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दिल्ली-NCR में छाने लगा सांसों पर संकट: GRAP-3 की पाबंदियां हुईं लागू, क्या वीकेंड पर प्रदूषण से मिलेगी राहत? जानें मौसम अपडेट

सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर जहरीली होने लगी है. दिल्ली-एनसीआर में तो प्रदूषण की वजह से ग्रैप-3 की पाबंदियां लगा दी गई हैं. क्या वीकेंड पर इस प्रदूषण से राहत की कोई संभावना बन रही है.

Written By Devinder Kumar
Published: Nov 06, 2026, 11:28 PM IST | Updated: Nov 06, 2026, 11:33 PM IST
Image Credit: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने पर ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू हो गई हैं.
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दिवाली आने से पहले ही प्रदूषण ने दिल्ली-एनसीआर का दम घोंटना शुरू कर दिया है. इसकी वजह हवा की गति में आया ठहराव है, जिसके चलते प्रदूषणकारी धूल उड़कर ऊपर नहीं जा पा रहा है. इसके चलते पूरे क्षेत्र में वायु गुणवत्ता का स्तर सीधे 'गंभीर' श्रेणी के करीब जा पहुंचा है. हालात बिगड़ते देख वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM ने दिल्ली में ग्रैप-3 की पाबंदियां सख्ती से लागू कर दी हैं. अगर दिवाली के बाद हालात और बिगड़े तो ग्रैप-4 की पाबंदियां भी लग सकती हैं.

दिल्ली-एनसीआर में लागू हुई ग्रैप-3 की पाबंदियां

देश की राजधानी दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 400 का आंकड़ा पार कर चुका है. दूसरे शब्दों में कहें तो हवा अब 'बेहद खराब' से सीधे 'गंभीर' दायरे में आ गई है, जिसके चलते ग्रैप का तीसरा चरण शुरू करना पड़ा है. यह ग्रैप लागू होने के बाद अब दिल्ली में मिट्टी की खुदाई, ट्रेंचिंग, पाइलिंग और तमाम तरह के माइनिंग या कंस्ट्रक्शन कामों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.

प्रदूषण बढ़ने के साथ ही ड़कों पर गाड़ियों की पाबंदी भी लागू हो गई है. जब तक ग्रैप-3 लागू रहेगा, तब तक दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाली चार-पहिया गाड़ियों के चलने पर बैन रहेगा. इसके अलावा दूसरे राज्यों से आने वाली डीजल बसों की एंट्री पर भी शिकंजा कसा गया है.

हाइब्रिड मोड पर स्कूल चलाने की सलाह

पांचवीं क्लास तक के बच्चों के स्कूल अब ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड पर चलाए जा रहे हैं. प्राइवेट कंपनियों को भी सलाह दी गई है कि वे कर्मचारियों को घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम का विकल्प दें. जिससे उन्हें गाड़ी लेकर सड़कों पर न उतरना पड़े और प्रदूषण में कमी आए.

बाकी शहरों में हवा का क्या है हाल?

बात केवल दिल्ली-एनसीआर की नहीं है. उत्तर भारत के कई दूसरे मैदानी इलाकों में भी प्रदूषण सिर चढ़कर बोल रहा है, जबकि देश के तटीय और पहाड़ी हिस्सों में फिजा काफी राहत भरी है.

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ में AQI 150 से 250 के बीच यानी मध्यम से खराब श्रेणी में बना हुआ है. इसकी बड़ी वजह उत्तर भारत के मैदानी हिस्सों में गिरता पारा और थम चुकी हवाएं हैं. वहीं, सर्दियों की आहट के साथ ही कोलकाता में धूल और स्थानीय प्रदूषण के बढ़ गए हैं, जिससे AQI 120 से 160 के बीच यानी मध्यम स्थिति में है.

मुंबई-चेन्नई में चल रही सुकून की हवा

मुंबई की बात करें तो समुद्र की ओर से लगातार आने वाली हवाओं की वजह से प्रदूषण के कण ज्यादा देर टिक नहीं पाते, जिसकी वजह से वहां पर AQI 80 से 120 के बीच यानी संतोषजनक स्थिति में बना हुआ है. चेन्नई की हवा भी साफ-सुथरी बनी है. लगातार चलती हवाओं और समंदर के पास होने की वजह से वहां की हवा पूरी तरह साफ है और AQI 40 से 80 के दायरे में है.

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इस शनिवार और रविवार को कैसा रहेगा मौसम?

अगर इस वीकेंड यानी शनिवार और रविवार के मौसम की बात की जाए तो अगले दो दिनों में प्रदूषण से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है. शनिवार के दिन AQI के 350 से 390 के स्तर पर बने रहने यानी 'बेहद खराब' रहने के आसार हैं. सुबह और देर रात के वक्त घना स्मॉग यानी धुंध छाई रहेगी.

रविवार को न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी. साथ ही, हवाएं भी बिल्कुल शांत पड़ जाएंगी. इसके चलते प्रदूषणकारी तत्व जमीन के ठीक ऊपर ही फंसकर रह जाएंगे, जिसे टेम्परेचर इनवर्जन कहा जाता है. इसकी वजह से दिवाली वाले दिन AQI एकदम से उछलकर 380 से 420 के खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है.

क्या वीकेंड पर बारिश के कोई आसार हैं?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो दिनों में बारिश होने और तेज हवाएं चलने की कोई संभावना नहीं है. मौसम पूरी तरह सूखा रहने वाला है. इस दौरान हवा की चाल बेहद सुस्त रहेगी और वह महज 4 से 8 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चलती महसूस होगी. जबकि, प्रदूषण को पूरी तरह बहाकर ले जाने के लिए कम से कम 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलना जरूरी होता है.

इसका नतीजा यह रहेगा कि हवा में तैर रहे बारीक कण यानी पीएम 2.5 और पीएम 10 का गुबार लगातार बना रहेगा. ऐसे में आम लोगों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को यही सलाह है कि वे बेवजह बाहर निकलने से बचें और जरूरत पड़ने पर एन-95 मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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