बतौर सरकार के प्रमुख, पीएम मोदी की जनसेवा के आज 25 साल पूरे हुए हैं. इस अवसर को भारतीय जनता पार्टी ने एक पॉलिटिकल अपॉर्च्युनिटी में बदल दिया. बीजेपी ने देश के अलग-अलग जिलों में सेवा ज्योति यात्रा निकालकर लोगों से कनेक्ट करने का प्रयास किया, तो खुद पीएम मोदी ने दृढ़ता से भरा नया नारा दिया. बीजेपी ने पीएम मोदी की अजेय वाली छवि पेश करने के साथ-साथ गवर्नेंस और विकास मॉडल प्रस्तुत किया तो पीएम मोदी ने भविष्य के भारत की रूपरेखा दिखाई.
बीजेपी ने जिस तरह आज के दिन को राजनीतिक अवसर के रूप में बदला है, वो इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एकजुट विपक्ष सरकार के खिलाफ पूरी शक्ति के साथ गोलबंद हो रहा है. आज भी विपक्ष ने बीजेपी के कार्यक्रम का अटेंशन अपनी ओर डायवर्ट करने की पूरी कोशिश की. पॉलिटिकल लंच से लेकर हंगामा तक, सबकुछ हुआ. आज हम विपक्ष की लंच पॉलिटिक्स का विश्लेषण करेंगे, लेकिन पहले पीएम मोदी के 25 साल की जनसेवा और भविष्य के विजन को डिकोड करेंगे.
नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार सरकार के हेड की जिम्मेदारी संभाली थी. फिर लगातार 12 वर्ष और 227 दिनों तक वो गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. उसके बाद 12 साल और 134 दिनों से देश के प्रधानमंत्री हैं. ऐसा देश में कोई दूसरा नेता नहीं हुआ. आज जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पीएम मोदी सुबह साढ़े 10 बजे दिल्ली के सरोजिनी नगर में श्री विनायक मंदिर गए और भगवान श्रीगणेश की पूजा-अर्चना की. वहां से निकलकर वो इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम पहुंचे, जहां पर 'विकसित भारत संकल्प सभा' को संबोधित किया. इसी संबोधन के दौरान उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीगणेश से क्या-क्या मांगा.
ऐतिहासिक अवसर पर जिस तरह उन्होंने पार्टी के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राजनीति को आगे बढ़ाया, उसी तरह उन्होंने भविष्य में जनसेवा के लिए शक्ति मांगकर ये बता दिया कि 76 साल की उम्र में भी वो भविष्य को लेकर मंथन कर रहे हैं.
उन्होंने खुद को नेता नहीं, बल्कि जनसेवक की तरह पेश करके जनता से भावनात्मक जुड़ाव का अहसास कराया. जब वो देश की निरंतर प्रगति की बात कर रहे थे, तो निश्चित तौर पर वो विकसित भारत के संकल्प को दोहरा रहे थे. इसके लिए उन्होंने आज एक नया नारा दिया. वो नारा है- We Will Do It. इस नए नारे के साथ पीएम मोदी ने स्पष्ट तौर पर भविष्य का विजन रखा. हम आपको सुनाते हैं कि उन्होंने नए नारे के साथ क्या-क्या संकल्प दोहराया?
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— Zee News (@ZeeNews) October 7, 2026
सरकार के प्रमुख के तौर पर कीर्तिमान बनाने वाले पीएम मोदी अगर 'विकसित भारत 2047' और 'टॉप-3 इकोनॉमी' का संकल्प दोहरा रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि उन्होंने विपक्ष के चुनाव आयुक्त पर प्रदर्शन वाली बहस को सीधे विकास और भविष्य के भारत पर केंद्रित करने की कोशिश की है. उन्होंने बताने की कोशिश की कि उनके पास देश के लिए बड़ा विजन है. उन्होंने ये बताने का प्रयास किया कि वो भविष्य के बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को सामने रखकर काम कर रहे हैं, जबकि विपक्ष झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है.
पीएम मोदी ने मैन्युफैक्चरिंग हब, अंतरिक्ष विज्ञान और ओलंपिक की मेजबानी जैसी बातों का जिक्र कर सीधे तौर पर देश की युवा पीढ़ी को आकर्षित करने की कोशिश की है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कह रहे हैं, उसे पूरा करने में कई चुनौतियां भी हैं. जैसे ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह में बड़ी चुनौतियां हैं. भारत में बिजली, जमीन और माल ढुलाई महंगी होने के कारण 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है.
टॉप-3 अर्थव्यवस्था बनने के संकल्प में सबसे बड़ी चुनौती प्रति व्यक्ति आय की असमानता है. हमारी प्रति व्यक्ति आय अमेरिका से बहुत कम है. इसके अलावा, वैश्विक मंदी, व्यापार प्रतिबंध और युद्ध भी भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकते हैं. अंतरिक्ष मिशन की राह में सीमित बजट एक बड़ी समस्या है. नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी की तुलना में इसरो का बजट काफी कम है. साथ ही, भारत में अभी स्पेस-टेक स्टार्टअप्स और निजी निवेश को उस स्तर तक बढ़ाना बाकी है.
इसी तरह, ओलंपिक की मेजबानी में भारी खर्च सबसे बड़ी चुनौती है. इसके आयोजन पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं, जिसे संभालना और सही ठहराना भारत जैसे विकासशील देश के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ होगा.
मित्रों, स्वामी विवेकानंद ने कहा है,'कठिनाइयां और चुनौतियां जितनी बड़ी होंगी, उन्हें पार करने के बाद पुरुषार्थ और विजय उतनी ही शानदार होगी.'
आज जब प्रधानमंत्री देश को संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने खुद को जेन जी से जोड़ने के लिए किस तरह छात्र और स्कूल का जिक्र किया, वो भी आपको सुनना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 50 मिनट के भाषण में न सिर्फ खुद को डाउन टू अर्थ बताया, बल्कि ये संदेश दिया कि देश को विकसित और सर्वश्रेष्ठ बनाने का विजन उनके पास है. अपने संबोधन के दौरान देश या राष्ट्र, संकल्प और सेवा जैसे शब्दों का सबसे ज्यादा बार प्रयोग किया, लेकिन "We Will Do It" को उन्होंने 6 बार दोहराया.
जब तक कोई काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक वह असंभव ही लगता है, लेकिन एक बड़ा संकल्प और एक अटूट सपना ही दुनिया को बदल सकता है. इसी मंत्र को जब पीएम मोदी ने दोहराया, तो उनके आत्मविश्वास से बीजेपी के कार्यकर्ता और तमाम नेता उत्साहित दिखे. हम आपको दिखाते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में किस तरह बीजेपी ने इस विशेष दिन को राजनीतिक अवसर में बदल दिया.
एक दृश्य है गुरुग्राम का... जब गृहमंत्री अमित शाह ने मशाल जलाकर विकसित भारत संकल्प सभा-सेवा ज्योति यात्रा को आगे बढ़ाया. उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद थे. अमित शाह गुरुग्राम में थे, तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गाजियाबाद में. उन्होंने बताया कि पिछले 25 सालों से पीएम मोदी किस तरह राष्ट्रसेवा में जुटे हुए हैं.
आज तक बीजेपी में किसी नेता ने इतने लंबे समय तक सरकार के प्रमुख के तौर पर काम नहीं किया. यूं तो पवन कुमार चामलिंग 24 साल 165 दिनों तक मुख्यमंत्री रहे हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी 25 साल के दौरान मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री, दोनों रहे हैं और ऐसा दूसरा कोई नहीं हुआ. इसीलिए ये विशेष दिन है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन दिल्ली में मौजूद थे. वहां उन्होंने सेवा की ज्योति जलाकर बताया कि कैसे ये ऐतिहासिक क्षण आया है.
देश के अलग-अलग बीजेपी शासित राज्यों में भव्य कार्यक्रम किए गए. वाराणसी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान सेवा संकल्प अभियान के तहत वडनगर से काशी तक यात्रा करने वाले सेवा यात्रियों का सम्मान किया गया. इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और असम के सीएम भी मौजूद थे.
इसी तरह महाराष्ट्र में फडणवीस और राजस्थान में भजनलाल शर्मा ने जनसेवा की ज्योति जलाई. उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पूजा-अर्चना के साथ ज्योति जलाई.
बिहार में सीएम सम्राट चौधरी, उनके मंत्री और बीजेपी नेताओं ने संकल्प लिया, तो जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करने में पूरी शक्ति लगाने की शपथ दोहराई.
जहां बीजेपी की सरकार है, वहां भी... और जहां बीजेपी की सरकार नहीं है, वहां भी, हर राज्य में..हर जिले में कार्यक्रम आयोजित करके बीजेपी ने सेवा संकल्प अभियान को आगे बढ़ाया.
बीजेपी ने इस कार्यक्रम के जरिए ये बताने की कोशिश की है कि कैसे पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया. सीएम से लेकर पीएम तक, इन 25 वर्षों में मोदी सरकार के दौरान, गुजरात से पूरे देश तक कैसे नया गवर्नेंस मॉडल विकसित किया गया. 'मेड इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियान को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताई गई और ये सब इसलिए किया गया क्योंकि बीजेपी के लिए जीत का सबसे बड़ा फैक्टर अब भी 'ब्रैंड मोदी' है और 'ब्रैंड मोदी' जितना मजबूत बना रहेगा..शासन काल उतना ही लंबा होगा.