)
हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर दिखाई देने लगा है. 22 से 24 अक्टूबर तक चलने वाली इस हड़ताल के पहले दिन मेवात क्षेत्र के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है. नूंह, पुनहाना, नगीना और फिरोजपुर झिरका सहित विभिन्न क्षेत्रों में बिजली गुल होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, रेवाड़ी में भी बिजली कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की है.
नूंह में बिजली व्यवस्था प्रभावित, कार्यालयों पर लटके ताले
जानकारी के अनुसार, नूंह जिले में बिजली विभाग के कुल 474 कर्मचारी हैं, जबकि हड़ताल के दौरान केवल 12 कर्मचारी ही ड्यूटी पर बताए जा रहे हैं. कर्मचारियों की कम संख्या के कारण बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में दिक्कतें आ रही हैं. जिले में बिजली विभाग के कई कार्यालयों पर ताले लटके हुए हैं और अधिकांश कर्मचारी ड्यूटी से नदारद हैं. बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों के साथ-साथ बिजली पर निर्भर विभिन्न कार्यों में भी परेशानी आ रही है.
बिजली घरों और कार्यालयों पर पुलिस तैनात
हड़ताल के मद्देनजर किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस प्रशासन ने बिजली घरों और विभागीय कार्यालयों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की है. बिजली व्यवस्था प्रभावित होने के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अगर जल्द ही हड़ताल का समाधान नहीं निकलता और बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं होती तो आने वाले दिनों में लोगों को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
रेवाड़ी में भी कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
रेवाड़ी में बिजली कर्मचारी हड़ताल पर चले गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. कर्मचारियों ने बिजली वितरण के निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग उठाई. उनका कहना है कि अगर तीन दिनों के भीतर सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.
खराबी आने पर बिजली शिकायतों का समाधान प्रभावित होने की आशंका
हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है. कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण बिजली की लाइन, ट्रांसफार्मर या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर मरम्मत कार्य प्रभावित हो सकता है. ऐसे में बिजली संबंधी शिकायतों का समाधान समय पर नहीं होने और उपभोक्ताओं को परेशानी होने की आशंका है.
हड़ताली कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों का समाधान निकालने की जिम्मेदारी सरकार की है. अगर सरकार तीन दिन के भीतर निजीकरण का फैसला वापस लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाती तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया जा सकता है. इससे बिजली सेवाओं पर और अधिक असर पड़ने की आशंका है.
(अनिल मोहनिया और नवीन की रिपोर्ट)