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Sirsa News: सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ में आज का दिन बेहद गमगीन और गर्व से भरा रहा. जम्मू-कश्मीर के राजौरी में तैनात लांस नायक सुखचैन सिंह देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हो गए. जब तिरंगे में लिपटा सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर सेना की गाड़ी में उनके पैतृक गांव कुत्ताबढ़ पहुंचा तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. आसपास के गांवों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से अपने लाडले को अंतिम विदाई दी.
गौरतलब है कि लांस नायक सुखचैन सिंह को ठीक 10 दिन बाद छुट्टी लेकर घर आना था. उनका 5 साल का बेटा अपने पिता के आने और धूमधाम से अपना जन्मदिन मनाने का इंतजार कर रहा था, लेकिन किसे मालूम था कि घर का चिराग छुट्टियों में मुस्कुराता हुआ आने के बजाय तिरंगे में लिपटकर लौटेगा. पिता की शहादत से अनजान मासूम बच्चा बस अपने चारों तरफ उमड़े जनसैलाब को निहार रहा था.वहीं वीरांगना पत्नी ने ''जो बोले सो निहाल'' के नारों से शहीद को अंतिम विदाई दी. शहीद की अंतिम यात्रा में उनकी पत्नी का अदम्य साहस और देशभक्ति का जज्बा देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं.
गांव के श्मशान घाट पर शहीद सुखचैन सिंह का अंतिम संस्कार पूरी तरह से राजकीय सम्मान के साथ किया गया. सेना के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर (सैनिक सम्मान की सलामी) अपने साथी जवान को श्रद्धांजलि दी. इसके बाद शहीद के 5 वर्षीय मासूम बेटे और उनके छोटे भाई ने अश्रुपूरित आंखों से पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी. इस दौरान ''जब तक सूरज चांद रहेगा, सुखचैन सिंह तुम्हारा नाम रहेगा'' के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा.
अंतिम संस्कार के अवसर पर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ जिला प्रशासन के आला अधिकारी भी मौजूद रहे. अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया और दुखी परिवार को ढांढस बंधाया. प्रशासन की ओर से शहीद परिवार को हर संभव सरकारी मदद और सम्मान देने का आश्वासन दिया गया.
कर्नल इंद्र सिंह और शहीद सुखचैन के चचेरे भाई और गांव के लोगों ने बताया कि सुखचैन सिंह बचपन से ही बेहद मिलनसार और खेलकूद में आगे रहने वाले युवा थे. उन्हें फुटबॉल खेलने का बहुत शौक था और वे गांव के मैदान में स्थानीय खिलाड़ियों के साथ घंटों अभ्यास किया करते थे. देश सेवा का जुनून ऐसा था कि उन्होंने लगातार मेहनत की और वर्ष 2015 में भारतीय सेना ज्वाइन कर अपना सपना पूरा किया.उनकी शहादत ने न केवल कुत्ताबढ़ गांव, बल्कि पूरे सिरसा जिले और हरियाणा प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. शहीद लांस नायक सुखचैन सिंह का यह बलिदान भावी पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा.
(सिरसा से विजय कुमार की रिपोर्ट)