिलाफ इंडी अलायंस ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, याचिका दायर
INDI Alliance on Election Commission: कथित 'वोट चोरी' के मुद्दे पर इंडी गठबंधन अब मोदी सरकार से आर-पार के मूड में आ गया है. उसने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की है.
INDI Alliance Petition Regarding Election Commission: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडी गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में प्रोटेस्ट मार्च निकाला. यह मार्च सुप्रीम कोर्ट तक जाकर खत्म हुआ. इस दौरान गठबंधन की ओर से राहुल गांधी की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इस याचिका में चुनाव आयोग की कथित अनियमितताओं पर तुरंत सुनवाई की मांग की गई है. अदालत ने याचिका को स्वीकार कर जल्द से जल्द लिस्ट करने का निर्देश दिया है. इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है.
इंडी गठबंधन के 11 नेताओं ने किए याचिका पर हस्ताक्षर
यह याचिका अकेले राहुल गांधी की नहीं, बल्कि विपक्षी इंडिया गठबंधन के 11 बड़े नेताओं की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल की गई है. याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एमए. बेबी, डी. राजा, महुआ माजी, सुप्रिया सुले और ई. टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं. इस सामूहिक याचिका पर एडवोकेट प्रसन्ना एस. पैरवी कर रहे हैं.
इंडी गठबंधन की ओर से दायर याचिका में चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है. पहला प्रतिवादी भारतीय चुनाव आयोग को बनाया गया है. इसके साथ ही तीनों चुनाव आयुक्तों ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी रिट में प्रतिवादी के रूप में रखा गया है.
विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिका में मांग:
चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड मांगे जाएं. चुनाव आयोग से SIR से संबंधित सभी फाइलें, बैठकों के विवरण, अधिकारियों की आपत्तियां और फैसलों के रिकॉर्ड मांगे जाएं. साथ ही, ECINET और ERONET सिस्टम के रिकॉर्ड तथा 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR शुरू करने के फैसले से जुड़ी पूरी फाइल पेश की जाए.
यह जांच की जाए कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने दूसरे चुनाव आयुक्तों की जानकारी और सहमति के बिना कोई फैसला तो नहीं लिया. यदि कोई फैसला कानून के विरुद्ध पाया जाता है, तो उसे रद्द किया जाए.
यदि मतदाता सूची बनाने या उसमें संशोधन करने में संवैधानिक या कानूनी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए.
याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक यह सुनिश्चित किया जाए कि चुनाव आयोग के सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाएं. अगर सर्वसम्मति न हो तो अपवादस्वरूप फैसले बहुमत से लिए जा सकते हैं.
फॉर्म 6 में मनमाना बदलाव न हो. नए मतदाता के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाला ऑनलाइन फॉर्म-6 निर्धारित कानूनी फॉर्म के अनुसार हो. नियमों में विधिवत संशोधन किए बिना उसमें नई शर्तें न जोड़ी जाएं.
SIR से संबंधित हर फैसला कानून के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा लिया जाए और उसका लिखित रिकॉर्ड रखा जाए.
नए मतदाता के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाला ऑनलाइन फॉर्म-6 निर्धारित कानूनी फॉर्म के अनुसार हो. नियमों में विधिवत संशोधन किए बिना उसमें नई शर्तें न जोड़ी जाएं.
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में टेक्नीकल एक्सपर्ट की स्वतंत्र कमेटी बनाई जाए. यह कमेटी SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और किए गए बदलावों की जांच करे. ECINET और ERONET डेटाबेस की जांच करे कि किसने रिकॉर्ड में बदलाव किए और किसे इन सिस्टम तक पहुंच थी.
यह कमेटी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्था और प्रक्रियाओं की अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों के आधार पर समीक्षा करे.
मुख्य चुनाव आयुक्त को निर्देश दिया कि वह मतदान केंद्र के अनुसार हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम, नाम हटाने के कारण तथा उम्र और जेंडर के आधार पर आंकड़े प्रकाशित करे. जिन वाजिब मतदाताओं के नाम गलती से हटाए गए हैं, उनके नाम दोबारा जोड़ने की प्रभावी व्यवस्था भी बनाई जाए.
किसी भी वोटर का नाम वोटर लिस्ट से हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले. पंजाब और चुनाव वाले अन्य राज्यों में पात्र नागरिकों को कानून द्वारा निर्धारित अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अवसर दिया जाए.
याचिका और उससे जुड़े मामलों पर फैसला होने तक पूरे देश के राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया जाए.
मंगलवार को हो सकती है याचिका पर सुनवाई
हालांकि याचिका की पूरी कॉपी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें हाल के चुनावों में हुई कथित अनियमितताओं, वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया गया है. इसके साथ ही, याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए हैं.
कानूनी जानकारों का मानना है कि मामला बेहद संवेदनशील होने के कारण इसे अर्जेंट हियरिंग के तौर पर मंगलवार को सुनवाई के लिए लगाया जा सकता है.
हार के लिए चुनाव आयोग को ठहराते रहे हैं जिम्मेदार
बता दें कि कांग्रेस नेतृत्व के रूप में राहुल गांधी के उदय के बाद देशभर में कांग्रेस का ग्राफ लगातार डाउन हो रहा है. उनके नेतृत्व में हुए चुनाव में कई राज्यों में कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी है. वर्ष 2009 के बाद से कांग्रेस अब तक केंद्र की सत्ता से भी बाहर है. राहुल गांधी अपनी पार्टी की हार के लिए अब चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वे चुनाव आयोग पर कथित 'वोट चोरी' और पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं. सड़क पर प्रोटेस्ट के बाद अब वे इस मुद्दे को कानूनी लड़ाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में ले गए हैं.
(एजेंसी आईएएनएस)