दहशत का 'T-179' चैप्टर खत्म: जिसके खौफ से कांप रहा था चंद्रपुर, वो पकड़ा गया; पलासगांव में लौटा सुकून
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में बाघों के हमलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. इस बीच पलासगांव में महिला की मौत के बाद पकड़ा गया T-179 अब वन विभाग की निगरानी में रहेगा. इसी बीच पोम्भूर्णा इलाके में एक चरवाहे पर दूसरे बाघ के हमले से ये संकेत मिल रहे हैं कि जंगल से सटे गांवों में खतरा अभी टला नहीं है
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में 14 दिनों से दहशत का पर्याय बने बाघ 'T-179' को आखिरकार वन विभाग की टीम ने सफलतापूर्वक पकड़ लिया है. चंद्रपुर जिले के सिंदेवाही तालुका के पलासगांव वन क्षेत्र में आतंक फैला रहा बाघ एक महिला की मौत का जिम्मेदार था. टी-179 को पकड़ने के लिए ये ऑपरेशन पलासगांव बीट के अंतर्गत आने वाले गोंडमोहाली इलाके के कंपार्टमेंट नंबर 558 में चलाया गया. इस बाघ के पकड़े जाने से स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.
खतरा टला लेकिन खत्म नहीं हुआ
गांव वालों ने बताया कि 16 अक्टूबर को इसी बाघ ने पलासगांव की रहने वाली उषा अंकुश गुरनुले पर जानलेवा हमला किया था. इस घटना के बाद पलासगांव और आसपास के इलाकों के लोगों में भारी गुस्सा और डर का माहौल था. लोगों की सुरक्षा को देखते हुए, पकड़े गए बाघ को तुरंत चंद्रपुर के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (TTC) भेज दिया गया है, जहां उसकी मेडिकल जांच, इलाज और आगे की जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी. स्थानीय लोगों का कहना है कि भले ही तत्काल राहत मिल गई हो, लेकिन उनका गांव जंगल से सटा होने के चलते पूरी तरह सुरक्षित नहीं हुआ है. गांव वाले काफी समय से गांव की रिहाइस के अंदर सभी इंतजामों से लैस एक चौकी बनाने की मांग कर रहे हैं.
बाघों के हमलों से चंद्रपूर थर्राया, एक ही दिन में तीन पर हमला
बाघ के हमलों की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है. हालिया कुछ घटनाओं की बात करें तो सबसे पहले चिमूर तालुका के गरडापार में 55 वर्षीय सदाशिव खडसंग पर बाघ ने हमला किया. इस हमले में उनकी मौत हो गई. दूसरी घटना में सिंदेवाही तालुका के धुमनखेड़ा में सामने आई, जहां खेत में काम करते समय 70 साल के किसान पत्रुजी मेश्राम पर हमला हुआ. इस हमले में उनकी भी दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई. वो दोपहर में घर ले निकले थे, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटे.
दो की मौत, एक गंभीर घायल
इसी तरह से देखें तो सातारा तुकूम इलाके में गाय चराने जंगल गए 60 साल के राजेश्वर सिडाम पर बाघ ने हमला किया. उनकी जान बच गई, लेकिन गंभीर चोटें आईं. इन घटनाओं से किसानों और नागरिकों में डर का माहौल बन गया है और वो इस संकट का फौरी नहीं स्थाई समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं.
इसके बाद पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की तो उनका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ. इन घटनाओं से आस-पास के पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल है.