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जो लोग दुनिया की बेहतरी और इंसानों की भलाई के लिए कुछ यूनिक काम करते हैं, उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलता है. यह सम्मान 6 क्षेत्रों में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, लिटरेचर, शांति और इकोनॉमिक्स में हर साल दिया जाता है. इस सम्मान को पाने वालों की लिस्ट में अल्बर्ट आइंस्टीन, मैरी क्यूरी, मदर टेरेसा और बराक ओबामा जैसी दिग्गज हस्तियां शामिल हैं. यह सिलसिला साल 1901 में शुरू हुआ था, जो आज तक जारी है. यहां हम जानेंगे कि नोबेल पुरस्कार पाने वालों को क्या-क्या मिलता है.
दरअसल, अधिकतर लोग यही जानते हैं कि नोबेल पुरस्कार विजेता को 18 कैरेट सोने का एक मेडल और करीब 1.1 मिलियन डॉलर (लगभग 1 करोड़ स्वीडिश क्रोना) की रकम मिलती है, लेकिन सच यह है कि कुल 7 अनमोल उपहार मिलते हैं. इनमें ऐसी शाही सुविधाएं भी शामिल हैं, जो पैसों से नहीं खरीदी जा सकतीं. आइए नीचे जानते हैं...
हर विनर को मेडल के साथ एक खास सर्टिफिकेट मिलता है, जो कोई कंप्यूटर से निकला प्रिंटेड कागज नहीं, बल्कि हाथ से बनाई गई एक नायाब कलाकृति होती है. स्वीडन और नॉर्वे के नामी आर्टिस्ट और कैलीग्राफर हर विनर के काम को देखकर इसे डिजाइन करते हैं. डिजाइन इस तरह से होता है कि वो एक जैसा न रहे. इसलिए इसे अनोखा सर्टिफिकेट कहते हैं.
अनमोल सर्टिफिकेट को सहेजने के लिए बकरे की खाल यानी गोटस्किन लेदर से बना एक कवर भी दिया जाता है. हर सब्जेक्ट के हिसाब से रंग अलग होता है. उदाहरण के लिए, जैसे केमिस्ट्री के लिए लाल और फिजिक्स के लिए गहरा नीला. इसके साथ अंदर से मखमली अहसास वाला एक हैंडमेड बॉक्स भी मिलता है.
हर साल 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर एक खास कार्यक्रम होता है, जिसमें यह अवॉर्ड दिया जाता है. अधिकांश श्रेणियों के लिए समारोह स्टॉकहोम कॉन्सर्ट हॉल में आयोजित होता है, जबकि शांति पुरस्कार नॉर्वे के ओस्लो में अलग से दिया जाता है.
अवॉर्ड शो के बाद स्टॉकहोम में 'नोबेल बैंक्वेट' का आयोजन होता है, जो दुनिया के सबसे हाई-प्रोफाइल डिनर में शुमार है. यहां स्वीडन का राजपरिवार, दुनियाभर के बड़े नेता और चुनिंदा हस्तियां विजेताओं के साथ बैठकर खाना खाते हैं. इसमें अवॉर्ड विनर्स को भी बुलाया जाता है.
जिन लोगों को नोबेल मिलता है, वो दुनिया के सबसे बड़े विचारकों और वैज्ञानिकों की एलीट लिस्ट में शामिल हो जाते हैं. उन्हें पूरी जिंदगी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज, सम्मेलनों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबसे खास मेहमान का दर्जा और तरजीह मिलती है.
यह अवॉर्ड सिर्फ एक दिन का नहीं होता. विनर्स का नाम, उनकी जीवनी और उनकी रिसर्च हमेशा-हमेशा के लिए नोबेल फाउंडेशन के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती है. यह सिलसिला 1901 से शुरू हुआ था, जो आज तक जारी है और यह एक इतिहास के तौर पर सुरक्षित रखा गया है.
'नोबेल वीक' में विनर्स के पास दुनिया के सामने अपने विचार रखने के लिए लेक्चर्स और चर्चाओं का मंच मिलता है. इसके जरिए वे सीधे आम लोगों और छात्रों से जुड़ते हैं और उनकी रिसर्च पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन जाती है.