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Haryana में क्यों बढ़ रहे हैं Dog Bite के मामले? ₹96 लाख बजट के बावजूद क्यों नहीं हुई लावारिस कुत्तों की नसबंदी?

हरियाणा में कुत्तों के काटने के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी के बीच CAG ऑडिट रिपोर्ट में आवारा कुत्तों के नसबंदी सिस्टम में गंभीर कमियां सामने आई हैं. ₹96 लाख के बजट के बावजूद, 2023-24 में पानीपत में एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं हुई, जबकि दो साल में कुत्तों के काटने के मामले दोगुने होकर 36,336 हो गए.

Haryana में क्यों बढ़ रहे हैं Dog Bite के मामले? ₹96 लाख बजट के बावजूद क्यों नहीं हुई लावारिस कुत्तों की नसबंदी?
Image Credit: Haryana Dog Bite Cases

Haryana News: हरियाणा में कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने लावारिस कुत्तों के नसबंदी प्रोग्राम को लागू करने में गंभीर कमियों को सामने ला दिया है. पानीपत नगर निगम ने ₹96 लाख के बजट के बावजूद 2023-24 में एक भी नसबंदी नहीं की. पानीपत में कुत्तों के काटने के मामले दो साल में दोगुने होकर 2022-23 में 17,766 से 2024-25 में 36,336 हो गए.

ये नतीजे हरियाणा के शहरी स्थानीय निकायों पर मार्च 2024 तक के समय के लिए कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की तैयार की गई ऑडिट रिपोर्ट के हैं, जिसे मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में पेश किया गया.

CAG ने कहा कि कुत्तों के नसबंदी में कमी की वजह से कुत्तों की आबादी बढ़ी और काटने की घटनाएं बढ़ीं. एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग्स) रूल्स, 2001 के अनुसार, पालतू कुत्तों के मालिक कंट्रोल्ड ब्रीडिंग, इम्यूनाइजेशन, स्टेरिलाइजेशन और लाइसेंसिंग के लिए जिम्मेदार होंगे, जबकि स्ट्रीट डॉग्स को एनिमल वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन, प्राइवेट लोगों और लोकल अथॉरिटी की मदद से स्टेरिलाइज और इम्यूनाइज किया जाएगा.

CAG ने कहा कि पानीपत नगर निगम ने जनवरी 2021 में जून 2021 तक कुत्तों की नसबंदी के लिए एक एजेंसी को काम पर रखा था, जिसे आगे जून 2022 तक बढ़ा दिया गया. ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया, हालांकि, ABC रूल्स, 2001 के रूल 5(e) के तहत अपने काम को पूरा करने के लिए नगर निगम पानीपत द्वारा नसबंदी का काम देने से पहले कुत्तों की आबादी का कोई सर्वे या असेसमेंट नहीं किया गया था, जिसमें यह प्रावधान था कि डॉग कंट्रोल प्रोग्राम की प्लानिंग और मैनेजमेंट के लिए, स्ट्रीट डॉग्स की संख्या का सर्वे एक इंडिपेंडेंट एजेंसी द्वारा किया जाएगा.

CAG ने कहा कि एजेंसी ने जून 2022 तक लावारिस कुत्तों की कुल 6,187 नसबंदी की, जिसमें जून 2021 तक की 2,176 नसबंदी शामिल हैं. कुत्तों के काटने के मामलों की संख्या 2022-23 में 17,766 से बढ़कर 2023-24 में 21,576 और 2023-24 में 36,336 हो गई. ऑडिट रिपोर्ट में कहा कि 2024-25 में कुत्तों के काटने के मामलों में बढ़ोतरी का ट्रेंड दिखा. इसके बावजूद, साल 2023-24 में ₹96 लाख का बजट होने के बावजूद कुत्तों का नसबंदी नहीं किया गया. यह ध्यान देने वाली बात है कि कुत्तों के नसबंदी का वर्क ऑर्डर 4 फरवरी 2025 को जारी किया गया था, जो 25 मार्च 2025 से लागू होना था.

CAG ने कहा कि नगर निगम समालखा, नगर निगम फतेहाबाद, नगर निगम टोहाना और नगर निगम भुना में आवारा और पालतू कुत्तों की आबादी और कुत्तों के काटने के मामलों से जुड़ी लोगों की शिकायतों से जुड़े डेटा रिकॉर्ड नहीं रखे जा रहे थे. इसके अलावा, इन शहरी लोकल बॉडीज में कुत्तों का नसबंदी नहीं किया गया, जबकि फतेहाबाद जिले में कुत्तों के काटने के मामले 2022-23 में 4,647 से बढ़कर 2024-25 में 6,859 हो गए. ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया, लावारिस कुत्तों की आबादी को कंट्रोल करने के लिए कोई लंबे समय की रणनीति बनाए जाने का कोई सबूत नहीं मिला.

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About the Author

Renu Akarniya

Renu Akarniya

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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