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Haryana News: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मौजूद ज्योतिसर देशभर के भक्तों के लिए एक बहुत ही खास धार्मिक जगह है. माना जाता है कि महाभारत युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान इसी जगह पर दिया था. इसीलिए ज्योतिसर को कुरुक्षेत्र के खास तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है. हालांकि, यह जगह सिर्फ गीता की शिक्षाओं के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि यहां की पुरानी निशानियां और मंदिर परिसर भी एक दिलचस्प इतिहास समेटे हुए हैं.
गीता की शिक्षाओं से जुड़ा है ज्योतिसर
ज्योतिसर का सबसे बड़ा धार्मिक महत्व इस मान्यता से है कि भगवान कृष्ण ने युद्ध शुरू होने से पहले अर्जुन को कर्म, धर्म और जीवन का ज्ञान दिया था. इसी परंपरा के कारण, यहां के पवित्र बरगद के पेड़ को भी खास महत्व दिया जाता है. भक्तों का मानना है कि यह पेड़ उस ऐतिहासिक घटना की याद से जुड़ा है.
एक पुराने मंदिर के निशान भी मिले हैं
ज्योतिसर का इतिहास महाभारत काल की धार्मिक मान्यताओं तक ही सीमित नहीं है. यहां पुरानी धार्मिक इमारतों के अवशेष भी देखे जा सकते हैं. मौजूद ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, इस इलाके में कभी पुराने मंदिर रहे होंगे. समय के साथ, इन स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा और आज उनके आर्किटेक्चर के कुछ ही बचे हुए हिस्से ही दिखते हैं.
ज्योतिसर में 9वीं-10वीं सदी के मंदिर आर्किटेक्चर के बचे हुए हिस्सों का भी जिक्र है. इससे पता चलता है कि यह इलाका सदियों से धार्मिक गतिविधियों का एक अहम सेंटर रहा है.
1850 में बना शिव मंदिर
ज्योतिसर के मौजूदा धार्मिक कॉम्प्लेक्स को बनाने में कई शाही परिवारों ने मदद की है. ऐतिहासिक बातों के अनुसार, कश्मीर के राजा ने 1850 में यहां एक शिव मंदिर बनवाया था. इसके बाद, ज्योतिसर में धार्मिक गतिविधियां और भक्तों का आना-जाना बिना रुके चलता रहा.
1924 में बरगद के पेड़ के चारों ओर चबूतरा बनाया गया
कहा जाता है कि दरभंगा के राजा ने भी पवित्र बरगद के पेड़ से जुड़ी परंपरा को बढ़ावा देने में मदद की थी. 1924 में उन्होंने पेड़ के चारों ओर एक पत्थर का चबूतरा बनवाया. आज भी, यह जगह भक्तों के लिए एक बड़ा आकर्षण बनी हुई है और लोग यहां पूजा करने आते हैं.
इतिहास, आस्था और महाभारत की यादों का संगम
ज्योतिसर की खासियत यह है कि यह धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास की कई परतें दिखाता है. एक तरफ, यह भगवान कृष्ण की गीता की शिक्षाओं से जुड़ा है तो दूसरी तरफ, यहां के पुराने आर्किटेक्चरल अवशेष इस इलाके की लंबे समय से चली आ रही धार्मिक विरासत की ओर इशारा करते हैं.
इसीलिए ज्योतिसर कुरुक्षेत्र आने वाले तीर्थयात्रियों और इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों के लिए एक खास जगह रखता है. इसकी कहानी सिर्फ महाभारत की मान्यताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं और ऐतिहासिक विरासत भी शामिल है.