Form 6 बदला, Declaration हुआ अलविदा: चुनाव आयोग ने आधी रात को क्या कदम उठाया?
चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन लागू नहीं होने वाले राज्यों में फॉर्म 6 के साथ घोषणा पत्र लगाने की अनिवार्यता हटा दी है. यानी अब न्यू वोटर के तौर पर नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 जमा करते समय एक्स्ट्रा डिक्लेरेशन की जरूरत नहीं होगी.
जिन राज्यों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभी नहीं चल रही है, वहां चुनाव आयोग (EC) ने फिर से फॉर्म 6 को ऑनलाइन जमा करने की इजाजत दे दी है. इस फॉर्म का इस्तेमाल नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए होता है और इसके साथ एक डिक्लेरेशन यानी घोषणा पत्र भरना होता था, जिसे SIR के लिए लाया गया था.
आम तौर पर फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए होता है. लेकिन SIR प्रोसेस के दौरान इसका इस्तेमाल उन लोगों को फिर से लिस्ट में शामिल करने के लिए भी किया गया था, जिनके नाम गिनती के चरण (एन्यूमरेशन फेज) के दौरान हटा दिए गए थे. पिछले SIR के समय से ही फिजिकल फॉर्म में खुद या माता-पिता की जानकारी को वोटर लिस्ट से जोड़ने (मैपिंग) के बारे में एक अलग डिक्लेरेशन जोड़ा गया था.
यही मुद्दा चुनाव आयुक्तों ने उठाया था
हालांकि, ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आवेदक बिना डिक्लेरेशन भरे ऑनलाइन फॉर्म जमा नहीं कर पाते थे. चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने मई 2026 और अगस्त 2026 में अलग-अलग नोट और चिट्ठियों के जरिए इसी मुद्दे की ओर इशारा किया था.
फॉर्म 6, रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 से जुड़ा है. सिर्फ केंद्र सरकार को ही कानून और न्याय मंत्रालय के जरिए नियमों में बदलाव करने का अधिकार है और इसी तरह फॉर्म 6 में भी बदलाव किया जा सकता है.
शनिवार (26 सितंबर 2026) को EC ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि फॉर्म 6 के साथ आने वाले डिक्लेरेशन का इस्तेमाल अब सिर्फ SIR के समय ही किया जाएगा.
अब चुनाव आयोग ने क्या बदला?
मंगलवार यानी 29 सितंबर को EC ने ऑनलाइन फॉर्म 6 से माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी की जानकारी मांगने वाले कॉलम हटा दिए थे. साथ ही, डिक्लेरेशन को एक अलग कैटेगरी में रखा गया था, जिसे सिर्फ उन राज्यों के लोगों को भरना था, जहां SIR प्रोसेस अभी भी चल रहा था.
EC अधिकारियों का कहना है कि फॉर्म 6 और फॉर्म 8 (जानकारी बदलने के लिए इस्तेमाल होने वाला) के साथ एक अलग डिक्लेरेशन फॉर्म जोड़ने को चुनाव आयोग ने मंजूरी दी थी, जब पिछले साल बिहार में SIR प्रोसेस शुरू हुआ था, और दूसरे और तीसरे चरण में भी इसे मंजूरी दी गई थी.
उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 में कभी कोई बदलाव नहीं किया गया और डिक्लेरेशन को सिर्फ उसके साथ जोड़ा गया था. अधिकारियों के अनुसार, ऑनलाइन फॉर्म जमा करने में समस्या IT विभाग की ओर से किए गए बदलावों के कारण हुई, ताकि फॉर्म भरने वाले शख्स को दो बार ई-साइन न करना पड़े. एक बार फॉर्म 6 में और दूसरी बार अलग से घोषणा-पत्र में। इसका मतलब था कि फॉर्म जमा करने के लिए इसे भरना जरूरी था. चुनाव आयोग के अधिकारियों ने यह भी कहा कि घोषणा पत्र जोड़ने के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को बरकरार रखा था.