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6 नवंबर दिन शुक्रवार की शुरुआत सुबह देश के दो राज्यों में हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में भूकंप के झटकों के साथ हुई. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश के चंबा में सुबह 6:59 बजे 3.2 तीव्रता का भूकंप आया, जबकि तेलंगाना के नारायणपेट में सुबह 6:16 बजे 2.5 तीव्रता के झटके दर्ज गए. दोनों भूकंप के केंद्र जमीन के भीतर अलग-अलग गहराई पर थे. फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की कोई खबर नहीं है. इसी दौरान म्यामांर में 4 तीव्रता के झटकों से लोग सड़कों पर नजर आए.

शुक्रवार की सुबह 07.41 पर तिब्बत में 4.2 तीव्रता का भूकंप के झटके महसूस हुए. इसके साथ ही नेपाल में 4.2 मैग्नीट्यूड तीव्रता का भूकंप आया तो लोग सहम गए. बीती रात साढ़े 10 बजे करीब चीन के शिनजियांग प्रांत में बीती रात 5 तीव्रता का भूकंप आया तो लोग घरों के बाहर सड़कों पर टहलते नजर आए.
चंबा और नारायणपेट में आए भूकंप से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन प्रसासन अलर्ट मोड पर है. इससे पहले बीते गुरुवार की शाम हरियाणा के फरीदाबाद में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. उससे पहले मिजोरम में मंगलवार को देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं जिससे लोग खौफ में आ गए थे. नेशनल सेंटर फोर सिस्मोलॉजी ने जानकारी दी है कि ये भूकंप रात को 11 बजकर 45 मिनट पर आया था.
EQ of M: 2.9, On: 05/11/2026 18:33:20 IST, Lat: 28.386 N, Long: 77.258 E, Depth: 5 Km, Location: Faridabad, Haryana. For more information Download the BhooKamp App https://t.co/5gCOtjdtw0 @DrJitendraSingh @OfficeOfDrJS @tummalasrini @GSuresh_NCS @ndmaindia https://t.co/mkxGY5EntU
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) November 5, 2026
इसके पहले बीती रात चीन के शिनजियांग प्रांत में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. इसके झटके लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में भी महसूस किए गए. हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं आई.
2026 के उत्तरार्ध में तिब्बत के पठार और नेपाल और हिमाचल से सटे हिमालयी क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियों में इजाफा हुआ है. तिब्बत में पिछले महीने ही 22 अक्टूबर को 7.0 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था. जिसका केंद्र राजधानी ल्हासा से 400 किलोमीटर दूर था और इसकी गहराई 173 किलोमीटर पर थी.
धरती के नीचे मौजूद टेक्टॉनिक प्लेट्स में टकराव की वजह से भूकंप आते हैं. भारत में भूकंप की निगरानी की शुरुआत 1898 में हुई, तब कोलकाता के अलीपुर में एक भूकंप वेधशाला की शुरुआत हुई थी.