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37 लाख SIR अपीलों का अंबार, इंसाफ की सुस्त चाल... बंगाल के ट्रिब्यूनल में तारीख पर तारीख से मचा हाहाकार!

Bengal SIR Tribunals: पश्चिम बंगाल में SIR के बाद से काफी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. इसके चलते सैकड़ों वोटर्स शायद एक दशक तक वोट देने में असमर्थ रहेंगे. आखिर इसके पीछे क्या वजह है?

Written By Shruti Kaul
Published: Sep 21, 2026, 11:32 AM IST | Updated: Sep 21, 2026, 11:37 AM IST
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West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ( SIR ) के बाद वोटर लिस्ट से हटाए गए सैकड़ों मतदाता अब शायद एक दशक तो वोट नहीं दे पाएंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित की गई अपीलीय ट्रिब्यूनलों को उन वोटर्स के नाम लिस्ट में वापस शामिल करने की अपील पर फैसला लेने में 12 साल से भी अधिक समय लग सकता है.

चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया कि अप्रैल के मध्य में काम शुरू करने के बाद से पिछले 5 महीनों में ट्रिब्यूनलों की ओर से 1,26,194 आवेदनों पर फैसला लिया गया है. इस तरह औसतन ट्रिब्यूनलों की ओर से एक महीने में 25,238 मामलों का निपटारा किया जा रहा है, जिसमें शनिवार-रविवार को भी वर्किंग डे माना गया है. हलफनामा दायर किए जाने के समय, 16 सितंबर तक लंबित मामलों की कुल संख्या 37,05,235 थी. वर्तमान स्पीड से अगर ट्रिब्यूनल हफ्ते में सातों दिन काम करें, तभी सभी मामलों का निपटारा करने में 146 महीने लगेंगे.  

काम संभालने के लिए वर्कफोर्स की कमी


चुनाव आयोग ने यह माना कि 37 लाख मामलों के निपटारे जैसे बड़े काम को संभालने के लिए उनके पास मौजूदा समय में इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रिब्यूनलों की संख्या बेहद कम है. ऐसे में चुनाव आयोग ने कोर्ट से राज्य में ट्रिब्यूनलों की संख्या 24 से बढ़ाकर 42 करने का अनुरोध किया. यह वर्तमान संख्या से लगभग दोगुनी है. चुनाव आयोग ने ज्यूडीशियल ऑफिसर्स को वर्क फ्रॉम होम करने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया.

अपीलीय ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने की मांग 


मामले को लेकर बंगाल में TMC सांसद डेरेक ओ'ब्रायन की याचिका के जवाब में दायर हलफनामे में कहा गया,' पेंडिंग पड़े अपीलों के निपटारे को और अधिक सुव्यवस्थित और त्वरित बनाने के मकसद से यह प्रस्ताव है कि पश्चिम बंगाल राज्य में अपीलीय ट्रिब्यूनलों की संख्या को राज्य के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या के मुताबिक बढ़ाया जाए, ताकि लंबित अपीलों का जल्द निपटारा हो सके.'  

पेंडिंग अपीलों के निपटारे में तेजी


हलफनामे में आगे कहा गया है कि न्यायिक कर्मचारियों को घर से सुनवाई और अन्य कार्यवाही करने की अनुमति देने से आने-जाने में लगने वाले समय को कम करके पेंडिंग अपीलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिलेगी. ट्रिब्यूनलों के कामकाज से जुड़े एक याचिका के जवाब में दायर एक अन्य हलफनामे में आयोग ने कहा कि उनका गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक किया गया था और उनके कामकाज को कंट्रोल करने वाले स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को इस मकसद के लिए गठित समिति की ओर से तैयार किया है. इसमें अन्य बातों के अलावा कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस शामिल हैं.

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About the Author

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
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