हरियाणा के स्कूलों में बच्चों पर रहेगी खास नजर, 122 काउंसलर करेंगे मानसिक परेशानियों की पहचान
पंचूकाल में हुई घटना के बाद से हरियाणा सरकार स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को लेकर सतर्क हो गई है. बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहत बनाने के लिए सरकार एक पहल करने जा रही है. जल्द गी हरियाणा के स्कूलों में साथ प्रोजेक्ट का चालू किया जाएगा.
हरियाणा में स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहत बनाने के लिए सरकार एक नई पहल करने की तैयारी कर रही है. इस का नाम 'साथ' प्रोजेक्ट रखा गया है. इसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मानसिक परेशानियों से निपटने की मदद दी जाएगी. इस योजना के तहत क्लास 6 से 12 तक के छात्रों को शामिल किया जाएगा. इसका उद्देश्य बच्चों की समस्याओं को समय रहते पहचानना और उन्हें सही मदद उपलब्ध कराना है.
क्यों लिया गया है ये फैसला?
दरअसल, पंचकूला में 6 साल की बच्ची के साथ स्कूल के एक नाबालिग छात्र की मारपीट की घटना सामने आई थी. इसके बाद से ही स्कूल के बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में अब प्रदेश सरकार ने स्कूलों में बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता देने की योजना तैयार की है. इस तरह के प्रोजेक्ट को स्वास्थ्य विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा.
200 सरकारी स्कूलों में लागू करने की तैयारी
प्रस्तावित योजना के पहले चरण के तहत हरियाणा के 200 स्लूलों को इसमें सामिल किया जाएगा. इसके लिए 122 काउंसलर और 400 टीचरों का नेटवर्क बनाया जाएगा. इस टीचरों और र काउंसलरों को बच्चों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को समझने के लिए जोड़ा जाएगा. इस योजना के तहत बच्चों का परेशानियों को स्कूल के स्तर पर ही पहचाना जाएगा. साथ ही जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग दिया जाएगा.
इन समस्याओं पर रहेगा विशेष ध्यान
साथ प्रोजेक्ट के तहत बच्चों में होने वाली कई तरह की समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा. इनमें परीक्षा का तनाव, टेशन, अवसाद, बुलिंग यानी दूसरे बच्चों को परेशान करना, सामाजिक रूप से अलग-थलग रहना और मोबाइल या स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल शामिल है. अक्सर देखा गया है कि बच्चे अपनी परेशानी खुलकर किसी नहीं बता पाते हैं.
ऐसे में अगर उनके व्यवहार में बदलाव आता है, तो परिवार वाले समय रहते ध्यान दे सकेंगे. वहीं जरूरत पड़ने पर बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद भी दिलाई जाएगी. इस योजना के तहत केवल बच्चों तो ही नहीं, बल्कि उनके परिवार वालों और शिक्षकों को भी शामिल किया जाएगा. वहीं स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम और विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे.
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