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पर्दे के पीछे सहमति, मंच पर विरोध: जिस UPI चार्ज पर भड़के राहुल गांधी, उस पर कांग्रेस के 5 सांसदों ने लगाई थी मुहर

Rahul Gandhi on UPI Charges: पर्दे के पीछे सहमति, मंच पर विरोध. कांग्रेस का यह दोहरा खेल बुधवार को उजागर हो गया. सूत्रों के मुताबिक, जिस UPI चार्ज पर राहुल गांधी भड़के हुए हैं, उस पर कांग्रेस के 5 सांसदों ने ही मुहर लगाई थी.

पर्दे के पीछे सहमति, मंच पर विरोध: जिस UPI चार्ज पर भड़के राहुल गांधी, उस पर कांग्रेस के 5 सांसदों ने लगाई थी मुहर

BJP on UPI Charges Controversy: UPI के 2 हजार रुपये से ज्यादा के भुगतानों पर चार्ज लगाने के सरकार के फैसले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी भड़के हुए हैं. उन्होंने इस फैसले को जनविरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग की है. लेकिन हैरत की बात ये है कि संसदीय समिति में शामिल पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम समेत कांग्रेस के 5 सांसदों ने खुद इस फैसले का समर्थन किया था. इस दोहरे रुख को लेकर अब बीजेपी, कांग्रेस को घेर रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता में वित्त संबंधी संसदीय स्थायी  संसदीय समिति बनाई थी. इस समिति ने पिछले महीने सरकार को अपनी 44वीं रिपोर्ट सौंपी थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि श्रेणीबद्ध मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को बिना किसी देरी के अधिसूचित किया जाए.

'चार्ज' पर कांग्रेस सांसदों ने नहीं जताया था विरोध

समिति ने सरकार को रिपोर्ट देकर UPI के जरिए होने वाले कुछ व्यावसायिक लेन-देन पर शुल्क लगाने की सिफारिश की थी. समिति में कांग्रेस सांसद चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ भी सदस्य के रूप में शामिल थे.

सूत्रों का कहना है कि समिति ने अगस्त में अपनी रिपोर्ट फाइनल की थी. उस बैठक में कांग्रेस के पांचों सांसद भी शामिल थे लेकिन उनमें से किसी ने भी समिति की अनुशंसाओं पर असहमति दर्ज नहीं करवाई. दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने भी यूपीआई पर चार्ज लगाने की सहमति दे दी थी.

संसदीय समिति ने अगस्त में की थी सिफारिश

समिति ने सरकार को रिपोर्ट पेश करके चेतावनी दी थी कि अगर UPI और रुपे (RuPay) से होने वाले लेन-देन के लिए श्रेणीबद्ध MDR ढांचा जल्द शुरू नहीं किया गया, तो ये सब वेंडर सरकार की ओर से मिलने वाली आधी-अधूरी सहायता पर निर्भर रह सकते हैं. इसकी वजह से साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और नेटवर्क बुनियादी ढांचा मजबूत करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी बजट और परिचालन लागत के अंतर को भी चार्ज लगाने की बड़ी वजह बताया. उसने कहा कि बजट में 2 हजार करोड़ रुपये यूपीआई पेमेंट के लिए आवंटित किए गए हैं. जबकि उद्योग जगत के अनुमान के अनुसार परिचालन लागत को पूरा करने के लिए 20 हजार 700 करोड़ रुपये की जरूरत है.

फैसले पर भड़के हुए हैं राहुल गांधी

इस अंतर को देखते हुए समिति ने रिपोर्ट में कहा था कि सरकार एक श्रेणीबद्ध MDR मॉडल पर विचार करे. जिसमें रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे कारोबारियों को यूपीआई यूज करने पर छूट दी जाए. जबकि बड़ी इकाइयों को चार्ज देना होगा. सरकार ने समिति की यह रिपोर्ट 12 अगस्त को संसद के पटल पर रखी थी. ,

अब सरकार की ओर से यूपीआई पर चार्ज लगाने की घोषणा के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी इसके विरोध में उतर आए हैं. उन्होंने मांग की है कि सरकार 15 अक्तूबर से व्यापारियों से 2 हजार रुपये से ज्यादा पर वसूले जाने वाले नए शुल्क को वापस लिया जाए.

सरकार ने विपक्ष के विरोध को किया खारिज

बताते चलें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर वीडियो पोस्ट करके आरोप लगाया है कि यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगाने का फैसला पीएम मोदी ने अमेरिका के दबाव में लिया है. उनके इस आरोप को वित्त मंत्रालय ने खारिज कर दिया. सरकार ने स्पष्ट कहा कि MDR न तो कोई टैक्स है और न ही कोई शुल्क है. इसके बजाय इसे बैंकों और भुगतान ऐप प्रदाताओं सहित भुगतान इकोसिस्टम के भागीदारों के बीच साझा किया जाता है.

 

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About the Author

Devinder Kumar

Devinder Kumar

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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