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सोमवार सुबह जब दिल्ली-एनसीआर वाले सोकर उठे तो जोरदार बारिश पड़ रही थी और 'गुलाबी ठंड' महसूस हो रही थी. गुलाबी ठंड, उस मौसम को कहते हैं, जब सुबह और देर रात ठंडी हवाएं चलती हैं और मौसम सुहावना रहता है. अब लोग पूछने लगे हैं कि क्या सर्दियों ने नवरात्रों में ही दस्तक दे दी है. चलिए इससे जुड़े आपके तमाम सवालों के जवाब देते हैं.
सवाल: मौसम ने क्यों ली करवट?
जवाब- दरअसल, पहाड़ी इलाकों के ऊपरी हिस्सों में बर्फबारी लगातार हो रही है. भारतीय मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों जैसे कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल में बारिश की चेतावनी जारी की है. 13 अक्टूबर से बंगाल की खाड़ी के दक्षिणपूर्व हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र बनेगा और यह उत्तरी तमिलनाडु और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ेगा.
मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले हफ्ते की शुरुआत में दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में उत्तर-पूर्वी मॉनसून के आने के लिए हालात अनुकूल होने की संभावना है.
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— Zee News (@ZeeNews) October 12, 2026
सवाल- मौसम विभाग ने भविष्यवाणी में क्या कहा?
जवाब- 8 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के बीच दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में बारिश की भविष्यवाणी मौसम विभाग ने की थी. इसके अलावा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. अभी उत्तर-पश्चिम भारत पर एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर है और इस हफ्ते एक और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के इस इलाके को प्रभावित करने की संभावना है.
मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि इस हफ्ते पूर्वी भारत के ज्यादातर हिस्सों और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के और पीछे हटने के लिए हालात अनुकूल होने की संभावना है. 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले हफ्ते की शुरुआत में पूरे देश से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पीछे हटने के लिए हालात अनुकूल होने की संभावना है.
साथ ही, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में पूर्वोत्तर मॉनसून के शुरू होने की संभावना है. IMD ने 15-21 अक्टूबर के दौरान प्रायद्वीपीय भारत के ज्यादातर हिस्सों और पूर्वी तट पर कहीं-कहीं से लेकर काफी ज्यादा इलाकों में बारिश का अनुमान लगाया है.
पूरे देश के लिए, 8-14 अक्टूबर के दौरान बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. हालांकि, 15-21 अक्टूबर के दौरान दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश सामान्य से ज्यादा और उत्तर-पश्चिमी, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से कम होने की उम्मीद है.
सवाल-क्या चलने लगेगी कोल्ड वेव?
जवाब- IMD ने 8-14 अक्टूबर और 15-21 अक्टूबर दोनों ही समय देश भर में कोल्ड वेव की स्थिति की संभावना से इनकार किया है. दोनों ही समय में गर्म रातों की उम्मीद नहीं है. 8-14 अक्टूबर तक देश के कई हिस्सों में साप्ताहिक न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहने की संभावना है. हालांकि, कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ अलग-थलग हिस्सों में तापमान सामान्य से 1-3°C ज्यादा हो सकता है. कुछ दिनों में पश्चिमी राजस्थान और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1-3°C कम रहने की भी संभावना है.
15-21 अक्टूबर के दौरान, देश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है. वहीं, दक्षिण हरियाणा और उससे सटे राजस्थान के कुछ हिस्सों के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश में कुछ दिनों तक न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास या सामान्य से कम रह सकता है.
IMD के साप्ताहिक आकलन में यह भी देखा गया कि पिछले हफ्ते पश्चिमी, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पश्चिमी तट पर औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 2-4°C ज्यादा रहा. पश्चिमी, पूर्वी और उनसे सटे मध्य भारत के कुछ हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 1-3°C ज्यादा रहा.
सवाल-अल-नीनो का क्या असर है?
जवाब- वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रशांत महासागर में 'अल नीनो' एक्टिव है. इसका असर फरवरी 2027 तक बना रहेगा. नतीजतन, हाड़ कंपा देने वाली भीषण ठंड पड़ने की संभावना कम है. साथ ही, कोल्ड वेव के हालात भी लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद नहीं है. मार्च 2027 से तापमान तेजी से बढ़ने लगेगा. अल नीनो के कारण सर्दियों में तापमान सामान्य से 1 या दो डिग्री बढ़ सकता है. घने कोहरे के लिए हवा में नमी और कम तापमान की जरूरत होती है. अगर घना कोहरा नहीं बनता है तो आसमान साफ रहेगा. सूरज की किरणें सीधी धरती पर पड़ेगी, जिससे ज्यादा ठंड नहीं पड़ेगी.
सवाल- अल नीनो ठंडी हवाओं में कैसे रुकावट डालेगा?
जवाब- अल नीनो हवाओं के पैटर्न को बिगाड़ देता है. इसके कारण, पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं उतनी तेज या लगातार नहीं चल पाएंगी. स्काईमेट वेदर के वाइस-प्रेसिडेंट और सीनियर मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत का कहना है कि अल नीनो के असर से इस साल पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी कम हो सकती है या उसमें देरी हो सकती है. अगर पहाड़ों पर कम बर्फ जमा होती है, तो दिल्ली-एनसीआर की ओर चलने वाली हवाओं में वैसी ठंडक नहीं होगी, जिससे कड़ाके की ठंड या कोल्ड वेव आती है.
सवाल- क्या अक्टूबर में कम दर्ज की गई बारिश?
जवाब- IMD के आकलन से पहले वाले हफ्ते में भारत में 'लॉन्ग पीरियड एवरेज' (LPA) की तुलना में 72% कम बारिश दर्ज की गई. 1-7 अक्टूबर के दौरान देश में कुल बारिश में कमी भी LPA से 72% कम रही. IMD का अनुमान बताता है कि अगले दो हफ्तों में अलग-अलग इलाकों में बारिश के पैटर्न में काफी अंतर हो सकता है. पूर्वोत्तर मॉनसून के आने से दक्षिण भारत में ज्यादा बारिश होने की उम्मीद है.