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चीन का 'डैम प्लान', अरुणाचल में क्यों घमासान: बनने से पहले ही रडार पर भारत का सियांग प्रोजेक्ट, अचानक क्यों होने लगा विरोध?

Arunachal Pradesh Siang Dam Protest: भारत ने चीन की ओर से बनाए जा रहे मेडोग डैम के काउंटर के लिए अरुणाचल प्रदेश में सियांग डैम बनाने का प्लान किया है. हालांकि, सरकार के इस प्रोजेक्ट का विरोध किया जा रहा है. आखिर क्यों लोग इस योजना के खिलाफ सड़क पर उतरे हैं.

Written ByShruti Kaul
Published: Oct 25, 2026, 02:42 PM IST|Updated: Oct 25, 2026, 02:56 PM IST
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चीन का 'डैम प्लान', अरुणाचल में क्यों घमासान: बनने से पहले ही रडार पर भारत का सियांग प्रोजेक्ट, अचानक क्यों होने लगा विरोध?

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Shruti Kaul

Shruti Kaul

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
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Arunachal Pradesh Protest: अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी के तीन जिलों में भारत अपना बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बना रहा है. यह चीन की ओर से ऊपरी हिस्से में बनाए जा रहे एक विशाल डैम का रणनीतिक जवाब माना जा रहा है. हालांकि, भारत के इस प्रोजेक्ट का कई स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं. उन्हें डर है कि डैम बनने से  उनके गांव डूब सकते हैं और नदी से उनका संपर्क टूट सकता है.    

तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से जानी जाने वाली सियांग नदी गेलिंग के पास अरुणाचल प्रदेश में एंट्री लेती है और 294 किलोमीटर बहने के बाद असम के सादिया में दिबांग और लोहित नदियों से मिलकर ब्रह्मपुत्र नदी बनाती है. सियांग नदी को असम में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है.  

सियांग डैम को लेकर प्रदर्शन


चीन की ओर से बनाया जा रहा मेडोग डैम अरुणाचल प्रदेश के साथ लगे चीनी बॉर्डर से केवल 50 किलोमीटर की दूरी पर बन रहा है. ऐसे में यह भारत के लिए बड़ा खतरा बताया है. चीन की ओर से अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने पर अरुणांचल प्रदेश में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में भारत ने इसे काउंटर करने के लिए सियांग डैम बनाने की प्लानिंग की है. यह डैम 11,200 मेगावाट की क्षमता रखेगा. हालांकि, पासीघाट में इस डैम को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. शुक्रवार ( 23 अक्टूबर 2026) को इस प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया. इस दौरान पुलिस स्टेशन और NHPC के दफ्तर पर आग लगाई गई.


मेडोग डैम से भारत को खतरा?  


यारलुग त्सागपा नदी पश्चिमी तिब्बत के अंग्सी ग्लेशियर से निकलती है और 1,625 किलोमीटर का सफर तय करती है. नामचा बरवा चोटी के पास ग्रेट बेंड से गुजरने के बाद यह नदी भारत में एंट्री लेती है. यहां 918 किलोमीटर बहकर यह बांग्लादेश में 337 किलोमीटर तक बहती है. वहां इसे जमुना नदी कहा जाता है. आखिर में यह बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है. 

डैं

बताया जा रहा है कि चीन के मेडोग डैम की अनुमानित लागत 1.2 ट्रिलियन युआन (17.06 लाख करोड़ रुपये) है. ऐसे में यह दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बन सकता है. इससे हर साल लगभग 300 अरब  kWh इलेक्ट्रिसिटी पैदा होगी. चीन की ओर से इस प्रोजेक्ट को दिसंबर 2024 में मंजूरी दी गई थी. वहीं, इसका निर्माण जुलाई 2025 में शुरू हुआ. यह डैम साल 2033 तक चालू हो सकता है. भारत ने इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है.  

चीनी डैम से आपदा का खतरा? 


'सेडिमेंटरी जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' नाम की एक मैगजीन में छपी रिसर्च के मुताबिक, चीन की ओर से यह डैम उस गांव के इलाके में बनाया जा रहा है, जो सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित इलाकों में से एक है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, डैम के आसपास के जलाशयों की जमीन भी बेहद ढीली और कमजोर बनावट वाली है. यहां पानी भरने से चट्टानें खिसकने का खतरा सबसे ज्यादा है, जिससे लैंडस्लाइड-बाढ़ का खतरा काफी ज्यादा है. ऐसे में भारत के लिए यह बड़ी मुसीबत है. खतरनाक भूगर्भीय स्थिति के चलते भारत का अरुणाचल प्रदेश इस डैम में हुई बड़ी गतिविधी से आपदा की चपेट में आ सकता है.   

ये भी पढ़ें- अरुणाचल में संग्राम, सियांग बांध के विरोध में आवाम; NHPC ऑफिस और पुलिसथाने में लगाई आग; दो विधायकों के घर लूटे   

भारत ने निकाला चीन के मेडोग का तोड़  


अरुणाचल प्रदेश में सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट ( SUMP) मेडोग बांध के चलते आई बाढ़ को कंट्रोल करने और चीनी डैम के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा. इस प्रोजेक्ट का मकसद देश की जल और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में मौसमी बाढ़ को कंट्रोल करना और लॉन्ग टर्म सोशल-इकोनॉमिक डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है. 

डौम

अरुणाचल प्रदेश में भारत की लगभग 40 प्रतिशत अनयुटिलाइज्ड हाइड्रोपावर क्षमता मौजूद है, लेकिन इसकी स्थापित क्षमता केवल 2,115 मेगावाट है और इसने 2025-2035 को जलविद्युत का दशक ( Decade Of Hydropower) घोषित किया है.

मेडोग के सामने कैसे टिकेगा सियांग डैम? 


अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस प्रोजेक्ट पर उठे सवाल को लेकर कहा कि SUMP प्रोजेक्ट चीन की 60,000 मेगावाट की मेडोग प्रोजेक्ट के मुकाबले ज्यादा पानी स्टोर कर सकती है. उन्होंने बताया कि चीन के प्रोजेक्ट में स्टोरेज की क्षमता लगभग 5.5 अरब घन मीटर (BCM) होने का अनुमान है, जबकि SUMP को 9.2 BCM के एक्टिव स्टोरेज के साथ डिजाइन किया गया है, जिससे यह कम  बिजली उत्पादन क्षमता के बावजूद ज्यादा पानी रोक सकता है. उन्होंने अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रस्तावित एटालिन प्रोजेक्ट से मात्र 75 लाख MCM स्टोरेज क्षमता के साथ 3,097 मेगावाट बिजली उत्पादन की उम्मीद है, जबकि दिबांग प्रोजेक्ट को लगभग 4BCM स्टोरेज क्षमता के साथ 2,880 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए डिजाइन किया गया है. खांडू ने कहा कि राज्य सरकार जनता की चिंताओं को सुनेगी और उन्हें नजरअंदाज नहीं करेगी.

सियांग डैम का क्यों हो रहा विरोध? 


भारत के इस डैम प्रोजेक्ट का कई समूहों ने कड़ा विरोध किया है. आदि बाने केबांग-यूनाइटेड, SUMP-प्रभावित युवा संघ, सियांग स्वदेशी किसान मंच और आदि गालो कल्याण समाज जैसे समूहों ने चेतावनी दी है कि जलाशय नदी के किनारे बसे गांवों और उपजाऊ धान के खेतों को जलमग्न कर सकता है, जिससे स्थानीय जनजातियों की पारंपरिक आजीविका और खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी. किसान मंच का अनुमान है कि इस डैम से 27 गांव जलमग्न हो सकते हैं और 1.5 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो सकते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग ने भी प्रोजेक्ट को रद्द करने की मांग की है.

अरुणाचल पहुंची सेना की यूनिट 


पासीघाट में सियांग डैम के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए CRPF की  रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की 2 कंपनियों को अरुणाचल प्रदेश भेजा गया है. गृह मंत्रालय ने शनिवार ( 24 अक्टूबर 2026) को लगभग 250 कर्मियों वाली दोनों कंपनियों को एयरफोर्स के के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से नवी मुंबई से एयरलिफ्ट किए जाने का आदेश दिया. जवानों के इस यूनिट के आज पासीघाट पहुंचने और तैनात किए जाने की उम्मीद है. अरुणाचल प्रदेश में भी CRPF की लगभग 2-3 बटालियनें स्थायी रूप से तैनात हैं. हिंसक प्रदर्शन के दौरान सेंट्रल फोर्स के कई जवान घायल हुए. 

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Arunachal Pradesh