हर महीने 4% रिटर्न का वादा, किया 670 करोड़ का घोटाला! राजमिस्त्री रह चुके शख्स ने 7400 लोगों को कैसे लगाया चूना
कभी राजमिस्त्री, कभी पेट्रोल पंप पर काम करने वाला एक शख्स आज 670 करोड़ रुपये के निवेश घोटाले का मास्टरमाइंड है. इस शख्स नाम है नानावथ भूपाक नाइक और उसे कभी अपनी इंटरमीडिएट परीक्षा पास करने में भी दिक्कतें आ रही थीं.
जरा सोचिए, एक शख्स जिसे इंटरमीडिएट एग्जाम पास करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, जो कभी राजमिस्त्री और पेट्रोल पंप अटेंडेंट का काम करता था, आज वह भारत के 7,400 निवेशकों से जुड़े 670 करोड़ रुपये के निवेश घोटाले का 'मास्टरमाइंड' है. यह कहानी किसी फिल्म की नहीं, बल्कि रियल लाइफ की है.
साइबराबाद की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) विकाराबाद जिले के रहने वाले नानावथ भूपाल नाइक के खिलाफ दर्ज तीन मामलों की जांच कर रही है.
EOW के एक अधिकारी ने बताया,'उसने दावा किया था कि उसने ओपन स्कूलिंग और कॉरेस्पोंडेंस के जरिए अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की और एक डिग्री हासिल की.'
बना राजमिस्त्री-पेट्रोल पंप पर भी किया काम
पुलिस के अनुसार, कानूनी जांच के दायरे में आईं दो कंपनियों शेयर्स बाजार प्राइवेट लिमिटेड (SBPL) और किसान परिवार लिमिटेड (KPL) को शुरू करने से पहले, भूपाल राजमिस्त्री और पेट्रोल पंप अटेंडेंट के तौर पर काम कर चुका था. 2013-14 में, वह एक स्टॉक ब्रोकरेज फर्म में एजेंट के तौर पर शामिल हुआ, जहां उसने कई ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध बना लिए.
2016 में, उसने कुकटपल्ली में उसी ब्रोकरेज फर्म की एक फ्रेंचाइजी खोली. उसी साल, उसने KPL को भी रजिस्टर कराया. इसका मकसद छोटे किसानों की जमीनें इकट्ठा करके ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देना बताया गया था. हालांकि, यह कंपनी कई सालों तक डिएक्टिव रही.
2020 में, नाइक ने स्टॉक ट्रेडिंग फर्म के तौर पर SBPL की शुरुआत की. अपने मौजूदा क्लाइंट नेटवर्क और ऑनलाइन प्रचार का फायदा उठाते हुए, जिसमें हर महीने लगभग 4% रिटर्न देने का वादा किया गया था, उसने निवेशकों को अपनी दो कंपनियों में निवेश करने के लिए लुभाया. ऐसा मुख्य रूप से 2022-23 के बाद हुआ.
हालांकि SBPL के पास लोगों से डिपॉजिट लेने की जरूरी अनुमति नहीं थी, फिर भी भूपाल ने अवैध रूप से निवेशकों से पैसे जुटाए.
साइबराबाद इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की जांच में नानावथ भूपाल नाइक की कहानी सामने आई है. उसके कभी इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के भी लाले पड़े हुए थे, और बाद में उसने राजमिस्त्री और पेट्रोल पंप कर्मचारी के रूप में काम किया.
छोटे-मोटे कामों से लेकर करोड़ों के घोटाले तक
EOW के एक अधिकारी ने बताया,'भूपाल नाइक नए निवेशकों से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को रिटर्न देने के लिए करता था. यह सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक कि 2025 में यह व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा नहीं गई.'
EOW को अब तक आरोपी के खिलाफ 500 से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं. पुलिस ने इन दो कंपनियों और उनके निदेशकों से जुड़े 70 बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें अभी लगभग 35 लाख रुपये मौजूद हैं.
साइबराबाद पुलिस ने जब्त करने के लिए 45 संपत्तियों की भी पहचान की है. इनमें महबूबाबाद, वनपर्थी और संगारेड्डी में आरोपी की ओर से खरीदी गई 140 एकड़ कृषि भूमि शामिल है.
इसमें से 70 एकड़ जमीन KPL के निवेशकों के नाम पर रजिस्टर्ड है. यह एक निवेश योजना का हिस्सा थी, जिसमें 12.5 लाख रुपये के निवेश पर 5 गुंटा जमीन की रजिस्ट्री और 12 महीने के लॉक-इन पीरियड के साथ 24% टैक्स-फ्री रिटर्न देने का वादा किया गया था.
लड़ना चाहता था विधानसभा चुनाव
पुलिस ने कोंडापुर में लगभग 10,000 वर्ग फुट की दो कमर्शियल संपत्तियों और एक विला की भी पहचान की है. अगस्त में LB नगर की एक स्थानीय अदालत में दायर अपनी जमानत अर्जी में, भूपाल ने खुद को 'कोंडापुर की एक गेटेड सोसाइटी के विला नंबर 5 का स्थायी निवासी' बताया. उसने दावा किया कि वह 'एक गरीब लेकिन प्रतिष्ठित परिवार से आता है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.' ऑनलाइन प्रॉपर्टी लिस्टिंग से पता चलता है कि उसी कम्युनिटी में विला की कीमत अभी 6.8 करोड़ से 10 करोड़ रुपये के बीच है.
साइबराबाद EOW की ओर से जांच किए जा रहे तीन मामलों के अलावा, SBPL, KPL और उनके निदेशकों के खिलाफ गुजरात, पंजाब, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में भी पांच मामले दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने बताया कि भूपाल को पंजाब और गुजरात के मामलों में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह अभी जेल में है. एक अधिकारी ने बताया, 'वह 2023 में तेलंगाना विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता था और इसके लिए उसने पैसे भी खर्च किए, लेकिन उसे टिकट नहीं मिल सका.'