Haryana में 21 साल की सेवा के बाद भी परमानेंट नहीं होंगे गेस्ट टीचर, नियमितीकरण के दावे खारिज; सरकार का आदेश जारी
हरियाणा के शिक्षा विभाग ने करीब 12 हजार गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण के दावों को खारिज कर दिया है. कहा गया है कि लंबे समय तक सेवा देने मात्र से नियमित शिक्षक का दर्जा पाने का अधिकार नहीं मिलता.
हरियाणा में करीब 12 हजार गेस्ट टीचर्स को नियमित शिक्षक का दर्जा देने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण के दावों को खारिज करते हुए स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर दिए हैं. विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अतिथि अध्यापकों की नियुक्तियां नियमित भर्ती के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हुई थीं, इसलिए उन्हें वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों का लाभ नहीं दिया जा सकता.
21 साल की सेवा के बावजूद नहीं मिलेगा नियमितीकरण
अतिथि अध्यापक वर्ष 2005 से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं. शिक्षा विभाग के अनुसार, उस समय शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए स्कूलों में प्रति पीरियड के आधार पर अतिथि अध्यापकों की सेवाएं ली गई थीं. विभाग का तर्क है कि उनकी नियुक्तियों में नियमित भर्ती की तरह केंद्रीकृत चयन प्रक्रिया, परीक्षा आधारित मेरिट और आरक्षण के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया था.
2014 की नीति का दिया हवाला
सरकार ने नियमितीकरण से इनकार करने के लिए 16 और 18 जून 2014 की नीतियों का हवाला दिया है. विभाग के अनुसार, नियमितीकरण के लिए निर्धारित सेवा अवधि, आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, स्वीकृत रिक्त पद और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है. केवल लंबे समय तक सेवा देने के आधार पर नियमितीकरण का अधिकार नहीं बनता.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी हुआ स्पीकिंग ऑर्डर
यह मामला सुखविंदर सिंह बनाम हरियाणा राज्य केस से जुड़ा है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 मई 2026 को संबंधित याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के दावों पर विचार करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद 6 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि दावों का फैसला उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाए. नियमितीकरण का दावा पात्रता के तहत बनता है तो लाभ दिया जाए, अन्यथा उचित कारणों के साथ आदेश जारी किया जा सकता है.
2019 के कानून से सेवा सुरक्षा, नियमित पद का अधिकार नहीं
विभाग ने हरियाणा अतिथि अध्यापक सेवा अधिनियम, 2019 का हवाला देते हुए कहा है कि इस कानून का उद्देश्य अतिथि अध्यापकों की सेवा निरंतरता और कार्यकाल को सुरक्षा देना है. विभाग ने इसे स्वतः नियमित शिक्षक का दर्जा या नियमित वेतनमान पाने का अधिकार नहीं माना है.
शिक्षा विभाग के इस फैसले के बाद अतिथि अध्यापकों की नियमितीकरण की लड़ाई फिर अदालत पहुंच सकती है. अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अतिथि अध्यापक इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हैं या नहीं और अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है.
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(विजय राणा की रिपोर्ट)