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केंद्र सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है. इसमें खराब गुणवत्ता की दवा (NSQ) मिलने पर मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तुरंत सस्पेंड करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, 5 अहम गुणवत्ता मानकों पर फेल होने वाली दवाओं पर तत्काल कार्रवाई होगी.
जानकारी के मुताबिक, इस ड्राइफ्ट के Rule 122O में NSQ घोषित दवाओं के मामलों में तत्काल लाइसेंस सस्पेंशन का प्रस्ताव है. जबकि Rule 85 के तहत पांच निर्धारित गुणवत्ता मानकों के पालन का विशेष प्रावधान किया गया है. अगर कोई दवा जांच में इन 5 जरूरी चीजों (एसे, डिसॉल्यूशन, शुद्धता और स्टरिलिटी) पर फेल हुई, तो सरकार उस कंपनी का लाइसेंस तुरंत सस्पेंड कर देगी. सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी इस मामले में कार्रवाई करेगी.
अगर मौजूदा प्रक्रिया की बात करें तो दवाओं में खामी मिलने पर कंपनियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाता है, जिसके बाद कंपनी की ओर से जवाब आता है. इन सब नियामकीय प्रक्रिया की वजह से कार्रवाई में देरी की गुंजाइश बनी रहती है. अब नए प्रस्ताव को इस तरह से तैयार किया गया है कि खराब दवाओं का निर्माण और बाजार में उनकी सप्लाई पूरी तरह रोक दी जाए.
नए ड्राफ्ट के मुताबिक, अगर किसी दवा कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड हो जाता है तो उसे बहाल कराना आसान नहीं होगा. इसके लिए कंपनी को पहले गड़बड़ी की मूल वजह बतानी होगी. इसके साथ ही, उसे Root Cause Analysis के साथ Corrective and Preventive Action (CAPA) लागू करना होगा. उसका लाइसेंस तभी बहाल होगा, जब अथॉरिटी सुधारात्मक कदमों का सत्यापन कर संतुष्ट हो जाएगी.
ड्राफ्ट में NSQ रिपोर्ट DCGI, संबंधित राज्य/UT लाइसेंसिंग अथॉरिटी, निर्माता और मार्केटर को भेजने का प्रस्ताव है. सरकारी विश्लेषक की टेस्ट रिपोर्ट के फॉर्म-13 में भी संशोधन प्रस्तावित है. दवा निर्माण और मार्केटिंग से जुड़ी कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है. मरीजों को खराब गुणवत्ता वाली दवाओं से बचाने और दवा सुरक्षा मजबूत करने की इस पहल को अहम माना जा रहा है. सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 30 दिन के भीतर आम लोगों और हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं.